बारिश से हर तरफ दिख रहा कीचड़-ही-कीचड़

विश्वशांति चौक पर अब तक जलनिकासी की व्यवस्था नहीं, यात्री बेहाल हिसुआ : बौद्ध सर्किट से जुड़े अंतरराष्ट्रीय पहचान वाले हिसुआ के विश्वशांति चौक की हालत नरक जैसी है. यह स्थिति कोई नयी नहीं है. यहां हर साल बरसात में ऐसी ही स्थिति रहती है. थोड़ी सी बारिश के बाद ही चौक के चारों पथों […]
विश्वशांति चौक पर अब तक जलनिकासी की व्यवस्था नहीं, यात्री बेहाल
हिसुआ : बौद्ध सर्किट से जुड़े अंतरराष्ट्रीय पहचान वाले हिसुआ के विश्वशांति चौक की हालत नरक जैसी है. यह स्थिति कोई नयी नहीं है. यहां हर साल बरसात में ऐसी ही स्थिति रहती है. थोड़ी सी बारिश के बाद ही चौक के चारों पथों का हाल कीचड़ से भर जाता है.
पैदल चलना भी दुश्वार हो जाता है. इससे यात्रियों को काफी फजीहत उठानी पड़ती है. दो दिनों से क्षेत्र में हल्की बारिश हो रही है. इससे विश्व शांति चौकी की सूरत बिगड़ गयी है. साथ ही गया, राजगीर और नरहट रोड की हालत बदतर है. गया जाने के लिए जहां वाहन खड़ा होता है वहां एक–एक दो फुट कीचड़ चारों तरफ भरा पड़ा है.
राजगीर बस स्टैंड की हालत भी बदतर है. नाले की शक्ल में सड़क तब्दील हो चुकी है. पैदल गुजरने वाले लोगों को कपड़ा उठा कर चलना पड़ता है. वाहन गुजरने पर पूरे शरीर पर कीचड़ का छींटा पड़ जाता है. नरहट रोड की हालत भी ऐसी ही है. टेंपो और छोटे वाहन पड़ाव भी कीचड़ मय है.
नहीं बनीं नालियां
नगर पंचायत की स्थापना के लगभग चार दशक गुजर चुका है. विश्व शांति चौक वार्ड एक में पड़ता है. पर, अब तक चौक पर नाली निर्माण का काम का पहल नहीं किया गया है. वार्ड पार्षद, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष किसी के माध्यम से नाली निर्माण के लिये चिह्न्ति नहीं किया गया है.
इस स्थल को नगर पंचायत में हरेक साल मुख्यमंत्री शहरी विकास योजना, बीआरजीएफ व वित्त आयोग योजना जैसे कई योजनाओं की लाखों की राशि का आवंटित है. पर, सारे रुपये की बंदरबांट वार्ड में पीसीसी ढलाई, ईंट सोलिंग, नाली निर्माण के लिए कर ली जाती है. नगर का हृदय स्थल को साफ सुथरा रखने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जाता है.
रोज गुजरते हैं सैकड़ों वाहन
बौद्ध सर्किट बोधगया, राजगीर, कुंडलपुर, पावापुरी से जुड़े होने के कारण इस चौक से सैकड़ों देशी–विदेशी पर्यटकों से वाहन रोज इस चौक से गुजरते हैं. चौक की बदहाली और कीचड़ युक्त मार्ग से वाहनों का जाम लगता है, जिससे पर्यटकों को परेशानी होती है. साथ ही हिसुआ की पहचान को भी बट्टा लगता है. ऐसे में नगर सौंदर्यीकरण और मॉडल नगर का दावा फरेब साबित हो रहा है.
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