रजौली बाइपास पर जलजमाव से खराब हालात, प्रशासन और निर्माण एजेंसी पर स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा

Author Kr manish dev|Edited by Yuvraj Ratan
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रजौली बाइपास और सिरदला मार्ग पर विकास के दावों की खुली पोल, गाबर कंस्ट्रक्शन और आरसीडी के बीच फुटबॉल बनी आम अवाम

जलजमाव की तस्वीर

Nawada News : रजौली बाइपास पर जलजमाव और बदहाल सड़क से स्थानीय जनता परेशान है. निर्माण एजेंसी की लापरवाही और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण लोगों का जीना मुहाल हो गया है. जानिए कब मिलेगी राहत.

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Nawada News : रजौली क्षेत्र की जनता इन दिनों विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच भारी परेशानियों का सामना कर रही है. रजौली बाइपास स्थित सिरदला-रजौली मार्ग प्रशासनिक उपेक्षा, निर्माण एजेंसी की लापरवाही और जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बदहाल हो चुका है. स्थानीय लोग इस स्थिति को "नारकीय" बताते हुए वर्षों से समाधान की मांग कर रहे हैं.

जल निकासी नहीं होने से सड़क पर भर रहा पानी

स्थानीय लोगों का कहना है कि फोरलेन निर्माण के दौरान निर्माण एजेंसी गाबर कंस्ट्रक्शन द्वारा जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई. सड़क निर्माण के कारण प्राकृतिक जल निकासी के रास्ते बंद हो गए हैं. नतीजतन, हल्की बारिश में भी मुख्य सड़क पर पानी जमा होकर तालाब जैसी स्थिति बन जाती है. स्थानीय निवासी पीयूष कुमार, सुधीर कुमार, संजय सिंह समेत अन्य लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले वैकल्पिक नाला या जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई, जिसका खामियाजा अब आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है.

निर्माण कंपनी ने जिम्मेदारी से किया इनकार

गाबर कंस्ट्रक्शन के प्रोजेक्ट मैनेजर राजेंद्र त्रिपाठी ने जलजमाव वाले क्षेत्र को अपने कार्यक्षेत्र से बाहर बताते हुए कहा कि यह हिस्सा पथ निर्माण विभाग (आरसीडी) के अधिकार क्षेत्र में आता है. उन्होंने बताया कि कंपनी ने इस संबंध में विभाग को पहले ही सूचित कर दिया है. यदि यह क्षेत्र कंपनी के दायरे में होता तो नाला निर्माण का कार्य पहले ही कराया जा चुका होता.

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सीओ की रिपोर्ट के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

स्थानीय प्रशासन ने भी समस्या को गंभीर माना है. रजौली के अंचलाधिकारी (सीओ) गुफरान मजहरी ने प्रभावित क्षेत्र का सर्वेक्षण और मापी कर विस्तृत रिपोर्ट वरीय अधिकारियों एवं संबंधित विभाग को भेजी थी. इसके बावजूद अब तक न तो किसी प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई हुई और न ही स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल की गई.

आरसीडी ने टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की दी जानकारी

पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि इस संबंध में एनएचएआई और संबंधित एजेंसियों के साथ बैठक हो चुकी है. आरसीडी की ओर से दोनों तरफ करीब 100-100 मीटर लंबा नाला निर्माण कराने के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है. उन्होंने बताया कि इस कार्य में एक से डेढ़ माह या उससे अधिक समय लग सकता है. अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) के सहयोग से अतिक्रमण हटाकर अस्थायी कच्ची नाली बनाकर जल निकासी की व्यवस्था करने का प्रयास किया जाएगा.

बरसात में व्यापार और आवागमन दोनों प्रभावित

मानसून के दौरान सड़क पर घुटनों तक पानी भर जाने से स्थानीय दुकानदारों का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक बाजार आने से कतराने लगे हैं, जिससे आर्थिक नुकसान लगातार बढ़ रहा है. वहीं महिलाओं, स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और अन्य राहगीरों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है. स्थानीय लोगों के अनुसार, पानी में छिपे गड्ढों के कारण आए दिन दोपहिया वाहन और ई-रिक्शा दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं.

एनएच-20 की साइड लेन भी हुई जर्जर

समस्या केवल सिरदला-रजौली मार्ग तक सीमित नहीं है. एनएच-20 की साइड लेन का एक हिस्सा जर्जर होने के कारण लंबे समय से बंद है. इसके चलते दूसरे लेन पर दोनों दिशाओं का यातायात संचालित किया जा रहा है. भारी वाहनों के लगातार दबाव के कारण वह लेन भी क्षतिग्रस्त हो गई है और कई स्थानों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं.

धूप निकलते ही मरम्मत शुरू करने का दावा

गाबर कंस्ट्रक्शन के प्रोजेक्ट मैनेजर राजेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि लगातार बारिश के कारण मरम्मत कार्य प्रभावित हुआ है. उन्होंने दावा किया कि मौसम साफ होते ही सड़क के एक हिस्से में डामर तथा दूसरे हिस्से में कंक्रीट और पेवर ब्लॉक लगाने का कार्य युद्ध स्तर पर शुरू किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि स्थायी मरम्मत पूरी होने तक सड़क की दैनिक मरम्मत कर यातायात सुचारु रखने का प्रयास किया जाएगा. हालांकि, नाला निर्माण की प्रक्रिया पूरी होने में अभी एक से डेढ़ माह का समय लगने की संभावना है. ऐसे में स्थानीय लोगों को इस मानसून में भी जलजमाव और बदहाल सड़क की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद फिलहाल कम नजर आ रही है.

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