रैक प्वाइंट पर न पानी, न ही बिजली की सुविधा

Updated at : 22 Nov 2016 4:59 AM (IST)
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रैक प्वाइंट पर न पानी, न ही बिजली की सुविधा

हर साल मिलता है लाखों रुपये का राजस्व रेलवे को प्रतिमाह 10 से 15 लाख रुपये का होता है शुद्ध मुनाफा वारिसलीगंज : रेलवे को प्रतिमाह लाखों रुपये का राजस्व देनेवाला वारिसलीगंज रैक प्वाइंट वर्षों से असुविधा का दंश झेल रहा है. स्टेशन के दक्षिणी छोर पर स्थित रैक प्वाइंट पर खाद, सीमेंट व खाद्यान्न […]

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हर साल मिलता है लाखों रुपये का राजस्व

रेलवे को प्रतिमाह 10 से 15 लाख रुपये का होता है शुद्ध मुनाफा
वारिसलीगंज : रेलवे को प्रतिमाह लाखों रुपये का राजस्व देनेवाला वारिसलीगंज रैक प्वाइंट वर्षों से असुविधा का दंश झेल रहा है. स्टेशन के दक्षिणी छोर पर स्थित रैक प्वाइंट पर खाद, सीमेंट व खाद्यान्न आता है. पिछले 50 वर्षों से यह कार्य सुचारु रूप से चल रहा है. जानकारी के अनुसार, वारिसलीगंज रैक पर 10 ब्रांडों के सीमेंट, रासायनिक खाद व खाद्यान्न का रखरखाव किया जाता है. इससे रेलवे को 10 से 15 लाख का शुद्ध मुनाफा होता है. फिर भी इस रैक प्वाइंट पर कोई सुविधा नहीं है. तपिश भरी गरमी में,
कड़ाके की ठंड या फिर मूसलधार बारिश हो, सभी मौसम में रैक होल्डर, मजदूर व वाहन मालिक को सिर छुपाने के लिए विभाग द्वारा कोई व्यवस्था नहीं की गयी है. इनका सहारा रैक प्वाइंट के आसपास झोंपड़ीनुमा होटल ही बनता है. असुविधा का आलम यह है कि रैक प्वाइंट पर न तो पानी की व्यवस्था है और न ही रोशनी की. प्रकाश की व्यवस्था नहीं होने से शाम को ही रैक का कार्य बंद कर दिया जाता है. इसका खामियाजा रैक होल्डरों को पेनाल्टी के तौर पर भुगतना पड़ता है. रैक की व्यवस्था होने के कारण किऊल-गया रेलखंड पर सभी स्टेशनों में से वारिसलीगंज स्टेशन सबसे ज्यादा आय देनेवाला है. कुछ माह पहले दानापुर रेल मंडल के जीएम के निरीक्षण के दौरान इस कुव्यवस्था से अवगत कराया गया था. परंतु जीएम के आश्वासन के कई माह बीत जाने के बाद मौजूदा समय तक इस दिशा में कोई पहल नहीं की गयी है.
रैक प्वाइंट के लिए बनी सड़क बदहाल अवस्था में होने के कारण सीमेंट व खाद्यान्न से भरे वाहनों के आवागमन में दिक्कत होती है. यह असुविधा पिछले कई वर्षों से है. इसमें तत्काल कार्रवाई की जरूरत है.
मनीष कमलिया, ट्रक मालिक
गरमी व बरसात के दिनों में मजदूरों को रैक प्वाइंट पर यात्री शेड का निर्माण नहीं होने से मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. बिजली की व्यवस्था नहीं होने से मजदूर देर शाम तक कार्य करने में अक्षम होते है.
मिठु प्रसाद, लेवर एजेंट
रैक प्वाइंट पर बेहतर सुविधाओं के लिए कई बार रेलवे के उच्चाधिकारियों को सूचना दी गयी है. यह सच है कि रैक प्वाइंट पर बिजली, सड़क की समस्या पहले से यथावत बनी हुई है. इसके कारण वाहन मालिकों व मजदूरों को मुश्किलों के दौर से गुजरना पड़ रहा है.
वीआर दास, स्टेशन प्रबंधक
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