जीतने के बाद भूल जाते हैं किये वादे

Updated at : 08 Apr 2016 12:00 AM (IST)
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जीतने के बाद भूल जाते हैं किये वादे

जीतने के बाद भूल जाते हैं किये वादे धोखा. पंचायत चुनाव में प्रत्याशी जंगली क्षेत्र के लोगों को ठगने की कर रहे तैयारी हरदिया पंचायत में अब तक नहीं पहुंची सरकारी योजनाएंगांवों में जाने के लिए नहीं है सड़क गरमी में चुआं का पानी पीते हैं गांववाले विद्यालय नहीं जाते शिक्षक, नहीं होती पढ़ाई फोटो-रजौली/1कैप्शन- […]

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जीतने के बाद भूल जाते हैं किये वादे धोखा. पंचायत चुनाव में प्रत्याशी जंगली क्षेत्र के लोगों को ठगने की कर रहे तैयारी हरदिया पंचायत में अब तक नहीं पहुंची सरकारी योजनाएंगांवों में जाने के लिए नहीं है सड़क गरमी में चुआं का पानी पीते हैं गांववाले विद्यालय नहीं जाते शिक्षक, नहीं होती पढ़ाई फोटो-रजौली/1कैप्शन- इसी पगदंडी से होकर जाते हैं गांववाले़पंचायत चुनाव आते ही फिर एक बार प्रत्याशियों द्वारा जंगली क्षेत्र में रह रहे ग्रामीणों को ठगने की तैयारी शुरू हो गयी है. हर चुनाव के प्रत्याशियों द्वारा वादे किये जाते हैं. लेकिन, चुनाव समाप्त होते ही अपने किये वादे भूल जाते हैं. हरदिया पंचायत के 13 गांव आज भी जंगली क्षेत्र में हैं. इन सभी गांवों में मूलभूत सुविधा नदारद है. सड़क, पेयजल व अस्पताल नहीं है. विद्यालय है. लेकिन, शिक्षक नहीं आते हैं.प्रतिनिधि4रजौली पंचायत चुनाव आते ही फिर एक बार प्रत्याशियों द्वारा जंगली क्षेत्र में रह रहे ग्रामीणों को ठगने की तैयारी शुरू हो गयी है. हरदिया पंचायत के 13 गांव आज भी जंगली क्षेत्र में हैं. इन सभी गांवों में मूलभूत सुविधा नदारद है. सरकार की लाभकारी योजना इन ग्रामीणों तक पहुंचते-पहुंचते दम तोड़ देती है. शिक्षा तो इन ग्रामीणों के लिए वरदान कम अभिशाप ज्यादा है. सरकार द्वारा जंगली क्षेत्रों में विद्यालय भवन तो बना दिये गये. लेकिन, शिक्षक विद्यालय नहीं जाते हैं. जंगली क्षेत्र के लोग कभी विद्यालय बंद रहने की शिकायत स्थानीय प्रशासन से करते हैं तो जांच के नाम पर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं. इससे जंगली क्षेत्रों में विद्यालय का चलना हाथी के सफेद दांत जैसा है. जब ग्रामीणों से स्वास्थ्य सुविधा के बारे में पूछा गया तो ग्रामीणों ने बड़ा मार्मिक जवाब दिया. इसे सुन कर रोंगटे खड़े हो जायेंगे. ग्रामीणों ने बताया कि हमारे यहां स्वास्थ्य सुविधा पूरी तरह से नदारद है. हमलोग जंगली जड़ी-बूटी से नीम-हकीम के पास अपना इलाज करवाते हैं. इलाज सही ढंग से न होने पर ग्रामीणों की जान भी चली गयी है. पहले कुछ झोलाछाप डॉक्टर आकर इलाज करते थे पर अब वो भी आना बंद कर दिये हैं. गांवों में रह रहे ग्रामीणों ने बताया कि समस्या एक हो तब न बतायें. हमलोगों के पास सिर्फ समस्या ही समस्या है. सड़क नहीं है. इससे हमलोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. हर छोटे बड़े काम के लिए हमलोग को रजौली बाजार जाना पड़ता है. इसका साधन अगर आपके पास पैसा है तो नाव की सवारी करें नहीं तो कोसों दूर कटीली झाड़ियों के बीच से गुजर कर पैदल ही रजौली जाना पडता है. बताया कि 2014 में पीपरा निवासी जग्गु मांझी की तबीयत खराब हो गयी आने-जाने का रास्ता नहीं रहने के कारण 20 ग्रामीणों द्वारा इलाज के लिए चारपाई पर सुला कर रजौली लाया जा रहा था. इसने रास्ते में ही दमतोड दिया, जहां एक ओर लोग बल्ब को छोड़कर एलइडी जलाने लगे हैं. हरदिया पंचायत के करीब 13 गांव के लोग ढिबरी युग में जीने को मजबूर हैं. जंगली क्षेत्र के कुछ गांवों में पानी पीने के लिए चापाकल तो कुछ गांव में कुआं है. लेकिन, जंगली व पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण इन दिनों सूखा पडा है. ऐसे में ग्रामीणों के समक्ष पानी की समस्या सबसे बड़ी है. ग्रामीण बताते हैं कि गरमी के दिनों में हमलोग नदी में चुआ खोदकर पानी की व्यवस्था करते हैं. इससे गंभीर बीमारी का खतरा बना रहता है. रात को चुआ खोदकर छोड़ देते हैं. इसमें जमा पानी को कभी जंगली जानवर आकर पी जाते हैं. वही पानी हमलोगों को भी पीना पड़ता है. ग्रामीणों को प्रत्याशी हर चुनाव में झूठा सब्जबाग दिखा कर चले जाते हैं. हर बार हमलोगों को धोखा मिला है. ग्रामीणों का साफ कहना है. सरकार या स्थानीय प्रतिनिधि से हमलोगों को लाभ नहीं मिलता है. सिर्फ चुनाव में ही हमलोगों की याद आती है. अब तक जितने भी मुखिया हुए है इस पंचायत के आज तक इनकी समस्याओं को लेकिन उनके कानों तक जूं तक नहीं रेंगता.क्या कहते हैं ग्रामीण हमलोग के पास समस्या ही समस्या है. न पीने के लिए पानी न चलने के लिए रास्ता. कोई भी जनप्रतिनिधि इस ओर ध्यान नहीं देता है. चुनाव के नाम पर सब हमें ठग रहे हैं.सुनील राजवंशी हमलोग जंगली है. हमलोग पर किसी भी मुखिया का ध्यान नहीं है. हमलोग पानी के लिए तरसते हैं. पीने के पानी का बहुत किल्लत है. कोई इसे दूर कर दे तो वह बड़ा नेता होगा. वह हमारा सही प्रतिनिधि होगा. कैलु मांझी हमलोग के साथ हर बार जीता हुआ प्रत्याशी सौतेला व्यवहार करता है. कई बार मुखियाजी के पास चापाकल के लिए गये. लेकिन, कोई ध्यान नहीं दिया. प्रमोद राजवंशी हरदिया पंचायत के कुल 13 गांव-मरमो, सुअरलेटी, कुम्भीयातरी, भानेखाप, सिरकिया, सपहा, परतौनिया, पीपरा, चोरडीहा, नावाडीह, झराही, डेल्बा, जमुनदाहा कुल आबादी®20 हजार कुल वोटर®8300महिला वोटर®3500पुरुष वोटर®4800वार्ड®18बूथ®18प्रत्याशियों की संख्यामुखिया®18सरपंच®6पंचायत समिति®11

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