रेलवे के बिजलीकरण से मिल रहा है लाभ, दोहरीकरण के काम में आ रही तेजी
Updated at : 15 May 2019 12:23 AM (IST)
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नवादा : वर्षो से उपेक्षित किऊल गया रेलखंड में पिछले साल विद्युतिकरण तथा वर्ष 2020 तक दोहरीकरण का काम यदि पूरा हो जाता है तो निश्चित ही इस क्षेत्र के लोगों के लिए नयी संभावनाओं की शुरुआत होगी. गया किऊल रेलखंड के विद्युतिकरण के बाद लोगों को सुलभ व कम समय में दूरी तय करने […]
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नवादा : वर्षो से उपेक्षित किऊल गया रेलखंड में पिछले साल विद्युतिकरण तथा वर्ष 2020 तक दोहरीकरण का काम यदि पूरा हो जाता है तो निश्चित ही इस क्षेत्र के लोगों के लिए नयी संभावनाओं की शुरुआत होगी. गया किऊल रेलखंड के विद्युतिकरण के बाद लोगों को सुलभ व कम समय में दूरी तय करने का लाभ मिलेगा है.
आजादी के पहले इस रेलखंड पर जो विस्तार के काम हुए इसके बाद 2018 से विद्युतिकरण की शुरूआत हुई है, जबकि आने वाले वर्ष 2020 तक दोहरीकरण का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. किऊल गया रेलखंड में आ रहे इस बदलाव का लाभ जिलेवासियों को दिखने लगा है.
डीजल इंजन की गाड़ियों को बदलकर मेमू ट्रेन के रूप में बदला गया है. इसके अलावे 18 मार्च 2019 से नयी दिल्ली के लिए ट्रेन की शुरुआत भी हुई है. रेलवे के अधिकारियों की माने तो आने वाले दिनों में सभी गाड़ियों को मेमू इंजन यानि इलेक्ट्रिक इंजन में बदल दिया जायेगा.
समय से काम पूरा करने पर जोर : रेलखंड पर पुल-पुलियों की संख्या अधिक होने के कारण कुछ काम को पूरा करने में देरी हो रही है. गया से आगे तथा किऊल से शेखुपरा तक तेजी के साथ दोहरीकरण के लिए काम को पूरा किया जा रहा है. जगह-जगह जरूरत के अनुसार पुल व पुलिया का निर्माण किया हो रहा है.
कुल 31 छोटे-बडे स्टेशनों को जोड़ने वाली गया किऊल रेलखंड में दोहरीकरण के लिए 336 छोटे-बड़े पुल, पुलिया का निर्माण हो रहा है. अधिकतर स्थानों पर काम शुरू हो गया है या काम शुरू करने के लिए तैयारी हो रही है. नये निर्माण का असर स्टेशन परिसर पर भी दिखता है. रेल पुलिस के द्वारा स्टेशन पर अवैध दुकानों को हटाया गया है.
निरीक्षण का दिखा असर
किऊल-गया रेलखंड में विद्युतिकरण का काम पूरा हो गया है. वहीं दोहरीकरण के काम में तेजी से विस्तार दिख रहा है. विकास के मामले में अछूता रहे इस रेलखंड पर निर्माण कार्य शुरू होने के बाद आने वाले कुछ वर्षों में यातायात के मामले में क्षेत्र में विस्तार देखने को मिल सकता है.
निर्माण काम में तेजी के कारण लगातार इस्ट सेंट्रल रेलवे जोन दानापुर के अधिकारियों के अलावे रेलवे के अन्य वरीय अधिकारी रेलखंड का लगातार निरीक्षण कर रहे हैं. रेलवे अधिकारियों की आवाजाही से स्टेशन को भी दुरुस्त रखना पड़ रहा है.
12 सौ करोड़ रुपये विकास कार्यों पर हो रहे खर्च
गया से किऊल तक 124 किलोमीटर की दूरी के रेलवे ट्रैक को दोहरीकरण करने का काम किऊल व गया दोनों तरफ से हो रहा है. रेलखंड की सबसे अच्छी बात यह है कि रास्ते में दोहरीकरण के लिए एक इंच भी जमीन रेलवे को नहीं चाहिए. रेलवे के पास सभी स्थानों के लिए पर्याप्त जमीन है.
रेल मंत्रालय के द्वारा इस योजना पर करीब 12 सौ करोड़ रुपये खर्च की जा रही है. अनुमानित आंकड़ों के अनुसार वर्तमान समय में 20 हजार यात्री प्रतिदिन इस रेलखंड में यात्रा करते हैं.
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