नवादा में 43°C का टॉर्चर: इंसान से लेकर मवेशी और पक्षी तक बेहाल, जलस्रोत सूखने से बढ़ा संकट, दोपहर में सड़कें वीरान
Published by : Aditya Kumar Ravi Updated At : 24 May 2026 5:37 PM
ए आई द्वारा बनायी गयी तस्वीर
Nawada News: नवादा जिले के सिरदला प्रखंड में पिछले कई दिनों से 43 डिग्री सेल्सियस तापमान रहने के कारण आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है. भीषण गर्मी के कारण लौंद, बरदहा, खानपुरा और अकौना समेत कई गांवों में जलस्रोत सूखने से पशु-पक्षी प्यास से बेहाल हैं. दोपहर में लू के थपेड़ों के चलते सड़कें सुनसान हैं और बाजारों में सन्नाटा है. अस्पतालों में डिहाइड्रेशन के मरीज बढ़ रहे हैं, वहीं ग्रामीणों ने प्रशासन से सार्वजनिक स्थानों पर अविलंब पेयजल की व्यवस्था कराने की मांग की है.
Nawada News(पप्पू कुमार प्रभाकर): नवादा जिले के सिरदला प्रखंड में इन दिनों कुदरत का कहर बनकर टूट रही भीषण गर्मी और जानलेवा लू ने आम जनजीवन को पूरी तरह से पंगु बना दिया है. पिछले कई दिनों से पारा लगातार 43 डिग्री सेल्सियस के पार बना हुआ है, जिससे क्षेत्र में हाहाकार मचा है. इस तपती धूप और उमस का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि इसका शिकार सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि बेजुबान पशु-पक्षी भी हो रहे हैं.
सुबह से ही चलने लगती है ‘आग’, दोपहर होते ही पसर जाता है सन्नाटा
सिरदला प्रखंड मुख्यालय समेत ग्रामीण इलाकों में सुबह की शुरुआत के साथ ही सूरज की तपिश और गर्म पछुआ हवाओं का दौर शुरू हो जाता है. सिरदला बाजार, लौंद, बरदहा, खानपुरा, बाँधी, खटागी, रामरायचक, अकौना और ठेकाही सहित दर्जनों गांवों में लोग भीषण तपन से त्रस्त हैं. दोपहर होते ही लू के थपेड़ों के कारण स्थिति ऐसी हो जाती है कि प्रखंड की मुख्य सड़कें और व्यावसायिक बाजार पूरी तरह सुनसान व वीरान नजर आते हैं. लोग घरों में कैद रहने को मजबूर हैं.
सूखने लगे तालाब और जलस्रोत, प्यास से तड़प रहे बेजुबान
भीषण तपन के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के पारंपरिक तालाब, आहर और छोटे जलस्रोत तेजी से सूखने लगे हैं. पानी के अभाव में पालतू और आवारा मवेशियों को पानी की तलाश में मीलों भटकना पड़ रहा है. प्यास से बेहाल पक्षी पानी की आस में रिहायशी इलाकों और पेड़ों के आसपास मंडराते देखे जा रहे हैं. इस संकट के बीच कई गांवों में स्थानीय लोग मानवता का परिचय देते हुए अपने छतों और घरों के बाहर बर्तनों में पानी रखकर पक्षियों को राहत देने का सराहनीय प्रयास कर रहे हैं.
मजदूर और किसान सबसे ज्यादा परेशान, अस्पतालों में बढ़ने लगी भीड़
इस जानलेवा मौसम की सबसे तगड़ी मार रोज कमाने-खाने वाले दैनिक मजदूरों और अन्नदाताओं पर पड़ी है. लू के कारण खेतों में काम करने वाले किसान और निर्माण साइटों पर काम करने वाले मजदूर अब सिर्फ सुबह और शाम के वक्त ही सीमित काम कर पा रहे हैं. दोपहर में काम करना जान जोखिम में डालने जैसा है.
दूसरी ओर, भीषण गर्मी का सीधा असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी दिखने लगा है. सिरदला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) समेत स्थानीय निजी क्लीनिकों में तेज बुखार, उल्टी-दस्त, डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) और हीट स्ट्रोक के मरीजों की संख्या में अचानक तेजी से इजाफा हुआ है.
प्रशासन की अपील: घरों में रहें सुरक्षित; ग्रामीणों ने की प्याऊ लगाने की मांग
बढ़ते खतरे को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों के लिए चेतावनी जारी की है. अधिकारियों ने लोगों से बेहद जरूरी काम न होने पर दोपहर 12 से शाम 4 बजे के बीच बाहर न निकलने की अपील की है. साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी, ओआरएस या नींबू पानी पीने तथा बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ख्याल रखने की हिदायत दी है.
इधर, प्रखंड के प्रबुद्ध नागरिकों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सिरदला बाजार और विभिन्न मुख्य चौक-चौराहों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर राहगीरों के लिए अविलंब सरकारी स्तर पर पेयजल (प्याऊ) और चापाकालों की मुकम्मल व्यवस्था की जाए, ताकि लोगों को इस तपन में थोड़ी राहत मिल सके.
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