चर्चा में रहती है सफाई, जमीन पर नहीं

Updated at : 11 Feb 2017 9:14 AM (IST)
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चर्चा में रहती है सफाई, जमीन पर नहीं

लापरवाही. रोगी कल्याण समिति के भरोसे रोगियों का कल्याण संभव नहीं चिकित्सकों,अधिकारियों व रोगियों के बीच समन्वय बनाने के लिए है रोगी कल्याण समिति यात्री शेड का निर्माण, रात में दवा बिक्री केंद्र की शुरुआत कराने में मिली सफलता नवादा नगर : रोगियों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने व सरकार की योजनाओं की निगरानी और […]

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लापरवाही. रोगी कल्याण समिति के भरोसे रोगियों का कल्याण संभव नहीं
चिकित्सकों,अधिकारियों व रोगियों के बीच समन्वय बनाने के लिए है रोगी कल्याण समिति
यात्री शेड का निर्माण, रात में दवा बिक्री केंद्र की शुरुआत कराने में मिली सफलता
नवादा नगर : रोगियों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने व सरकार की योजनाओं की निगरानी और निरीक्षण करने के लिए रोगी कल्याण समिति का गठन किया गया है. राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत रोगी कल्याण समिति का गठन जिला में किया गया है.
केंद्र व राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य विभाग में खर्च किये जानेवाले रुपये व योजनाओं के बारे में जानकारी लेने के साथ ही उसकी मॉनीटरिंग करने का काम रोगी कल्याण समिति करती है. जिले में गठित 12 सदस्यीय समिति द्वारा पारित योजनाएं धरातल पर नहीं दिख रही हैं. तीन वर्षों के लिए बननेवाली इस समिति की नियमित बैठक प्रत्येक तीन माह में की जानी है. इसमें अस्पताल की साफ-सफाई, दवाओं की उपलब्धता, गरीब मरीजों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने आदि पर चर्चा की जाती है.
जिला स्तर पर सिविल सर्जन की अध्यक्षता में बननेवाली इस समिति में लिये गये निर्णय पर पूरी तरह अमल नहीं हो पा रहा है. रोगी कल्याण समिति की बैठकों में अस्पताल की साफ-सफाई को बेहतर करने से संबंधित निर्णय कई बार लिये गये, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है. शौचालय में ताला लगा होने की बात बैठक में उठाया गया था, बावजूद अब भी कुछ आम शौचालय में ताला लगा है. बैठक में डॉक्टरों की उपस्थिति पर भी कई बार सवाल उठे हैं. ओपीडी में एक साथ दो से तीन डॉक्टरों की ड्यूटी होती है, लेकिन एक से अधिक डॉक्टर शायद ही अस्पताल परिसर में दिखते हैं.
रोगियों के हितों के इन फैसलों को पूरा करा पाने में रोगी कल्याण समिति पिछड़ती दिखती है.समिति में सीएस होते अध्यक्ष जिला स्तर पर रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष सिविल सर्जन होते हैं. सचिव के रूप में उपाधीक्षक काम करते हैं. इसके अलावे एक सीनियर डॉक्टर, एक आर्युवेदिक डॉक्टर, नगर निकाय के चेयरमैन, जिला पर्षद से नामित दो सदस्य, समाज के विभिन्न वर्ग से दो पुरुष व दो महिला सदस्य व एक एनजीओ के प्रतिनिधि इस समिति में शामिल होते हैं.12 सदस्यों वाले कल्याण समिति का मुख्य कार्य रोगियों को हर संभव सहायता देना है.
किये गये महत्वपूर्ण काम
रोगी कल्याण समिति द्वारा सदर अस्पताल परिसर में रोटरी क्लब से मदद लेकर रोगियों के परिजनों की सुविधा के लिए शेड का निर्माण कराया गया. रात में दवा दुकान की शुरुआत करवाने, ब्लड बैंक को सुदृढ़ करने, महिला वार्ड में अत्याधुनिक सुविधाएं व उपकरणों से लैस ऑपरेशन थियेटर का निर्माण आदि कराने में कल्याण समिति की भूमिका अहम रही है.
गड़बड़ी रोकने में अक्षम स्वास्थ्य विभाग में अब अधिकतर काम आउट सोर्सिंग के माध्यम से किये जा रहे हैं. अस्पताल की साफ-सफाई, आवश्यक जांच, रोगियों के भोजन सहित अधिकतर काम को आउट सोर्सिंग के माध्यम से कराया जा रहा है. संस्थान में तय मानक के अनुरूप काम नहीं होने के बाद भी इस गड़बड़ी को रोक पाने में रोगी कल्याण समिति पूरी तरह से अक्षम दिखती है. बैठक में इस संबंध में बातें होती हैं, लेकिन धरातल पर यह साकार होता नहीं दिखता है.
दवाओं की खरीद नहीं होने से परेशानी
अस्पताल में आनेवाले रोगियों को इलाज की बेहतर सुविधा के साथ मिलनेवाली सुविधाओं का लाभ मिले, इसके लिए आवश्यक दिशा निर्देश कई बार होनेवाले रोगी कल्याण समिति की बैठक में दिया गया है, लेकिन हालात में कुछ विशेष सुधार नहीं दिख रहा है. अस्पताल में दवा की आपूर्ति में कमी को दूर करने के लिए जिला स्तर पर समिति द्वारा कुछ जरूरी दवाओं को खरीदने का निर्णय लिया गया है.
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