एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल से मरीज बेहाल

Updated at : 15 Nov 2016 8:16 AM (IST)
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एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल से मरीज बेहाल

निजी एंबुलेंस चालकों की चांदी गरीब मरीज के परिजन परेशान नवादा कार्यालय : पखवारे भर से अधिक समय से चल रहे एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल से मरीजों की मौत में इजाफा हो रहा हैं. पिछले सप्ताह भर में सड़क दुर्घटना के शिकार अधिकतर घायलों की मौत सही समय पर अस्पताल नहीं पहुंचने के कारण भी […]

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निजी एंबुलेंस चालकों की चांदी
गरीब मरीज के परिजन परेशान
नवादा कार्यालय : पखवारे भर से अधिक समय से चल रहे एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल से मरीजों की मौत में इजाफा हो रहा हैं. पिछले सप्ताह भर में सड़क दुर्घटना के शिकार अधिकतर घायलों की मौत सही समय पर अस्पताल नहीं पहुंचने के कारण भी हुई हैं. एंबुलेंसकर्मियों की अनिश्चितकालीन राज्यव्यापी हड़ताल 27 अक्तूबर से अनवरत जारी हैं. जिला मुख्यालय सहित प्रखंड स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल से मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा हैं. सरकारी 102 एंबुलेंस के अभाव में मरीज निजी एंबुलेंस का सहारा ले रहे हैं. इससे निजी चालकों द्वारा मनमानी भाड़ा वसूला जा रहा हैं.
साथ ही मरीजों को सरकारी अस्पतालों की जगह अन्यत्र निजी चिकित्सालयों में पहुंचा कर चांदी काटी जा रही हैं. हालांकि, सिविल सर्जन श्रीनाथ प्रसाद ने लंबे खींच रहे हड़ताल को देखते हुए सभी पीएचसी प्रभारी को आवश्यक दिशा निर्देश दिये हैं. इसके लिए सभी प्रखंड पीएचसी प्रभारी को विभागीय पत्र भेजे गये हैं. बावजूद महिला, गरीब, वृद्ध व नवजात शिशुओं को मिलनेवाली वाहन सुविधा मुहैया कराने में दिक्कतें आ रही हैं.
11 सूत्री मांगों के लिए राज्यव्यापी हड़ताल : राज्य सरकार के समक्ष एंबुलेंस कर्मियों द्वारा 11 सूत्री मांगों को लेकर ज्ञापन दिया गया. इसकी पूर्ति नहीं होने पर राज्य भर के एंबुलेंसकर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गये. इसमें जिले के 22 एंबुलेंस चलानेवाले लगभग 75 कर्मचारी भी शामिल हैं. 11 सूत्री मांग पत्र में मुख्य रूप से कर्मचारियों की नियुक्ति मानदेय या संविदा के आधार पर किये जाने की वकालत हैं. राज्य के सारे जिलों में एक समान एंबुलेंस परिचालन, खराब व अन्य कारणों से बंद पड़े एंबुलेंस का तत्काल संचालन सुनिश्चित कराने की मांग रखी गयी हैं. 102 एंबुलेंस कर्मचारियों की दुर्घटना में मौत हो जाने पर 10 लाख रुपये व दिव्यांगता की स्थिति में पांच लाख रुपये का मुआवजा सहित पहले के कर्मचारियों को दुबारा काम पर लगाये जाने को लेकर लोग हड़ताल पर हैं.
मिलनेवाली आम सुविधाओं का है टोटा: सरकार द्वारा चलाये गये 102 एंबुलेंस से कुछ खास मरीजों को निःशुल्क सुविधाएं दी जाती हैं. इनमें गर्भवती महिलाओं को अस्पताल से घर तक निःशुल्क लाना ले जाना, नवजात शिशुओं को मुफ्त चिकित्सकीय सुविधा दिलाना, दुर्घटना में घायल मरीजों को सरकारी अस्पताल व पीएचसी पहुंचाना, बूढ़े बुजुर्गों को उनके नजदीकी अस्पताल तक घर से लाना व ले जाना जैसी आम सुविधाएं मुहैया करायी जाती हैं.
लेकिन चल रहे हड़ताल के कारण शिशु, महिलाएं, बुजुर्ग व घायल सुविधा से वंचित हैं. दुर्घटनाग्रस्त घायलों को अस्पताल लाने में हो रही देर के कारण मौत हो जा रही हैं. पांच नवंबर को नारदीगंज प्रखंड के राजापुर गांव के नजदीक अकौना पुल के पास दुर्घटना में शिकार बाइक सवार को अस्पताल लाने में एंबुलेंस की कमी के कारण मौत हो गयी थी. गंभीर रूप से घायल सूर्यगढ़ा निवासी मोहम्मद मुमताज को सदर अस्पताल से पटना ले जाने में एंबुलेंस की कमी से काफी दिक्कत का सामना करना पड़ा था.
मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गयी है. सभी पीएचसी प्रभारियों को निर्देश दिया गया है कि लोकल रेट पर चालकों को रखकर एंबुलेंस चलवाने की व्यवस्था करें. दैनिक रेजगारी पर निजी चालकों को रखकर भी एंबुलेंस चलाने का काम लिया जा रहा हैं. भाड़े का एंबुलेंस लेकर मरीजों को सुविधा देने का आदेश दिया गया.
डॉ श्रीनाथ प्रसाद, सिविल सर्जन
राज्य सरकार का जारी सरकारी पत्र सभी पीएचसी प्रभारियों को भेज दिया गया हैं. प्रत्येक प्रखंड के पीएचसी को एक-एक छोटी गाड़ी उपलब्ध रखने का निर्देश दिया गया है. सदर अस्पताल से बड़े अस्पतालों को मरीज ले जाने के लिए 108 व एक अन्य निजी गाड़ी उपलब्ध करायी गयी हैं.
डॉ एसकेपी चक्रवर्ती, प्रभारी, एंबुलेंस
11 सूत्री मांगों को लेकर एंबुलेंस कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. सरकार से बराबर अनुनय विनय करने के बाद भी हमारी मांगों को नहीं माना गया हैं. हमारी मांगों को लेकर स्वास्थ्य विभाग उदासीन बना हुआ है. इसी उदासीनता को लेकर कर्मचारी हड़ताल पर हैं. मांगों को पूरा नहीं किये जाने तक हड़ताल जारी रहेगा.
रामवृक्ष सिंह, जिलाध्यक्ष, एंबुलेंस कर्मचारी संघ
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