गंदगी व दुर्गंध के बीच रह रहे डॉक्टर-मरीज

Updated at : 30 Apr 2016 7:53 AM (IST)
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गंदगी व दुर्गंध के बीच रह रहे डॉक्टर-मरीज

सदर अस्पताल में सफाई को लेकर न तो अधिकारी चिंतित हैं और न ही साफ-सफाई करनेवाले कर्मचारी. अस्पताल से निकले अवशिष्ट को जमीन के नीचे गाड़ने या शहर से दूर जलाने के बजाय भरती मरीजों के वार्ड के पीछे अवशिष्टों को स्पिरिट डाल कर जला दिया जा रहा है. इसके सड़ांध व दुर्गंध से लोगों […]

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सदर अस्पताल में सफाई को लेकर न तो अधिकारी चिंतित हैं और न ही साफ-सफाई करनेवाले कर्मचारी. अस्पताल से निकले अवशिष्ट को जमीन के नीचे गाड़ने या शहर से दूर जलाने के बजाय भरती मरीजों के वार्ड के पीछे अवशिष्टों को स्पिरिट डाल कर जला दिया जा रहा है. इसके सड़ांध व दुर्गंध से लोगों को परेशानी हो रही है़
महिला वार्ड से निकले अवशिष्ट को जला दिया जाता है वार्ड के पीछे
नवादा (सदर) : सदर अस्पताल में सफाई को लेकर न तो अधिकारी चिंतित हैं और न ही साफ-सफाई करनेवाले कर्मचारी. इसके परिणाम स्वरूप अस्पताल में यत्र-तत्र गंदगी का साम्राज्य कायम है.
अस्पताल से निकले अवशिष्ट को जमीन के नीचे गाड़ने या शहर से दूर जलाने के बजाय भरती मरीजों के वार्ड के पीछे अवशिष्टों को स्पिरिट डाल कर जला दिया जा रहा है.
पर्यावरण को प्रदूषित करनेवाले इस कार्य पर लगाम लगाने के लिए न तो अधिकारी और न ही कोई वरीय कर्मचारी पहल कर रहे हैं, जिसके फलस्वरूप महिला वार्ड के पीछे जलाये जानेवाले अवशिष्ट से स्थानीय लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. सदर अस्पताल परिसर से सटे रहनेवाले लोगों ने बताया कि महिला बच्चा वार्ड से निकले अवशिष्ट को सफाईकर्मी और स्वास्थ्यकर्मी वार्ड के पीछे फेंक देते हैं, जिससे सड़ांध व दुर्गंध निकलती है, जिससे सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है. ऐसे अवशिष्टों को सफाई कर्मियों द्वारा सप्ताह में एक दिन स्पिरिट छिड़क कर जला दिया जाता है.
झुलसा देने वाली गरमी में अवशिष्ट से निकली दुर्गंध के कारण स्थानीय लोगों को खाना-पीना भी मुश्किल हो जाता है. स्थानीय निवासी अदीब अनवर मोती ने बताया कि इस संबंध में तीन वर्ष पूर्व भी अस्पताल प्रबंधन के पास शिकायत दर्ज करायी गयी थी. इसके बाद अस्पताल परिसर के महिला वार्ड की ओर अवशिष्टों को जलाने का काम बंद कर दिया गया था. परंतु, पिछले तीन महीनों से एक बार फिर से इस प्रक्रिया को दोहरायी जा रही है.
इसके कारण आसपास के लोगों का जीना मुश्किल हो गया है. मोती ने बताया कि इस संबंध में जिला प्रशासन तथा अस्पताल प्रबंधन को अवगत कराया जा चुका है. परंतु, कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है. उठते सड़ांध के कारण बच्चों को ज्यादा परेशानी होती है. खाना खाने के बाद ही बच्चे दुर्गंध के कारण उल्टी कर देते हैं. स्थानीय निवासी बबलू कुमार कहते हैं कि कभी-कभी तो अस्पताल के सफाई कर्मियों द्वारा सफाई करने के दौरान फेंके गये गंदगी बाउंड्री पार कर दूसरे लोगों के घरों में चला जाता है, जिसकी सफाई निजी खर्चों पर डोम से कराना पड़ता है.
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