नवादा: रजौली के बाराटांड़ मध्य विद्यालय के शिक्षक मो. खालिद असलम सस्पेंड, हाजिरी पंजी में हेराफेरी का आरोप

Author Kr manish dev|Edited by Vikash Jha
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नवादा जिले के रजौली प्रखंड में एक शिक्षक को घोर लापरवाही और हाजिरी पंजी में हेराफेरी के आरोप में निलंबित कर दिया गया है. उन पर स्कूल से अनाधिकृत रूप से गायब रहने का भी आरोप है. यह कार्रवाई विभागीय जांच के बाद की गई है.

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Nawada News: नवादा जिले के रजौली प्रखंड क्षेत्र के सवैयाटांड़ पंचायत अंतर्गत बाराटांड़ स्थित मध्य विद्यालय के नियोजित शिक्षक मोहम्मद खालिद असलम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. उन पर कर्तव्य में घोर लापरवाही बरतने, अनाधिकृत रूप से विद्यालय से गायब रहने और उपस्थिति पंजी (हाजिरी रजिस्टर) में अवैध रूप से हेराफेरी करने का गंभीर आरोप लगा है. जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) नवादा के अनुमोदन के बाद जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) "स्थापना" शिवकुमार वर्मा द्वारा ज्ञापांक 2798 के तहत इस संबंध में आधिकारिक आदेश पत्र जारी किया गया है. इसके साथ ही प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO)-सह-प्रखंड शिक्षक नियोजन इकाई रजौली को निलंबन की कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए जल्द से जल्द संतोषजनक रिपोर्ट सौंपने का सख्त निर्देश दिया गया है.

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निरीक्षण में काटी गई हाजिरी को अवैध रूप से सुधारा

विभाग द्वारा जारी किए गए आरोप पत्र के अनुसार, यह पूरा मामला उस समय का है जब मोहम्मद खालिद असलम विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत थे. पूर्व में किए गए एक प्रशासनिक निरीक्षण के दौरान वे स्कूल से बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित पाए गए थे. जांच टीम द्वारा 18 अगस्त 2025 से 28 अगस्त 2025 तक उपस्थिति पंजी पर उनकी हाजिरी दर्ज नहीं होने के कारण उस कॉलम को लाल स्याही से काटा गया था. लेकिन इसके बाद 22 जनवरी 2026 को प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) द्वारा किए गए एक अन्य औचक निरीक्षण में यह गंभीर मामला उजागर हुआ कि शिक्षक ने पूर्व में काटे गए निशानों को अवैध रूप से मिटाकर उन दिनों की भी पिछली उपस्थिति पिछले दरवाजे से दर्ज कर ली थी.

स्पष्टीकरण का जवाब नहीं देने पर हुई सख्त कार्रवाई

इस गंभीर कदाचार, वित्तीय व प्रशासनिक धोखाधड़ी और विभागीय नियमों के खुले उल्लंघन को लेकर स्थापना शाखा द्वारा बीती 7 अप्रैल 2026 को विरोधी शिक्षक से शो-कॉज (स्पष्टीकरण) की मांग की गई थी. विभाग ने उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा समय दिया, लेकिन शिक्षक द्वारा अद्यावधि (अब तक) इस संबंध में कोई लिखित या संतोषजनक जवाब दाखिल नहीं किया गया. इसे विभागीय आदेश की अवहेलना मानते हुए प्रशासन ने बिहार सरकारी सेवक नियमावली 1976 के निहित प्रावधानों के तहत उन्हें प्रथम दृष्टया दोषी पाया. इसके बाद विभाग द्वारा अनुशासनिक कार्रवाई करते हुए यह निलंबन की बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की गई है. इस कार्रवाई से क्षेत्र के अन्य लापरवाह शिक्षकों में हड़कंप मच गया है.


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