चार माह बाद मिले रुपये

Updated at : 29 Jan 2016 8:05 AM (IST)
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चार माह बाद मिले रुपये

नवादा (नगर) : जिले में चल रहे सभी 14 कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों को बंद करने के अल्टीमेटम का असर तुरंत दिखा और चार बाद उनको गुरुवार को रुपये उपलब्ध करा दिये गये. गौरतलब है कि अक्तूबर से ही स्कूलों को चलाने के लिए रुपये जिले को नहीं मिल रहा था. इसके कारण कस्तूरबा […]

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नवादा (नगर) : जिले में चल रहे सभी 14 कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों को बंद करने के अल्टीमेटम का असर तुरंत दिखा और चार बाद उनको गुरुवार को रुपये उपलब्ध करा दिये गये. गौरतलब है कि अक्तूबर से ही स्कूलों को चलाने के लिए रुपये जिले को नहीं मिल रहा था.
इसके कारण कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों के चलाने में काफी परेशानी आ रही है. बीआरसी में सर्व शिक्षा अभियान के डीपीओ डाॅ रामकुंवर राम को सभी 14 प्रखंडों के विद्यालय संचालकों ने लिखित रूप से अल्टीमेटम देकर स्कूल को बंद करने से संबंधित सूचना दिया था.
इसके बाद आनन-फानन में राज्य कार्यालय द्वारा कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों को चलाने के लिए 40 लाख रुपये उपलब्ध करा दिये गये.
जिले में नौ प्रखंडों में सौ-सौ बच्चों के रहने, खाने व पढ़ने की व्यवस्था व पांच प्रखंडों में 30 से 50 लड़कियों के लिए व्यवस्था है.
अक्तूबर से ही रुपये नहीं मिलने के कारण संचालकों को स्कूल संचालन में काफी परेशानी आ रही थी. लगभग 80 हजार से एक लाख 20 हजार रुपये प्रति माह का खर्च एक स्कूल के संचालन में आता है. ऐसे हालत में पिछले चार महीनों से रुपये नहीं मिलने के कारण स्कूल संचालन बंद होने की स्थिति में पहुंच गया था. जिले में रुपये आवंटन के बाद इसका वितरण स्कूलों को कर दिया गया है. जिन प्रखंडों में सौ बच्चियों के लिए व्यवस्था है.
वहां चार-चार लाख रुपये व जिन स्कूलों में 30 से 50 बच्चियों के लिए व्यवस्था है वहां एक-एक लाख रुपये का आवंटन कर दिया गया है. डीपीओ डाॅ रामकुंवर राम ने बताया कि आरटीजीएस के माध्यम से गुरुवार को ही रुपये प्राप्त हुआ है. गुरुवार को ही सभी स्कूलों को रुपये आवंटित कर दिया गया है.
संचालन का खुला रास्ता
बुधवार को सभी प्रखंडों के स्कूलों के संचालकों ने एक साथ एक फरवरी से विद्यालय बंद करने का अल्टीमेटम दिया था. रुपये के अभाव में दुकानदारों से उधार लेकर केंद्र चलाने में काफी परेशानी हो रही थी. इस के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आया. आनन-फानन में राज्य कार्यालय को इसकी सूचना देकर रुपये उपलब्ध कराया गया. इसके बाद ही सभी कस्तूरबा विद्यालयों को रुपये का आवंटन हो पाया है. पहले भी कई बार संचालकों को दो-तीन माह बाद राशि का आवंटन होता रहा है.
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