दोपहर दो बजे तक नहीं मिलेगी इमरजेंसी सेवा

Updated at : 11 May 2018 6:16 AM (IST)
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दोपहर दो बजे तक नहीं मिलेगी इमरजेंसी सेवा

गंभीर मरीजों को भी लाइन में लग कर कटानी पड़ रही पर्ची एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड की सुविधाएं भी नदारद नवादा नगर : मरीजों का इलाज कर उन्हें ठीक करनेवाला अस्पताल खुद बीमार है. डॉक्टरों व संसाधनों की कमी से इन दिनों मरीजों को अधिक परेशानी हो रही है. एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड एजेंसी के साथ कांट्रेक्ट समाप्त […]

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गंभीर मरीजों को भी लाइन में लग कर कटानी पड़ रही पर्ची

एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड की सुविधाएं भी नदारद
नवादा नगर : मरीजों का इलाज कर उन्हें ठीक करनेवाला अस्पताल खुद बीमार है. डॉक्टरों व संसाधनों की कमी से इन दिनों मरीजों को अधिक परेशानी हो रही है. एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड एजेंसी के साथ कांट्रेक्ट समाप्त होने के बाद नये सिरे से जब तक समझौते की प्रक्रिया पूरी नहीं होती है, मरीजों को इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पायेगा. सदर अस्पताल में औसतन 500 मरीज ओपीडी में इलाज कराने पहुंचते हैं. इसके अलावा इमरजेंसी सेवा में पहुंचनेवाले मरीजों की संख्या अच्छी-खासी है. गरीब लोग बीमारी के समय अपना इलाज तो अस्पताल में कराने पहुंचते हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में उन्हें भी प्राइवेट नर्सिंग होम के चक्कर में पड़ कर रुपये गंवाने पड़ते हैं. प्रसूता वार्ड, नवजात शिशुओं के लिए बने नये वार्ड में स्थिति दूसरे वार्डों से कुछ अच्छी दिखती है.
कांट्रेक्ट खत्म होने के बाद नहीं मिल रही जांच सुविधा
मरीजों को पहले आवश्यक जांच का लाभ मिलता था. लेकिन, राज्यस्तर पर कांट्रेक्ट समाप्त होने से 25 मई से एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड की सेवाएं बंद कर दी गयी हैं. सदर अस्पताल के अधिकारियों ने कहा कि राज्य के सभी अस्पतालों में आईजीएमएस के साथ 10 वर्षों का कांट्रेक्ट कर अस्पतालों में जरूरी जांच की सुविधा मुफ्त या कम कीमत पर उपलब्ध करायी जा रही थी. अल्ट्रासाउंड व एक्स-रे के लिए वर्ष 2008 में कांट्रेक्ट हुआ था, जो 24 अप्रैल को समाप्त हो गया है.
मरीज को इलाज के लिए करना पड़ा इंतजार
सुबह आठ से दो बजे तक शहर में कोई इमरजेंसी नहीं आ सकती है. शायद इसी बात को ध्यान में रखते हुए सदर अस्पताल में ओपीडी के समय इमरजेंसी में इलाज नहीं किया जाता. इमरजेंसी मरीजों को भी आम लोगों के साथ लाइन में लग कर डॉक्टर से दिखाने के बाद जरूरी दवा व ड्रेसिंग की जाती है. बुधवार को घरेलू विवाद में घायल होकर आयी शारदा देवी को अस्पताल में पर्चा कटवाने के बाद तत्काल इमरजेंसी में लाया गया. ताकि उनके फटे सिर से खून बहना बंद हो और जरूरी इलाज किया जाये. लेकिन, वहां इलाज करने के बजाय कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों ने ओपीडी के लाइन में लग कर पहले डॉक्टर से जांच तथा बाद में उनके बताये अनुसार इलाज कराने की जानकारी दी गयी. परिजनों द्वारा इमरजेंसी बताने पर कहा गया कि ओपीडी के समय सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक इमरजेंसी सेवाओं को भी ओपीडी में ही निबटाया जाता है.
70 में मात्र 22 डॉक्टरों की है नियुक्ति
अस्पताल की बेहतर सुविधा हो, इसके लिए जरूरी है कि पर्याप्त संख्या में काम करनेवाले डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मियों की बहाली हो. सदर अस्पताल में 70 में केवल 22 डॉक्टर कार्यरत हैं. डॉक्टरों की कमी के कारण कम चिकित्सकों से निर्धारित समय से अधिक देर तक काम लिया जाता है. स्वास्थ्यकर्मियों की भी काफी कमी है. एनएम के 113 में 61 पद, लैब टेक्निशियन के 15 में 10 पद, क्लर्क असिस्टेंट के 15 में 11, फार्मासिस्ट के 10 में तीन पद खाली हैं.
अस्पताल में कर्मियों व डॉक्टरों की समस्या के बारे में वरीय अधिकारी जानकारी रखते हैं. कांट्रेक्ट समाप्त होने के बाद एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड का काम बंद हुआ है. मरीजों के इलाज का ख्याल उपलब्ध साधनों में रखा जाता है.
डॉ रामनंदन प्रसाद, डीएस, सदर अस्पताल
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