भारी बस्ता लेकर कक्षा में रट रहे क, ख, ग..

मिड डे मील का चक्कर : स्कूली छात्रों को घर का पता व पिता के नाम की भी जानकारी नहीं ।। उदय कुमार भारती ।। हिसुआ : क्षेत्र के प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में मिल डे मील योजना में लाभ–शुभ के चक्कर व बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने को लेकर विद्यालय के शिक्षक गलत हथकंडे अपना […]
मिड डे मील का चक्कर : स्कूली छात्रों को घर का पता व पिता के नाम की भी जानकारी नहीं
।। उदय कुमार भारती ।।
हिसुआ : क्षेत्र के प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में मिल डे मील योजना में लाभ–शुभ के चक्कर व बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने को लेकर विद्यालय के शिक्षक गलत हथकंडे अपना रहे हैं. विद्यालयों में पहली कक्षा में नामांकन छह साल से बहुत कम उम्र के बच्चों का किया जा रहा है.
सरकार की पहली कक्षा में नामांकन उम्र की सीमा पांच वर्ष 11 माह की मानकता की घोर अनदेखी हो रही है. नामांकन के निर्धारित मापदंड व आधार की जांच नहीं होने से शिक्षक मनमानी कर रहे हैं.
बानगी के तौर पर नगर पंचायत के वार्ड नंबर चार पांचू कचहरी स्थित उर्दू कन्या मध्य विद्यालय के पहली कक्षा का हाल देखा जा सकता है. कक्षा के कुणाल, गुलशन, सनाउल्ला परवीन, आफताब, बली हसन, जैनत, फरहीन, एजाज, शामिया आदि बच्चों की उम्र तीन–चार साल आंका जा सकता है.
देखने से ही उम्र का पता चल जाता है. बच्चे की बहुत ही कम उम्र होने के कारण पिता के नाम व घर का पता तक भी नहीं बता पाते हैं. लेकिन, इन बच्चों के पीठ पर भारी बसता शिक्षकों के अपनाये गये पेच में फंस कर अभिभावक देकर स्कूल तक पहुंचा दे रहे हैं. ये बच्चे कक्षा में अपने से अधिक उम्र के बच्चों के साथ क, ख, ग के बोल रट रहे हैं.
60 फीसदी से अधिक बच्चों को स्कूल जाने से पहले शिक्षा का ज्ञान नहीं है. पहली कक्षा के रजिस्टर मांगे जाने पर शिक्षक मोहम्मद साहब उद्दीन उसे प्रभारी को अपने कब्जे में रखने की बात कहते हैं. मंगलवार को प्रभारी नूजहत मसकूर विद्यालय नहीं आयी थी. विद्यालय में आठ किलो चावल, तीन किलो आलू व एक किलो सोयाबीन का मिड डे मील बनाये जाने की बातें कही जाती है.
मात्र दो शिक्षक के सहारे विद्यालय चल रहा है. इसी से सटे नवसृजित प्राथमिक विद्यालय पांचू कचहरी में नामांकित बच्चे 91 है, ओर पहली कक्षा में 11 बच्चे हैं. प्रभारी भारती कुमारी व शिक्षक प्रियंका पहली कक्षा से चौथी कक्षा तक के बच्चों को पहले शिफ्ट में पढ़ कर चले जाने की बातें बतायी. इससे नामांकित बच्चों को उम्र का अंदाजा नहीं लग पाता.
नहीं हो पा रहा समुचित विकास
अभिभावक घोषणा के बावजूद बच्चे की सही उम्र का आकलन शिक्षकों को करना है. पर इसकी अनदेखी हो रही है. बच्चों को जहां क ख ग समेत शब्द लिखना–पढ़ना आंगनबाड़ी केंद्र पर सीखना है, वहां से विद्यालय की पहली कक्षा में सीख रहे हैं.
इससे बच्चों में शिक्षा का समुचित विकास नहीं हो पा रहा है. इसके लिए स्कूलों में जांच अभियान चलाने की जरूरत है.
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