नवादा का गोवर्धन मंदिर: दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना, जहां शाम ढलते ही रोशनी में नहा उठता है पूरा परिसर

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नवादा का गोवर्धन मंदिर: दक्षिण भारतीय स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना, जहां शाम ढलते ही रोशनी में नहा उठता है पूरा परिसर

गोवर्द्धन मंदिर.

नवादा जिले में स्थित गोवर्धन मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यह वास्तुकला का एक शानदार नमूना भी है.

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Nawada News : नवादा. (रिपोर्ट: मनोज मिश्रा) नवादा जिले में स्थित गोवर्धन मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यह वास्तुकला का एक शानदार नमूना भी है. मुख्य रूप से भगवान राधा-कृष्ण को समर्पित यह मंदिर अपनी बेहतरीन दक्षिण भारतीय (द्रविड़) स्थापत्य शैली के लिए पूरे क्षेत्र में अलग पहचान रखता है. इसकी भव्यता और नक्काशी इसे दक्षिण बिहार के प्रमुख धार्मिक स्थलों की सूची में लाकर खड़ा करती है.

द्रविड़ शैली का अद्भुत आकर्षण

गोवर्धन मंदिर की बनावट उन लोगों को विशेष रूप से आकर्षित करती है, जिनकी रुचि स्थापत्य कला और प्राचीन निर्माण शैलियों में है. मंदिर के गुंबद से लेकर दीवारों तक, हर जगह दक्षिण भारतीय शैली की बारीक कारीगरी देखने को मिलती है, जो इस क्षेत्र में दुर्लभ है.

महासंध्या आरती में उमड़ता है आस्था का सैलाब

मंदिर में भगवान राधा-कृष्ण की आराधना के लिए प्रतिदिन विशेष प्रबंध किए जाते हैं. दर्शनार्थियों के लिए आरती का समय और व्यवस्थाएं इस प्रकार हैं:

  • नियमित आरती: मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम को विशेष आरती का आयोजन किया जाता है.
  • महा संध्या आरती: शाम को होने वाली आरती का विशेष महत्व है, जिसमें भाग लेने के लिए शहर और आसपास के सैकड़ों श्रद्धालु यहां जुटते हैं. रात के समय जब मंदिर परिसर रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगाता है, तो इसकी वास्तुकला की खूबसूरती और भी निखर कर सामने आती है.
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प्रांजल पांडेय

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By प्रांजल पांडेय

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