गया की बेटी ने की पहल तो पीएम ने खोली झोली

Updated at : 16 Jan 2017 5:31 AM (IST)
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गया की बेटी ने की पहल तो पीएम ने खोली झोली

हिसुआ/नरहट : बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की जन्मस्थली होने के कारण खनवां गांव की अपनी एक अलग पहचान है. लेकिन, नये साल के प्रारंभ होते ही अचानक खनवां गांव एक बार फिर चर्चा में आ गया. नवादा जिले के लोगों को यह समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर अचानक ऐसा क्या […]

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हिसुआ/नरहट : बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की जन्मस्थली होने के कारण खनवां गांव की अपनी एक अलग पहचान है. लेकिन, नये साल के प्रारंभ होते ही अचानक खनवां गांव एक बार फिर चर्चा में आ गया. नवादा जिले के लोगों को यह समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ, जिससे खनवां गांव का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जुबान पर आ गया. पीएम की पहल पर ही खनवां गांव में ग्राम्य उद्योग और उद्यम नवाचार प्रवर्तन योजना के

अंतर्गत भारतीय माइक्रो क्रेडिट द्वारा प्रवर्तित भारतीय हरित खादी ग्रामोदय संस्थान के द्वारा सोलर चरखा प्रशिक्षण सह उत्पादन केंद्र खनवां गांव स्थापित किया गया है. लेकिन, यह सब कैसे संभव हुआ, यह किसी ने जानने की कोशिश नहीं की. यह सब गया जिले के वजीरगंज थाने के दखिनगांव के रहनेवाले शिक्षक रामवृक्ष सिंह की बेटी साधना देवी की दृढ़इच्छा शक्ति का नतीजा है. करीब 22 वर्ष पहले साधना देवी की विवाह खनवां गांव के रहनेवाले राधेकृष्ण सिंह की बेटे अरविंद सिंह के साथ हुई. उनके सास-ससुर किसान थे. साथ ही उनके पति पांच भाई थे.

बेटी की पढ़ाई व शादी के खर्च को लेकर चिंतित रहती थी साधना एक ओर बड़ा परिवार और दूसरी ओर घर की आर्थिक दुर्दशा. इसको लेकर साधना काफी चिंतित रहती थी. इसी बीच साधना को मां बनने का मौका मिला. उनकी गोद में एक बेटी सोनाली आयी. समय व अपनी आर्थिक स्थिति के साथ साधना ने भी समझौता कर लिया. उसने एक ही बेटी रखने का फैसला लिया. लेकिन, बेटी बड़ा होने लगी तो साधना को बेटी की पढ़ाई व शादी-विवाह के खर्च को लेकर दु:खी रहने लगी. इसी बीच 2016 में नवादा के सांसद व केंद्रीय राज्यमंत्री गिरिराज सिंह का दौरा खनवां गांव में हुआ.
साधना ने अपने साथ कई महिलाओं को जुटा कर मंत्री से रोजगार से साधन उपलब्ध कराने की बात कही. तो मंत्री ने भी उसे गंभीरता से लिया और उन्हें लघु उद्योग के जरिये सूत काटने के व्यवसाय से जोड़ दिया. इस कामकाज से जुड़ जाने के बाद साधना को थोड़ी आमदनी होने लगी तो वह और मन लगा कर सूत काटने के कामकाज करने लगी. उस समय खनवां स्थित बिस्कोमान भवन में चरखा चलाया जाता था. उसी समय कुछ लोग वहां आये और चरखा से सूत काटनेवाली महिलाओं को कहा कि अब इस बिल्डिंग में चावल-गेहूं रखा जायेगा. इस कारण अब यहां सूत काटने का कामकाज नहीं होगा.
मायूस होकर साधना घर ले आयीं चरखा
इससे मायूस होकर साधना चरखा को लेकर अपने घर आ गयी. साधना ने बताया कि घर आकर सूत काट तो उसका सूत 200 रुपये किलो खरीद गया. लेकिन, उन्हें एहसास हुआ कि 200 रुपये में क्या होगा? इससे तो मजदूरी भी नहीं निकलेगी. तब वह अपने पति के साथ नरहट बाजार गयी और वहां इंटरनेट में जरिये सीधे प्रधानमंत्री को संदेश भेजा कि उनके सूत के दाम को 200 से बढ़ाकर 500 रुपये कर दे. ताकि, उससे अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकेंगी. साधना ने बताया कि इसे ईश्वर की देन कहें या संयोग, प्रधानमंत्री ने उनके संदेश को पढ़ा और उनके द्वारा प्रसारित होनेवाली मन की बात में उन्होंने उनकी भावना का जिक्र किया. जिस दिन मन की बात में प्रधानमंत्री ने जिक्र किया था, उसी दिन वह समझ गयी थी कि अब खनवां गांव में चरखा लघु उद्योग का और विकास होगा. और हुआ भी ऐसा.
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