नवादा में एनजीटी के आदेश पर 15 जून से बालू खनन पर रोक, स्टॉक करने की मची होड़

Published by : Aditya Kumar Ravi Updated At : 30 May 2026 3:33 PM

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सांकेतिक तस्वीर

Nawada News: नवादा के मेसकौर और सीतामढ़ी क्षेत्र में एनजीटी के आदेशानुसार 15 जून से 15 अक्टूबर तक तिलैया और ढाढ़र नदी से बालू खनन पर पूर्ण रोक रहेगी. मानसून की दस्तक को देखते हुए घाट संचालकों में 300 मीटर के दायरे में बालू स्टॉक करने की होड़ मची है. जिला खनन पदाधिकारी अमन कुमार के अनुसार, तय सीमा से बाहर बालू डंप करने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी. इस चार महीने की पाबंदी से निर्माण कार्य प्रभावित होंगे और बालू के दामों में भारी बढ़ोतरी की संभावना है.

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Nawada News (प्रेम कुमार): नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेश के आलोक में आगामी 15 जून से मेसकौर और सीतामढ़ी थाना क्षेत्र के अंतर्गत संचालित बालू घाटों पर तिलैया व ढाढ़र नदी से बालू के उठाव पर पूर्ण रूप से रोक लग जाएगी. यह पाबंदी आगामी 15 अक्टूबर तक जारी रहेगी. इस निर्णय के कारण चार महीने तक क्षेत्र में निर्माण कार्य प्रभावित होने की आशंका है, जिससे काम की तलाश में स्थानीय मजदूरों को दूसरे राज्यों में पलायन करने के लिए विवश होना पड़ सकता है. बालू घाटों के संचालन से कई गरीब परिवारों को रोजगार मिला हुआ था, जिससे उनके परिवार का भरण-पोषण हो रहा था. अब चार महीने तक काम बंद हो जाने से इन मजदूरों के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा.

मौसम विभाग ने बिहार में 14 जून से मानसून के प्रवेश करने की संभावना जताई है. मानसून की दस्तक और सरकारी आदेश की सूचना मिलते ही बालू घाट संचालक पूरी तरह से सतर्क और सक्रिय हो गए हैं. घाट संचालकों के बीच मानसून से पूर्व ही भारी मात्रा में बालू का सुरक्षित स्टॉक करने की होड़ मची हुई है. सरकार के इस आदेश के बाद बालू को डंप करने के लिए घाट संचालक दिन-रात एक कर पूरी ताकत से जुटे हुए हैं.

300 मीटर के दायरे में ही डंपिंग की इजाजत, SH-103 पर बढ़ी सरगर्मी

सरकार और विभाग द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार, सभी बालू घाट संचालक अपने स्वीकृत घाट से केवल 300 मीटर के दायरे में ही बालू का स्टॉक कर सकते हैं. इस नियम के तहत सीतामढ़ी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले स्टेट हाईवे 103 (SH-103) पर मंजहवे से लेकर कटघरा तक बालू घाट संचालकों में स्टॉक करने की बड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल रही है. तड़के सुबह से लेकर देर रात तक पोकलेन और डंपर के जरिए बालू स्टॉक का कार्य किया जा रहा है.

गौरतलब है कि मेसकौर प्रखंड के प्रशासनिक दायरे में एक भी आधिकारिक बालू घाट नहीं है, लेकिन इसी प्रखंड की भौगोलिक सीमा से होकर तिलैया एवं ढाढ़र नदी गुजरती है. यही वजह है कि वर्तमान समय में एसएच-103 पर तीन अलग-अलग जगहों पर संचालक बालू को डंप करने के लिए लगातार मेहनत कर रहे हैं.

बरसात में आसमान छुएंगे बालू के दाम, आम जनता की जेब पर पड़ेगा असर

आगामी बरसात के मौसम में तिलैया और ढाढ़र नदी के जलस्तर में भारी उफान आ जाता है, जिसके कारण पानी के भीतर से बालू की निकासी करना बेहद जोखिम भरा और नामुमकिन कार्य होता है. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह सख्त आदेश पारित किया है कि 15 जून के बाद नदियों से सीधे खनन नहीं होगा. इसके बाद केवल स्टॉक की गई बालू की मात्रा ही बेची और खरीदी जा सकेगी.

इस व्यवस्था का दूसरा पहलू यह भी है कि बालू का स्टॉक करने के बाद घाट संचालक लोडिंग और ढुलाई के नाम पर मनमाना किराया वसूलते हैं. इसके कारण बाजार में बालू की कृत्रिम किल्लत होती है और कीमतें काफी ज्यादा बढ़ जाती हैं. नतीजा यह होता है कि अपना आशियाना (घर) बनाने वाले आम मध्यमवर्गीय लोगों को बेहद महंगे दामों पर बालू की खरीदारी करने के लिए मजबूर होना पड़ता है.

300 मीटर से बाहर स्टॉक करने वाले संचालकों पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई: खनन पदाधिकारी

इस पूरे मामले पर जानकारी देते हुए जिला खनन पदाधिकारी अमन कुमार ने बताया कि 15 जून से एनजीटी के निर्देशानुसार तिलैया एवं ढाढ़र नदी से बालू के व्यावसायिक उठाव पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी, जो 15 अक्टूबर तक प्रभावी रहेगी. नियमों के मुताबिक, सभी वैध घाट संचालकों को अपने निर्धारित घाट से अधिकतम तीन सौ मीटर की परिधि के भीतर ही बालू को इकट्ठा करना होगा. यदि कोई भी संचालक तीन सौ मीटर के दायरे से बाहर बालू डंप करते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ सुसंगत धाराओं के तहत कड़ी कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. अधिकारी ने स्पष्ट किया कि घाट संचालक अपनी क्षमता के अनुसार जितना चाहें उतना बालू स्टॉक कर सकते हैं, विभाग की ओर से बालू की मात्रा (क्वांटिटी) को लेकर कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई है.

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