नवादा में छात्रावास निर्माण पर बवाल, श्मशान घाट की जमीन को लेकर भड़के लोग; बीडीओ को सौंपा ज्ञापन
छात्रावास निर्माण को लेकर श्मशान घाट की जमीन का विरोध करते लोगों
नवादा जिले के अकबरपुर में श्मशान घाट की भूमि पर प्रस्तावित छात्रावास निर्माण को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा भड़क उठा है. ग्रामीणों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया और निर्माण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है.
Nawada Hostel Controversy : नवादा जिले के अकबरपुर के प्रखंड क्षेत्र में श्मशान घाट की जमीन पर प्रस्तावित छात्रावास निर्माण को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है. गुरुवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने एकजुट होकर प्रखंड कार्यालय पहुंचकर विरोध जताया और बीडीओ को ज्ञापन सौंपते हुए निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की. ग्रामीणों का साफ कहना है कि जिस जमीन पर छात्रावास बनाने की योजना है, वह वर्षों से श्मशान घाट के रूप में उपयोग होती रही है, ऐसे में वहां किसी भी तरह का निर्माण स्वीकार नहीं होगा.
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ग्रामीणों के मुताबिक, यह जमीन न सिर्फ अंतिम संस्कार के लिए उपयोग में लाई जाती है, बल्कि आसपास के कई गांवों के लोगों की आस्था और परंपरा से भी जुड़ी हुई है. ऐसे में यहां छात्रावास निर्माण का फैसला न सिर्फ असंवेदनशील है, बल्कि सामाजिक और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला भी है.
Nawada News : प्रशासन पर मनमानी का आरोप
विरोध कर रहे ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बिना स्थानीय लोगों की सहमति के इस जमीन को छात्रावास निर्माण के लिए चिन्हित कर दिया गया. ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने इस फैसले से पहले न तो ग्राम सभा की राय ली और न ही जमीन के वास्तविक उपयोग की जांच की.
लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर इस फैसले को वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. उनका कहना है कि श्मशान घाट की जमीन पर किसी भी प्रकार का निर्माण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
Akbarpur : 200 परिवारों की आस्था जुड़ी
ग्रामीणों ने अपने ज्ञापन में बताया कि करीब 200 परिवार इस श्मशान घाट का उपयोग करते हैं. यह जगह उनके लिए सिर्फ एक जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि भावनात्मक और सामाजिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है. ऐसे में यहां छात्रावास बनाना उनके अधिकारों का हनन है.
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि अगर प्रशासन छात्रावास बनाना ही चाहता है तो किसी अन्य उपयुक्त जमीन का चयन किया जाए, जहां इससे किसी की भावना आहत न हो.
वार्ड सदस्य के खिलाफ भी उठे सवाल
इस मामले में स्थानीय वार्ड सदस्य की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि वार्ड सदस्य ने बिना आम लोगों की सहमति के इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया. इसे लेकर लोगों में खासा आक्रोश देखा जा रहा है.
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी लोगों पर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के फैसले बिना जनसहमति के न लिए जा सकें.
Nawada Police : प्रशासन के फैसले पर टिकी नजर
फिलहाल बीडीओ को ज्ञापन सौंपने के बाद ग्रामीण प्रशासन के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं. इस मुद्दे ने पूरे इलाके में चर्चा का माहौल बना दिया है. अगर समय रहते समाधान नहीं निकला तो यह विवाद और बड़ा रूप ले सकता है.
अब देखना होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए क्या फैसला लेता है. फिलहाल हालात तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में हैं, और सभी की नजरें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं.
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