हड़ताल से अर्थव्यवस्था चौपट पटरी पर लाने में लगेगा समय

Updated at : 01 Jun 2018 5:47 AM (IST)
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हड़ताल से अर्थव्यवस्था चौपट पटरी पर लाने में लगेगा समय

जिले के सभी बैंकों में दो दिन तक लटके रहे ताले मांगों के समर्थन में बैंक के कर्मचारी रहे हड़ताल पर नवादा : दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत जिले के सरकारी व गैरसरकारी बैंकों में गुरुवार को भी कामकाज पूरी तरह से ठप रहा. इससे जिले की आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक रूप से असर […]

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जिले के सभी बैंकों में दो दिन तक लटके रहे ताले

मांगों के समर्थन में बैंक के कर्मचारी रहे हड़ताल पर
नवादा : दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल के तहत जिले के सरकारी व गैरसरकारी बैंकों में गुरुवार को भी कामकाज पूरी तरह से ठप रहा. इससे जिले की आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक रूप से असर पड़ा. बैंकीय कारोबार के तहत लगभग 22 करोड़ रुपये की गतिविधियां रुकी रहीं. बड़े कारोबारी के माल की खरीदारी नहीं होने से कई जरूरी सामान की अगले दो चार दिनों तक किल्लत होने भी आसार बढ़ गये हैं. महीने का आखिरी दिन होने के कारण एनईएफटी और आरटीजीएस जैसे जरूरी ट्रांजेक्शन नहीं हो सका है. बैंकीय हड़ताल ने आम जनजीवन पर भी खासा असर डाला है.
बैंकीय कारोबार पर असर
जिले के अग्रणी बैंक प्रबंधक रत्नाकर झा का का मानना है कि इस बंदी ने पूरी बैंकीय प्रणाली को प्रभावित किया है.भले ही ऐसी हड़ताल एक-दो दिनों की होती है,पर अर्थव्यवस्था पर इसका लंबा असर होता है.
उन्होंने कहा कि इस दौरान जिले में लगभग 22 करोड़ रुपये का बैंकीय कारोबार ठप हुआ है. इससे तमाम लोगों को प्रभावित होना पड़ा है़ इसमें व्यावसायिक गतिविधियों सहित सरकार के जरूरी व जन कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े रुपये का ट्रांजेक्शन महत्वपूर्ण रहे हैं.
मनी स्पॉट ने बचायी लोगों की लाज
शहर में लगी लगभग 42 एटीएम दो दिनों से शोभा की वस्तु बनी हुई हैं. कई के तो शटर तक नहीं उठे. 24 घंटे खुले रहनेवालों में नो ट्रांजेक्शन का बोर्ड लगा मिला. इसी बीच शहर के बीच पीएनबी बैंक के नीचे लगा एक प्राइवेट एटीएम मनी स्पॉट में लोगों की भीड़ नजर आयी. पूछने पर पता चला यह खुली है और रुपये की निकासी भी हो रही है.कई जरूरतमंद लोगों ने इस एटीएम की सेवा ली.
वेतन कम बढ़ना बना हड़ताल का कारण
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के तहत वर्ष 2017 के नवंबर में लंबित वेतन से संबंधित हुए समझौते को लागू कराने, प्रस्तावित दो फीसदी के वेतन वृद्धि को मानने से इन्कार करने और अलग-अलग क्षेत्रों में बैंकरों पर हो रहे निरंतर हमले के विरोध में राष्ट्रीय स्तर पर इस हड़ताल का आह्वान हुआ है. बुधवार को इसके कारण जिलेभर के सभी सरकारी और प्राइवेट बैंकों में ताले लटके नजर आये. बैंककर्मियों ने अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया. यह क्रम गुरुवार को भी जारी रहा.इस दौरान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन से जुड़े जिले भर के बैंकरों ने अपनी मांगों को रखा. इनमें सम्मानजनक वेतन वृद्धि और सेवाशर्तों में सुधार सहित अन्य शामिल हैं.
कारोबारियों के पास नहीं है कोई विकल्प
सरकार तमाम कारोबार को कैशलेस मोड में ले आयी है. छोटी-चीजों को छोड़ दें, तो आज व्यापक पैमाने पर कैशलेस का बाजार है. ऐसे में कारोबारियों के पास कोई विकल्प नहीं होता है. माल नहीं है, तो आप खरीद नहीं सकते,हैं तो बेच नहीं सकते. बैंकीय हड़ताल व्यवसायियों को अगले एक-दो सप्ताह तक प्रभावित करता है. यह राज्य और देश की आर्थिक समृद्धि पर असर डालता है.
राजेश्वर प्रसाद राजेश,अध्यक्ष,जिला चैंबर ऑफ कॉमर्स
ट्रांजेक्शन नहीं होगा, तो कैसे चलेगा बाजार
कारोबार का सीधा मतलब लेन-देन से है.रुपये का ट्रांजेक्शन नहीं होगा, तो बाजार चलेगा कैसे. सरकार कहती है पूरी तरह कैशलेस कारोबार को बढ़ावा दें. पर कैसे. साल में कितने दिन बैंक में हड़ताल होगी. कब-कब बंदी होगी. इस दौरान कारोबार का संचालन कैसे होगा. इसे तो बताना चाहिए.लाखों-करोड़ों लगा कर लोग दो दिनों से हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं.
गोपाल प्रसाद,अध्यक्ष,जिला डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन,नवादा
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