ककोलत की खूबसूरती पर लग रहा गंदगी का दाग
Updated at : 10 Apr 2018 4:14 AM (IST)
विज्ञापन

प्लास्टिक व थर्माकोल से प्रदूषित हो रहा वातावरण सफाई पर सैलानियों को भी देना होगा ध्यान नवादा नगर : बिहार का कश्मीर कहे जानेवाले जिले के ककोलत जलप्रपात की अनदेखी के कारण उसकी प्राकृतिक सौंदर्यता खो रही है. गर्मी के दिनों में वरदान बन कर शीतलता फैलानेवाला ककोलत जलप्रपात को बचाने के लिए पहल की […]
विज्ञापन
प्लास्टिक व थर्माकोल से प्रदूषित हो रहा वातावरण
सफाई पर सैलानियों को भी देना होगा ध्यान
नवादा नगर : बिहार का कश्मीर कहे जानेवाले जिले के ककोलत जलप्रपात की अनदेखी के कारण उसकी प्राकृतिक सौंदर्यता खो रही है. गर्मी के दिनों में वरदान बन कर शीतलता फैलानेवाला ककोलत जलप्रपात को बचाने के लिए पहल की जरूरत है. पहाड़, पर्वतों की हरियाली पेड़ों की अंधाधुंध से खो रही है. छोटे पेड़ों को जलावन की लकड़ी के रूप में काटा जा रहा है.
जबकि कई अन्य माफिया बड़े पेड़ों को काट रहे हैं. पर्यटकों को सही दिशा-निर्देश नहीं मिल पाने के कारण झरना स्थल व नीचे के स्थानों में प्लास्टिक और थर्माकोल के ढेर लगे हैं. आनेवाले पर्यटकों के लिए सुबह से शाम तक खाना बनाने के लिए जलनेवाली लकड़ियों के धुएं, मीट व मुर्गे की दुर्गंध वातावरण को दूषित कर रहे हैं. स्थानीय लोग स्वीकार करते हैं कि पहले थाली गांव के पास से ही शीतलता का अहसास होने लगता था. धीरे-धीरे शीतलता कम हो रही है. राज्य में पर्यटन के इस बड़े स्थल के संरक्षण व प्रकृति की खूबसूरती को इको फ्रेंडली बनाने की जरूरत है. ककोलत के झरना के अलावा आस-पास के पेड़-पौधों व पशु पक्षियों को भी रहने की आजादी देनी होगी, तभी पर्यावरण का संतुलन बना रहेगा.
अंधाधुंध हो रही पेड़ों की कटाई
ककोलत की वादियां पूरी तरह से प्राकृतिक सुंदरता को समेटे है. पहाड़ों पर यदि पेड़-पौधे ही नहीं होगें, तो इको सिस्टम सही से काम कैसे करेगा. झरने के पास में बनी दर्जनों दुकानों में ही सुबह से शाम तक चूल्हे जलाने के लिए लकड़ियों को जलाया जाता है. इसके अलावा कुछ रुपये के लिए स्थानीय लोगों की मिलीभगत से छोटे पेड़ों व टहनियों को काट कर बेचा जा रहा है. इससे प्रकृति को नुकसान हो रहा है.
कचरे का निबटारा करना भी जरूरी
ककोलत में प्रतिदिन आनेवाले हजारों पर्यटकों को सही से दिशा-निर्देश नहीं मिलने के कारण प्लास्टिक व थर्माकोल सहित अन्य कचरे जहां-तहां फेंके जा रहे हैं. झरना कुंड सहित अन्य स्थानों पर फैल कर यह कचरा पेड़-पौधों व मिट्टी पानी को नुकसान पहुंचा रहे हैं. कचरा निष्पादन के उपाय कर दिये जायें, तो काफी हद तक प्लास्टिक व अन्य कचरे को हटाया जा सकता है. पूरे क्षेत्र में कहीं भी डस्टबीन तक की व्यवस्था नहीं है. खाने की सामग्री, शैम्पू आदि आज कल पाउच या प्लास्टिक के रैपर में आते हैं. इस्तेमाल के बाद उसे, इसी परिसर में छोड़ दिया जाता है. खाना खाने के लिए आज थर्माकोल के बने प्लेट और थाली इस्तेमाल होते हैं, जो जल्द नष्ट नहीं होते. गंदगी को यूं ही आसपास के क्षेत्रों में फेंक दिया जा रहा है, जो आनेवाले दिनों में बड़ी समस्या का कारण बनेगा.
ककोलत को डेवलप करने पर देना होगा ध्यान
नालंदा जिले के घोड़ाकटोरा, पांडूपोखर आदि की तरह इको फ्रेंडली रूप से ककोलत को डेवलप करने की जरूरत है ताकि, पर्यवरण रक्षा के साथ पर्यटन को बढ़ावा मिल सके. जिन्होंने भी पांडूपोखर या घोड़ाकटोरा देखा है, उन्हें पता होगा कि ककोलत का सौंदर्य व प्राकृतिक छटा कहीं बढ़ कर है. जरूरत प्रशासन की सही दृष्टि व पर्यावरण को बचाते हुए पर्यटन स्थल को बढ़ावा देने की है. पांडूपोखर में प्रवेश के समय शुल्क लिये जाने के बाद कई आवश्यक-निर्देश पहले ही दे दिये जाते हैं.
ताकि, क्षेत्र में गंदगी फैलने की संभावना कम से कम हो. ककोलत को यदि सही तरीके से सजाते हुए बढ़ावा दिया जाये, तो सरकार के राजस्व में वृद्धि के साथ आनेवाले पर्यटकों को अधिक सुविधाएं भी दी जा सकेंगी. इससे पर्यटकों को भी प्राकृतिक सुंदरता देखने में अधिक आनंद आयेगा.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




