नवादा में 20 लाख का लोन घोटाला: फर्जी कागजात से पड़ोसी के मकान पर उठाया कर्ज, वसूली करने पहुंचे बैंक कर्मी तो खुला बड़ा खेल

Author Bablu kumar|Edited by Raginisharma
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मकान की जानकारी लेते बैंक कर्मी

मकान की जानकारी लेते बैंक कर्मी

नवादा के हिसुआ में एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है. फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर एक व्यक्ति ने दूसरे के पुश्तैनी मकान पर 20 लाख रुपये का लोन उठा लिया. जब बैंक के कर्मचारी वसूली के लिए पहुंचे तो असली मालिक हैरान रह गए.

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Nawada Bank Loan Scam : नवादा जिले के हिसुआ प्रखंड से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज़ के जरिए दूसरे के पुश्तैनी मकान पर 20 लाख रुपये का लोन उठा लिया गया. इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ, जब बैंक के कर्मचारी वसूली के लिए असली मकान मालिक के घर पहुंच गए. अचानक बैंक कर्मियों की बात सुनकर परिवार के लोग हैरान रह गए और मामला सामने आते ही इलाके में सनसनी फैल गई.

मामला तुंगी पंचायत के रामपुर मंझवे गांव का बताया जा रहा है. यहां के निवासी और पूर्व पैक्स अध्यक्ष ईश्वरी प्रसाद के पुत्र अंकित कुमार उर्फ जितेंद्र यादव ने बताया कि बुधवार की शाम करीब चार बजे उत्कर्ष बैंक के कर्मचारी उनके घर पहुंचे. उन्होंने बताया कि सुलेखा देवी, पति हीरा विश्वकर्मा के नाम पर 20 लाख रुपये का लोन लिया गया है और उसकी वसूली के लिए वे आए हैं. यह सुनकर पूरा परिवार सन्न रह गया, क्योंकि जिस मकान के नाम पर लोन लिया गया, वह उनकी पुश्तैनी संपत्ति है.

Nawada News : फर्जी दस्तावेज़ और वीडियो से उठाया गया लोन

पीड़ित अंकित कुमार ने आरोप लगाया है कि उनके ही पड़ोसी ने उनकी संपत्ति के कथित फर्जी कागजात और वीडियो का इस्तेमाल कर अपनी पत्नी के नाम से बैंक से लोन ले लिया. बिना असली मालिक की जानकारी के इस तरह से कर्ज स्वीकृत होना कई सवाल खड़े करता है. परिवार का कहना है कि उन्हें इस पूरे मामले की कोई जानकारी नहीं थी और अचानक बैंक की वसूली टीम के पहुंचने से उन्हें इस धोखाधड़ी का पता चला.

घटना सामने आने के बाद पीड़ित परिवार ने तुरंत हिसुआ थाना में आवेदन देकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई है. उन्होंने इसमें संबंधित लोगों को नामजद करते हुए निष्पक्ष जांच और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है.

Bank Scam : पुलिस जांच में जुटी, सच सामने आने का इंतजार

इधर, हिसुआ थानाध्यक्ष मृत्युंजय ने बताया कि पीड़ित परिवार से आवेदन प्राप्त हो गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है. उन्होंने कहा कि जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर किन दस्तावेजों के आधार पर बैंक ने लोन स्वीकृत किया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही.

यह मामला बैंकिंग प्रक्रिया और दस्तावेज़ सत्यापन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है. अगर आरोप सही साबित होते हैं तो यह एक बड़ा फर्जीवाड़ा माना जाएगा.

संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों को सुरक्षित रखना जरूरी

इस तरह की घटनाओं को देखते हुए विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. उनका कहना है कि जमीन या मकान से जुड़े सभी दस्तावेज़, फोटो और वीडियो को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है. साथ ही समय-समय पर अपनी संपत्ति के रिकॉर्ड की जांच करते रहना चाहिए.

किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलते ही तुरंत बैंक और पुलिस को सूचित करना चाहिए, ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके और इस तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सके.

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नवादा का यह मामला साफ दिखाता है कि जालसाज अब नए-नए तरीके अपनाकर लोगों की संपत्ति पर नजर गड़ाए बैठे हैं. ऐसे में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है. अब सबकी नजर पुलिस जांच पर टिकी है कि इस फर्जीवाड़े के पीछे कौन लोग हैं और उन पर कब तक सख्त कार्रवाई होती है.

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