काम पर ब्रेक, बेरोजगारी बढ़ी
Updated at : 18 Feb 2016 12:51 AM (IST)
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जिले में घाटों से बालू के उत्खनन पर रोक लगने से निर्माण कार्य हुए बंद नवादा (सदर) : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के तहत पर्यावरण प्रदूषण अनापत्ति प्रमाण-पत्र को लेकर 10 फरवरी से पूरे प्रदेश के साथ-साथ नवादा जिले में भी बालू के उत्खनन पर रोक लग गया है. विगत एक सप्ताह से बालू उत्खनन पर […]
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जिले में घाटों से बालू के उत्खनन पर रोक लगने से निर्माण कार्य हुए बंद
नवादा (सदर) : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के तहत पर्यावरण प्रदूषण अनापत्ति प्रमाण-पत्र को लेकर 10 फरवरी से पूरे प्रदेश के साथ-साथ नवादा जिले में भी बालू के उत्खनन पर रोक लग गया है. विगत एक सप्ताह से बालू उत्खनन पर रोक लगने के कारण जिले भर में विकास का कार्य ठप हो गया है.
प्राइवेट भवन निर्माण के साथ-साथ सरकारी भवनों के निर्माण व नली-गली की ढलाई का काम भी ठप पड़ गया है. बालू के अभाव में एक इंच भी ईंट का जुड़ाव नहीं हो पा रहा है. काम के अभाव में रोज कमाने खानेवाले मजदूर बेरोजगार हो गये हैं. ऐसे में बिहार से पलायन करने के सिवाय कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है. भवन निर्माण सहित अन्य कार्य पूरी तरह ठप हो गये हैं. भवन निर्माण से जुड़े एजेंसियों को पिछले एक सप्ताह में कार्य ठप होने के बाद लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है. आदर्श होम डेवलपर्स, प्राइवेट भवन, स्कूल भवन निर्माण, इंदिरा आवास निर्माण, सड़क की पीसीसी ढ़लाइ, मकानों में प्लास्टर जैसे अनेक कार्य पूर्णत: बंद हैं.
ठेकेदारों को हो रहा नुकसान
सरकारी ठेका के तहत भवन निर्माण व सड़क की पीसीसी ढ़लाई जैसे कार्य करनेवाले ठेकेदारों को प्रतिदिन लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है. मजदूरों के पलायन के बाद कार्यों के निष्पादन के लिए झारखंड व अन्य राज्यों से बुलाये गये मजदूर व मिस्त्री को बैठा कर उनको मेहनाता देना पड़ रहा है.
ठेकेदारी कार्य से जुड़े राजीव कुमार, संतोष कुमार सिन्हा, मनीष कुमार, राजेश कुमार मुरारी जैसे कई ठेकेदारों ने कहा कि सरकार से निविदा मिलने के बाद निर्धारित समय पर काम पूरा करने की जिम्मेदारी दी जाती है. परंतु विगत एक सप्ताह से बालू का उठाव बंद होने के कारण निर्माण से जुड़े कार्य बंद हो गया है.
ऐसे में मजदूरों को बैठा कर उसे मजदूरी देना पड़ रहा है. बालू उत्खनन से संबंधित आदेश आने की प्रतीक्षा में मजदूर अपने घरों की ओर भी नहीं लौट पा रहे हैं. ऐसे परिस्थिति में ठेकेदारों के समक्ष आर्थिक परेशानी हो रही है. विभाग से भी निर्माण कार्य नहीं होने पर अद्यतन राशि भी उपलब्ध नहीं करायी जा रही है. ऐसे में ठेकेदारों के समक्ष दोहरे आर्थिक संकट का दंश झेलना पड़ रहा है.
ठप पड़ गया भवन निर्माण
सरकारी भवनों के साथ अपने सपनों का आशियाना बनानेवाले लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है. सरकार द्वारा बालू के उठाव पर रोक लगा दिये जाने के बाद मजदूरों व कारीगरों द्वारा कामकाज बंद कर दिया गया है.
ऐसी परिस्थिति में नवनिर्मित कई मकानों में कहीं छत ढ़ालना बाकी है तो कही प्लास्टर का काम नहीं हो पा रहा है. बालू पहुंचाने वाले टैक्टर चलानेवालों द्वारा भी चोरी छिपे बालू बिक्री करने से हाथ खड़ा कर दिया गया है. इस परिस्थिति में मकान का निर्माण कार्य बंद हो गया है.
चोरी छिपे बालू का उठाव
जिला मुख्यालय को छोड़ दें तो जिले के प्राय: सभी घाटों पर इन दिनों चोरी छिपे बालू का उठाव करने की घटना में तेजी आयी है. कौओकोल, सिरदला, रजौली, पकरीबरावां, अकबरपुर, हिुसुआ, नारदीगंज सहित कई ऐसे बालू घाट हैं जहां उठाव पर रोक को देखते हुए वाहन चलानेवालों द्वारा रात के अंधेरे में बालू का चोरी छिपे उठाव कर बेचा जा रहा है.
संचालकों द्वारा किये जा रहे इस कार्रवाई से सरकार को राजस्व की क्षति हो रही है. ऐसे में बालू का उठाव का उत्खनन कार्य पांच वर्षों के लिए लेनेवाले जयमाता दी इंटर प्राइजेज के संचालक गोपाल प्रसाद द्वारा निर्धारित तिथि से बालू के उठाव से रोक लगाये जाने के आदेश के बाद प्रशासन को पत्र सौंप कर बालू न उठने वाले दिनों का राजस्व संग्रह संवेदक से नहीं करने की अपील की है.
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