बुजुर्ग हैं संस्कारों के पुरोधा और संस्कृति के वाहक

Updated at : 02 Oct 2016 6:17 AM (IST)
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बुजुर्ग हैं संस्कारों के पुरोधा और संस्कृति के वाहक

अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस. बेगूसराय सांसद डॉ भोला सिंह ने कहा वरीय नागरिक संघ के तत्वावधान में मना वार्षिकोत्सव वृद्धजनों को किया गया सम्मानित नवादा कार्यालय : बुजुर्ग हमारे संस्कारों के पुरोधा व संस्कृति के वाहक हैं. समाज का दिशा निर्देशन राजनीति नहीं करती है. बल्कि हमारे वृद्धजन करते हैं. समाज के निर्माण व विकास में […]

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अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस. बेगूसराय सांसद डॉ भोला सिंह ने कहा

वरीय नागरिक संघ के तत्वावधान में मना वार्षिकोत्सव
वृद्धजनों को किया गया सम्मानित
नवादा कार्यालय : बुजुर्ग हमारे संस्कारों के पुरोधा व संस्कृति के वाहक हैं. समाज का दिशा निर्देशन राजनीति नहीं करती है. बल्कि हमारे वृद्धजन करते हैं. समाज के निर्माण व विकास में उनकी अहम भूमिका होती हैं. बुजुर्ग हमारी भारतीय संस्कृति की विरासत हैं,लेकिन पश्चिमीकरण की चकाचौंध में हमारे ही घरों में अकेले व उपेक्षित हैं. उनका सम्मान होना चाहिए. उनसे मार्गदर्शन लेकर ही हम प्रगति के पथ पर अग्रसर हो सकते हैं.
इन बातों के माध्यम से नवादा के पूर्व सांसद सह बेगूसराय सांसद डॉ भोला सिंह ने अंतरराष्ट्रीय वृद्ध दिवस के अवसर पर अपने उद्गार प्रस्तुत किये. वरीय नागरिक संघ के तत्वावधान में नगर भवन में शनिवार को वृद्ध दिवस का16वां वार्षिकोत्सव का आयोजन किया गया. महोत्सव का उद्घाटन डॉ भोला सिंह, डॉ एसएन शर्मा, डॉ पूनम शर्मा, केदार सिंह, रामरतन सिंह रत्नाकर, डॉ मिथिलेश ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. आयोजन के मुख्य अतिथि रहे डॉ सिंह ने कहा कि मां मीठे जल की कुआं है. वहीं खुरदरे हाथों व परेशानी पर झुर्रियां लिए पिता हमारा सर्जक व नियंत्रक है. मां के चुंबन के समक्ष हजारों स्वर्ग व्यर्थ हैं.
मातृत्व का सुख पाने ईश्वर भी धरा पर अवतरित होते हैं. पिता की अनुशासित व पाबंद नियंत्रण ही एक बेहतर समाज का निर्माण करता है. इनके योगदान के बिना समाज का विकास संभव नहीं है. माता-पिता अपने संतानों के लिए कई व्रत रखते हैं. मंदिरों में मनौतियां मांगते हैं. वृद्धावस्था में उनकी सेवा व पालन संतानों का भी कर्तव्य होना चाहिए.
ऐसे अवसर पर लोकनायक जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति की धरा नवादा में आयोजित यह वृद्ध महोत्सव आनेवाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा का काम करेगा. मंच की अध्यक्षता कर रहे संघ के अध्यक्ष डॉ श्रीनंदन शर्मा ने उपस्थित बुजुर्गों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वृद्ध संस्कृति के संरक्षक व वाहक हैं. नवादा के गौरवशाली अतीत के निर्माता हैं. आनेवाली पीढ़ियों के सुनहरे भविष्य को गढ़नेवाले मूर्तिकार हैं. उन्होंने सांसद निधि से बने वृद्धाश्रम की दयनीय स्थिति पर चिंता जाहिर की. बुजुर्गों से सीख लेकर वर्तमान पीढ़ी समय, शक्ति, धन व ईमान का सही उपयोग कर सफल हो सकती है.
प्रो मनुजी राय ने कहा कि बच्चों व युवाओं के बिगड़ने से समाज नहीं बिगड़ता, बल्कि बुजुर्गों के विषम परिस्थितियों में मौन हो जाने से समाज का विघटन हो जाता हैं. वृद्ध आदिकाल से क्रांति के अग्रदूत रहे हैं. वीर कुंवर सिंह, महात्मा गांधी, जयप्रकाश नारायण जैसे बुजुर्गों के नेतृत्व में हुए आंदोलन ने सफलता पायी है. प्रख्यात व्यंग्यकार व साहित्यकार रामरतन प्रसाद सिंह रत्नाकर ने गांवों में चौपालों के उजाड़ होने पर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि आज के तीव्र गति से भागती दुनिया में वृद्ध उपेक्षित हो रहे हैं. यह चिंता का विषय है. सनातन परंपरा में देव व पितर की सेवा ही मूल भावना हैं.
बेटी बचाओ आंदोलन की प्रखर नेत्री डॉ पूनम शर्मा ने बुजुर्गों की आंखों में उनकी संतानों द्वारा किये जा रहे उपेक्षा के भाव को इंगित करते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ियां अपने बुजुर्गों को अपनापन का भाव दें. समय देकर उनके प्रति श्रद्धा व सम्मान दें. उन्होंने वृद्धों को निःशुल्क स्वास्थ्य जांच का भी भरोसा दिलाया. महोत्सव में साहित्यकार डॉ मिथिलेश, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संचालक केदार बाबू, शक्तिपीठ संचालक कैलाश प्रसाद सिंह, वयोवृद्ध शिक्षक शालिग्राम प्रसाद निराला सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया. स्वागत गान सदर प्रखंड की कुलना पंचायत की लक्ष्मी ने प्रस्तुत किया.
वृद्धों व पत्रकारों को किया गया सम्मानित : वरीय नागरिक संघ द्वारा महोत्सव में वृद्धजनों को पुष्प व शाल देकर सम्मानित किया गया. शतायु वयोवृद्ध कपिलदेव प्रसाद सिंह, रामशरण प्रसाद, कैलाश प्रसाद सिंह, श्याम सुंदर पांडेय,सुरेश सिंह, रामाधीन सिंह सहित कुल 22 वृद्धों को सम्मान दिया गया. पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान दे रहे युवा पत्रकार विनय पांडेय व मनमोहन कृष्ण को भी सांसद डॉ भोला सिंह ने शाल देकर सम्मानित किया.
वृद्धों ने वृद्धाश्रम की दयनीय स्थिति पर जतायी चिंता
कार्यक्रम का उद्घाटन करते बेगूसराय के सांसद डॉ भोला सिंह व अन्य.
नवरात्र व मुहर्रम को लेकर किया जागरूक
डॉ भोला सिंह ने जिलेवासियों को मंच से दशहरा व मुहर्रम की शुभकामना देते हुए कहा कि नवादा की धरती सांप्रदायिक सौहार्द के लिए सदा से जानी जाती रही हैं. इस भूमि पर इस्लाम व हिंदुत्व एक संयुक्त परिवार की तरह रहते आये हैं. कभी हंसते हैं. कभी झगड़ते हैं. इससे इनके बीच प्यार व अपनापन अधिक बढ़ता हैं.
दोनों त्योहारों को लोग मिलजुलकर आपसी भाईचारे के साथ मनायेंगे. साथ ही राज्य सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि विकास के नाम पर सोने की लंका प्यारी नहीं हो सकती, जहां रावण, कुंभकरण, मेघनाद जैसे लोग रहते हैं. इससे प्यारी शांति व सौहार्द की नगरी अयोध्या ज्यादा प्यारी हैं.
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