नवादा: महावरा घाट पर 54 करोड़ से बन रहा 600 मीटर लंबा पुल, 2028 तक पूरी तरह बदल जाएगी गोविंदपुर-सरकंडा की तस्वीर

Published by :PRANJAL PANDEY
Published at :04 May 2026 12:04 PM (IST)
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नवादा: महावरा घाट पर 54 करोड़ से बन रहा 600 मीटर लंबा पुल, 2028 तक पूरी तरह बदल जाएगी गोविंदपुर-सरकंडा की तस्वीर

जिले के गोविंदपुर प्रखंड क्षेत्र के लिए सकरी नदी पर महावरा घाट के पास बन रहा करोड़ों रुपये का पुल किसी वरदान से कम नहीं है.

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नवादा. जिले के गोविंदपुर प्रखंड क्षेत्र के लिए सकरी नदी पर महावरा घाट के पास बन रहा करोड़ों रुपये का पुल किसी वरदान से कम नहीं है. यह बहुप्रतीक्षित पुल न केवल गोविंदपुर और सरकंडा पंचायत के बीच दशकों से चली आ रही आवागमन की समस्या को खत्म करेगा, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं के लिए एक नई ”लाइफ लाइन” साबित होगा.

54 करोड़ की लागत, 2028 तक निर्माण का लक्ष्य

इस अहम पुल निर्माण की स्वीकृति 10 फरवरी 2025 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा के दौरान महावरा घाट के निरीक्षण के बाद मिली थी. इसके बाद अक्टूबर 2025 से निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया. लगभग 54.83 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस पुल का निर्माण झारखंड (देवघर) की हरदेव कंस्ट्रक्शन कंपनी कर रही है. कंपनी के मुंशी वीरेंद्र कुमार के अनुसार, यह पुल 600 मीटर लंबा और 12 मीटर चौड़ा होगा, जिसे 21 पिलरों पर खड़ा किया जाएगा. पुल के दोनों ओर 5.5 मीटर (18 फीट) चौड़ी पक्की सड़क (संपर्क पथ) भी बनाई जाएगी. अब तक 15 फाउंडेशन, 150 पाइल और 10 क्राफ्ट का काम पूरा हो चुका है. अंतिम छोर के एक पाये में चट्टान मिलने के कारण आधुनिक मशीन से पाइलिंग की जा रही है. निर्माण एजेंसी का लक्ष्य दिसंबर 2027 या जनवरी 2028 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा कर आम जनता को सौंपना है.

नदी में प्रसव और एंबुलेंस फंसने का दर्द होगा खत्म

सकरी नदी पर पुल न होने का सबसे बड़ा खामियाजा बरसात के मौसम में ग्रामीणों को भुगतना पड़ता था. नदी के उस पार बसे गांवों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट जाता था. लोगों को या तो जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती थी, या फिर झारखंड की सीमा से होकर 30 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी. पुल न होने के कारण कई बार मरीजों को ले जा रही एंबुलेंस और पुलिस की गाड़ियां रेत में फंस चुकी हैं. ग्रामीणों के मुताबिक, हालात इतने बुरे रहे हैं कि एक बार सरकंडा गांव की एक महिला को अस्पताल न पहुंच पाने के कारण नदी के बीच ही प्रसव करना पड़ा था. अब पुल बनने से सरकंडा, महावरा, पिपरा, डेल्हुआ और शेखोपुर समेत कई गांवों को सीधा लाभ मिलेगा और पुलिस व प्रशासन की पहुंच भी आसान हो जाएगी.

किसानों और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार

यह पुल ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ साबित होने वाला है. सकरी नदी के पार बसे अधिकांश किसान सब्जी उत्पादन पर निर्भर हैं. बारिश के दिनों में सड़क संपर्क टूटने से उनकी सब्जियां खेतों में ही सड़ जाती थीं. पुल बनने के बाद किसानों की उपज सीधे और तेजी से गोविंदपुर बाजार तक पहुंचेगी. इसके अलावा, छोटे व्यावसायिक वाहनों के चलने से इलाके में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षा के रास्ते भी सुगम हो जाएंगे.

रिपोर्ट: जावेद नजफB

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