खेतों से नमी गायब, नहीं निकल रही बालियां

Published at :29 Oct 2015 6:52 PM (IST)
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खेतों से नमी गायब, नहीं निकल रही बालियां

खेतों से नमी गायब, नहीं निकल रही बालियां हथिया नक्षत्र में नहीं हुई बारिश से धान व दलहन की फसल पर लगा ग्रहण समय पर नहीं मिले डीजल अनुदान के रुपये प्रतिनिधि, वारिसलीगंज हथिया नक्षत्र में आसमान से बारिश की एक बूंद भी नहीं गिरना किसानों को पूरी तरह झकझोर दिया है. किसानों ने काफी […]

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खेतों से नमी गायब, नहीं निकल रही बालियां हथिया नक्षत्र में नहीं हुई बारिश से धान व दलहन की फसल पर लगा ग्रहण समय पर नहीं मिले डीजल अनुदान के रुपये प्रतिनिधि, वारिसलीगंज हथिया नक्षत्र में आसमान से बारिश की एक बूंद भी नहीं गिरना किसानों को पूरी तरह झकझोर दिया है. किसानों ने काफी मशक्कत के बाद पूंजी की व्यवस्था कर धान की रोपनी तो कर दी, लेकिन अंतिम समय में बारिश नहीं होने के कारण बालियां नहीं निकल रही है. कुछ उत्साही किसानों द्वारा पंप सेट के जरिए धान की सिंचाई की जा रही है. वहीं, आर्थिक रूप से कमजोर किसान अभी भी आसमान की तरफ टकटकी लगाये हैं. हल्की बारिश भी हो जाये, तो इनकी परेशानी दूर हो सकती है. सबसे दुर्भाग्य तो यह है कि बारिश नहीं होने से खेतों की नमी समाप्त हो गयी है. धान की फसल तो नुकसान हो ही रहा है़ आलू, सरसों व दलहन फसलों की बुआई में किसानों को काफी मशक्कत करना पड़ रहा है. या यूं कहें कि धान फसल से ज्यादा चिंता रबी फसल की सता रही है. धान फसल की खेती में तमाम पूंजी लगने के बाद प्रकृति की इस तरह के दोहरे मार ने किसानों को पूरी तरह विचलित कर रखा है. नहीं मिल रही सरकारी सुविधा किसानों को सरकारी स्तर पर किसी तरह की सुविधा नहीं दिये जाने से स्थिति और भी भयावह बनी हुई है. डीजल अनुदान का झूठा दिलासा दिला कर अधिकारी किसानों को ठग रहे हैं. सरकार से भी किसानों की उम्मीद टूट गयी है. अगर इस समय डीजल अनुदान के रुपये दिये जाती तो टूट चुके किसानों को सहारा मिल जाता.क्या कहते हैं किसानखेती पूरी तरह घाटे का सौदा बन गयी है. किसान खेती से अपने आप को दूर रहने की सोच रहे हैं. क्योंकि, किसान कर्ज तले दबते जा रहे हैं. बच्चों की पढाई से लेकर शादी- विवाह तक कृषि पर ही निर्भर है. बब्लू सिंह, मकनपुरलगातार मौसम की मार व सरकार की किसान विरोधी नीतियां कमजोर करके रख दिया है. खून-पसीना एक कर उपजे फसल की बिक्री में सरकारी तंत्र किस तरह शोषण कर रही है यह असर विदित है. ऐसे में किसानों के लिए खेती करना असहज महसूस हो रहा है. परमानंद सिंह, सौर

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