रोह की दो लाख की आबादी त्रस्त, जनप्रतिनिधि मस्त

Updated at : 24 Jan 2017 8:55 AM (IST)
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रोह की दो लाख की आबादी त्रस्त, जनप्रतिनिधि मस्त

रोह : रोह का अनुमंडल, निबंधन व ट्रेजरी कार्यालय रजौली में रहने से आम जनता को काफी परेशानी हो रही है. प्रखंड के करीब मानव शृंखला को सफल लाख आबादी मुसीबतों का सामना कर रही है. परंतु, जनता का वोट लेकर राज्य व देश की सर्वोच्च पंचायत में बैठे जनप्रतिनिधियों की कानू पर जूं तक […]

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रोह : रोह का अनुमंडल, निबंधन व ट्रेजरी कार्यालय रजौली में रहने से आम जनता को काफी परेशानी हो रही है. प्रखंड के करीब मानव शृंखला को सफल लाख आबादी मुसीबतों का सामना कर रही है.
परंतु, जनता का वोट लेकर राज्य व देश की सर्वोच्च पंचायत में बैठे जनप्रतिनिधियों की कानू पर जूं तक नहीं रेंग सकी है. नतीजा,आम जनता 18 साल से मुश्किलों का सामना कर रही है. प्रशासनिक कामकाज के निष्पादन में सरकारी कर्मचारियों को भी फजीहत झेलनी पड़ रही है. पूर्व डीएम दिवेश सेहरा ने जनता के इस दर्द व प्रशासनिक कामकाज में आ रही दिक्कतों को समझा था. उन्होंने मुख्य सचिव को पत्र लिख कर रोह प्रखंड को नवादा अनुमंडल में शामिल करने की अनुशंसा की थी. परंतु,आज तक इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है. अनुमंडल अथवा निबंधन कार्यालय से मामूली काम के लिए भी लोगों को लंबा सफर तय कर रजौली जाना पड़ रहा है. जबकि, रोह से महज 15 किमी की दूरी पर नवादा अनुमंडल कार्यालय स्थित है. फिर भी मुसीबतों से परेशान जनता को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है. इस व्यवस्था से हैरान-परेशान जनता लगातार गुहार लगा रही है. मगर,आम जनता को समस्या से निजात दिलाने के लिए जनप्रतिनिधियों ने आजतक कुछ नहीं किया. इससे परेशान जनता आगामी चुनाव में नेताओं को सबक सिखाने के मूड में है. इधर,अनुमंडल कार्यालय के कारण कोषागार भी रजौली शिफ्ट करने की योजना है. इससे रोह प्रखंड क्षेत्र में कार्यरत सरकारी सेवकों को वेतन लेने में परेशानी होगी.
भौगोलिक दृष्टिकोण से गलत
लोगों के अनुसार, भौगोलिक दृष्टिकोण से रोह का अनुमंडल व रजिस्ट्री कार्यालय रजौली में रहना सरासर गलत है. रोह व रजौली के भौगोलिक स्थिति पर नजर डाली जाये तो रजौली पहुंचने का एकमात्र रास्ता नवादा होकर ही है. रोह से रजौली की दूरी 45 किमी है. जबकि,नवादा की दूरी मात्र 15 किमी है. रजौली जाने और वापस लौटने में लोगों का दिनभर का समय बीत जाता है. कीमती समय के साथ एक सौ रुपये किराया खर्च होता है सो अलग. अनुमंडल कार्यालय नवादा रहने से कम खर्च व कम समय में लोग कई कार्यों को निबटा सकेंगे.
विद्यार्थियों को हो रही परेशानी
इस परिस्थिति में सबसे अधिक परेशानी विद्यार्थियों को हो रही है, जिन्हें अनुमंडल के एसडीओ से जाति, निवास अथवा ओबीसी बनवाने के लिए रजौली जाना पड़ रहा है. चूंकि,नौकरी के लिए आवेदन करते वक्त कम से कम एसडीओ द्वारा निर्गत प्रमाणपत्र संलग्न करना होता है. ऐसे हालात में बेरोजगार युवकों को अनुमंडल कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है. इसके अलावा प्रथम श्रेणी दंडाधिकारी के समक्ष शपथ पत्र बनवाने के लिए भी लोगों को रजौली जाना पड़ता है. इसके कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
लोगों की परेशानी बढ़ी रोह का अनुमंडल कार्यालय रजौली रहने के कारण करीब दो साल पहले रजिस्ट्री कार्यालय भी रजौली शिफ्ट कर दिया गया. इसके बाद प्रखंडवासियों की समस्या और अधिक बढ़ गयी है. जमीन की खरीद व बिक्री से संबंधित काम के लिए लोगों को रजौली जाना पड़ रहा है. आवागमन की समस्या के कारण जमीन की खरीद अथवा बिक्री करने वाले प्राय: रिजर्व गाड़ी से रजौली जाते हैं. पहले नवादा में रजिस्ट्री कार्यालय रहने से लोगों को काफी सहूलियत होती थी. कम खर्च में लोग अपना काम निबटा लेते थे. परंतु, रजौली में रजिस्ट्री कार्यालय बना देने से लोगों की जेब पर अतिरिक्त भार बढ़ गया है. इसके साथ कीमती समय भी बरबाद हो रहा है. नवादा के रजिस्ट्री कार्यालय में इस क्षेत्र के जमीन की रजिस्ट्री करने में कुछ अधिक रुपये देना पड़ता है.
सबक सिखाने के मूड में लोग
गौरतलब है कि रोह को नवादा अनुमंडल में शामिल करने की मांग पिछले 18 साल से की जा रही है. कई जनप्रतिनिधियों ने भी जनता की दुखती रग को सहलाते हुए रोह को नवादा अनुमंडल में शामिल कराने का वादा किया. परंतु, जनता से किया गया वादा आज तक अधूरा है. लिहाजा,आम जनता परेशानियों की पाट में पीस रही है. जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से नाराज जनता चुनाव में नेताओं को सबक सिखाने के मूड में हैं.
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