2015 देवोत्थान के दिन हुई थी तमसा महोत्सव की शुरुआत

Published by : PANCHDEV KUMAR Updated At : 28 Jun 2025 11:39 PM

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तमसा महोत्सव को बिहार सरकार के कला व संस्कृति विभाग ने राज्य के सांस्कृतिक महोत्सवों की सूची में शामिल करने पर खुशी

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उदय कुमार भारती, हिसुआ

हिसुआ के नदी और पर्यावरण बचाने के मुहिम को लेकर हर साल होने वाले साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम तमसा महोत्सव को बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग ने राज्य के सांस्कृतिक महोत्सवों की सूची में शामिल किया गया है. हिसुआ की साहित्यिक और संस्कृति के कार्यक्रमों की कड़ी में हिसुआ के साहित्यकारों और समाजसेवियों ने 2015 में नदी बचाओ अभियान के तहत कार्यक्रम की शुरूआत की थी. अभिलाषा मंच के अलावा, धार्मिक विकास विचार मंच, धर्म संघ पीठ परिषद और भारत विकास परिषद् चार संस्थानों का मुख्य रूप से सहयोग था. शिक्षाविद् मिथिलेश कुमार सिन्हा के नेतृत्व और संयोजन में पहला कार्यक्रम 22 नवंबर 2015 को कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी जेठान के दिन हुआ था. उस वक्त अभिलाषा मंच के संयोजक डॉ मिथिलेश कुमार सिन्हा, अध्यक्ष डॉ मनुजी राय और सचिव उदय कुमार भारती थे. डॉ मिथिलेश सिन्हा आजीवन इसके संयोजक रहे और उनके देहावसान के बाद अभिलाषा का कार्यक्रम लगभग स्थगित रहा और न कोई विधिवत चुनाव हुआ. रामायण काल की प्रसिद्ध नदी तिलैया उर्फ तमसा नदी के प्रति श्रद्धा प्रगाढ़ करने के उद्धेश्य से इसकी शुरुआत हुई. दूसरे साल से इसे पर्यावरण बचाओ के संदेश से जोड़ा गया. पहले वर्ष मनमोहक रंगोली बनाकर, दीपों को प्रज्वलित कर, विधि विधान और शंखध्वनि से नदी की सामूहिक आरती हुई थी. कार्यक्रम में संयोजक मिथिलेश सिन्हा के अलावा सिद्धनाथ पांडेय, प्रवीण कुमार पंकज, मधुकांत, पंकज राज, राकेश कुमार, मनोज कुमार, देवेंद्र विश्वकर्मा, दीपक कुमार, धनंजय कुमार, देवेंद्र पांडेय, आदि थे. उस दिन से नदी और पर्यावरण बचाओ के संदेश के साथ तमसा महोत्सव मनाने की परिपाटी बनी. स्कूली बच्चों की रंगोली प्रतियोगिता, नदी और पर्यावरण बचाने से जुड़े संदेशों पर संभाषण और लेखन प्रतियोगिता, कवि सम्मेलन, गंगा आरती, दीपोत्सव और ईख को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की शुरूआत हुई. कालांतर में लोग जुड़े और एक कारवां बना. तमसा नदी का संरक्षण और उतथान के लिए लगातार हिसुआ के साहित्यकार, शिक्षाविद्, समाजसेवी, पत्रकार आदि सभी सक्रिय रहे. अधिकारियों के सहयोग को भी भुलाया नहीं जा सकता है.

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