नवादा के चिरैयां स्कूल में अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी सम्पन्न, बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर मंथन
Published by : Aditya Kumar Ravi Updated At : 30 May 2026 5:09 PM
अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी के दौरान
Nawada News: नवादा के सिरदला स्थित प्राथमिक विद्यालय चिरैयां में शनिवार को प्रधान शिक्षक गौतम कुमार की अध्यक्षता में अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी सह लोक संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ. कार्यक्रम में मुख्य रूप से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक कल्याण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विस्तृत चर्चा की गई. इस दौरान नैतिक शिक्षा, नियमित उपस्थिति, गृहकार्य की निगरानी और सुरक्षित शनिवार जैसी गतिविधियों के महत्व पर प्रकाश डाला गया. अंत में शिक्षा क्षेत्र में बेहतर कार्य करने वाले अभिभावकों और शिक्षकों को सम्मानित किया गया.
Nawada News (पप्पू कुमार प्रभाकर): नवादा जिले के सिरदला प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय, चिरैयां में शनिवार, 30 मई को शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशानुसार अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी सह लोक संवाद कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया. इस विशेष संगोष्ठी की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधान शिक्षक गौतम कुमार ने की. इस लोक संवाद कार्यक्रम में विद्यालय शिक्षा समिति के सम्मानित सदस्य, स्थानीय अभिभावक, प्रबुद्ध ग्रामीण और शिक्षक-शिक्षिकाएं बहुत बड़ी संख्या में शामिल हुए.
बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए विद्यालय और परिवार में समन्वय जरूरी: प्रधान शिक्षक
इस बार की संगोष्ठी का मुख्य विषय “बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य एवं भावनात्मक कल्याण” निर्धारित किया गया था. कार्यक्रम के दौरान बच्चों के चहुंमुखी विकास, गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा तथा विद्यालय और अभिभावकों के बीच बेहतर आपसी तालमेल व समन्वय स्थापित करने को लेकर बिंदुवार विस्तृत चर्चा की गई.
उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधान शिक्षक गौतम कुमार ने कहा कि किसी भी बच्चे की सफलता और उसके उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में केवल विद्यालय की भूमिका पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसमें अभिभावकों और पूरे समाज का भी बराबर का योगदान होता है. उन्होंने माता-पिता से अपील की कि वे घर पर बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनके बदलते व्यवहार और मानसिक स्थिति पर भी नियमित रूप से नजर रखें.
नैतिक शिक्षा और ‘सुरक्षित शनिवार’ जैसी सह-शैक्षणिक गतिविधियों पर दिया गया जोर
संगोष्ठी के दौरान बच्चों के भीतर नैतिक शिक्षा को बढ़ावा देने, घर एवं विद्यालय दोनों जगह भयमुक्त व अनुकूल शैक्षणिक वातावरण तैयार करने, सतत मूल्यांकन प्रणाली को प्रभावी बनाने तथा रटने की बजाय गतिविधि एवं शोध आधारित व्यावहारिक शिक्षा को प्रोत्साहित करने पर विशेष जोर दिया गया.
इसके अलावा, विद्यालय में बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन कराने, उनकी दैनिक उपस्थिति सुनिश्चित करने, वर्गवार पाठ्यक्रम (सिलेबस) के अनुरूप अध्ययन, बच्चों की दैनिक डायरी और गृहकार्य (होमवर्क) की नियमित निगरानी, मासिक परीक्षा के परिणाम तथा शैक्षणिक प्रगति की समय-समय पर समीक्षा करने की आवश्यकता पर भी गंभीर चर्चा हुई. सत्र में संगीत, खेलकूद, आपदा प्रबंधन एवं ‘सुरक्षित शनिवार’ जैसी महत्वपूर्ण सह-शैक्षणिक गतिविधियों को बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए बेहद अपरिहार्य बताया गया.
उल्लेखनीय योगदान देने वाले अभिभावक और शिक्षक हुए सम्मानित
जागरूकता कार्यक्रम में पहुंचे अभिभावकों ने विद्यालय प्रशासन द्वारा संचालित की जा रही इन शैक्षणिक एवं रचनात्मक गतिविधियों की मुक्तकंठ से सराहना की. साथ ही उन्होंने भरोसा दिया कि वे अपने बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए विद्यालय परिवार को हरसंभव सहयोग प्रदान करेंगे.
कार्यक्रम के अंतिम चरण में विद्यालय के विकास, बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय व अनुकरणीय योगदान देने वाले जागरूक अभिभावकों और शिक्षकों को मंच पर अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया. पूरी तरह से सौहार्दपूर्ण और आत्मीय वातावरण में संपन्न हुए इस कार्यक्रम की ग्रामीणों ने प्रशंसा की और बच्चों के सुनहरे भविष्य के लिए कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करने का संकल्प दोहराया.
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