लोगों को सस्ता व बेहतर सवारी का मिला विकल्प

Updated at : 31 Dec 2016 8:32 AM (IST)
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लोगों को सस्ता व बेहतर सवारी का मिला विकल्प

नवादा नगर : जिला मुख्यालय की सड़कें वर्ष 2016 में नये बदलाव के साथ एक अलग स्वरूप में दिखने लगी है. हाथ रिक्शा के स्थान पर बड़ी तेजी से इ रिक्शा ने सड़कों पर अपना स्थान बना लिया. शुरुआती दिनों में एक-दो इ रिक्शा आने के बाद धीरे-धीरे यह गाड़ी स्थानीय लोगों की जरूरत में […]

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नवादा नगर : जिला मुख्यालय की सड़कें वर्ष 2016 में नये बदलाव के साथ एक अलग स्वरूप में दिखने लगी है. हाथ रिक्शा के स्थान पर बड़ी तेजी से इ रिक्शा ने सड़कों पर अपना स्थान बना लिया.
शुरुआती दिनों में एक-दो इ रिक्शा आने के बाद धीरे-धीरे यह गाड़ी स्थानीय लोगों की जरूरत में शामिल हो गयी हैं. कम चौड़ी सड़कों व गलियों में भी अपनी पहुंच बना लेने की बजह से शहरवासियों के लिए यह गाड़ी रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल हो गयी हैं. शहर में बढ़ते दायरे को समेटने में हाथ रिक्शा उतना कामयाब नहीं हो पाता था, इसके कारण खास कर महिलाओं या बुजुर्गों को परिजनों पर निर्भर रह कर काम करना पड़ता था, लेकिन आम लोगों के लिए इ रिक्शा की उपलब्धता ने लोगों के लिए सहूलियत बढ़ाया है.
तेज होने का मिला लाभ बाजार में लगातार बढ़ते इ रिक्शा की संख्या यह बतलाता है कि यदि लोगों के हित में काम होती है तो बदलाव को आम लोग बड़े आसानी से अपनाते हैं. शहर में एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए हाथ रिक्शा का ही सहारा था, अधिक किराया देने के साथ दो से तीन सवारी मुश्किल से एक साथ बैठ पाते थे.
इ रिक्शा ने कम भाड़ा के साथ ही पूरे परिवार को एक ही गाड़ी में सवारी करने की सुविधा देने के साथ तेज गति से भी गंतव्य तक पहुंचने में सहायक बना है. हालांकि, अब भी बड़ी संख्या में हाथ रिक्शा चल रहा है, जो गली मुहल्लों तक लोगों को पहुंचा रहे हैं.
बाजार आने में हो रही सुविधा नगर के पार नवादा, सद्भावना चौक, पुलिस लाइन, आइटीआइ रोड, गोणावां, तीन नंबर बस स्टैंड, भगत सिंह चौक, प्रखंड कार्यालय आदि ऐसे स्थान हैं, जहां से प्रजातंत्र चौक या बाजार के अन्य हिस्सों में आने के लिए अधिक भाड़ा देना पड़ता था. हाथ रिक्शा से यह दूरी तय करने में समय भी अधिक लगता था, लेकिन अब इ रिक्शा के कारण इन स्थानों तक आने जाने में सुविधा बढ़ी है. इ रिक्शा की संख्या बढ़ने से भाड़ा भी घटा है.
बढ़ी परेशानी भी इ रिक्शा के बढ़ने से पहले से जमे जमाये हाथ रिक्शा चलानेवालों के सामने रोजी-रोटी की समस्या बनी है. पहले से रिक्शा चलाने वाले कुछ लोगों ने तो इ रिक्शा खरीद लिया है, वहीं अधिकतर अपनी आमदनी का साधन खोकर रोटी के नये विकल्प तलाशने को विवश हुए हैं.
इधर, इ रिक्शा की संख्या में वृद्धि होने के साथ ही कई प्रकार से लोगों का दोहन शोषण भी शुरू हो गया है. इ रिक्शा चालकों ने नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि पुलिस की मिली भगत व रंगदारी के कारण शहर के भगत सिंह चौक व तीन नंबर बस स्टैंड के पास इ रिक्शा ले जाने पर 20-20 रुपये की रंगदारी वसूली शुरू हो गयी है. इसके अलावे संघ के नाम पर प्रतिदिन 10 रुपये का रसीद काटे जाना शुरू हुआ है. इस प्रकार नजायज तरीके से रुपये कमाने के लिए लोगों का बड़ा तंत्र भी खड़ा हो गया है.
इ रिक्शा आ जाने से लोगों को बहुत लाभ मिला है. पहले घर से आने में कम से कम 30 रुपये खर्च करने पड़ते थे. अब केवल 10 रुपये में हो जाता है. समय भी कम लगता है. इ रिक्शा से लोगों को काफी सहूलियत है़
ज्योति प्रसाद वर्मा, अांबेडकर नगर
महिलाओं के लिए मार्केटिंग करना बिल्कुल आसान हो गया है. पहले बाजार जाने के लिए घर के जेंटस पर निर्भर रहना पड़ता था. अब आसानी से इ रिक्शा से अकेले मार्केटिंग के लिए आ जाते हैं.
पूजा कुमारी, गोणावां
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