बढ़ रही हैं सर्पदंश की घटनाएं
Updated at : 13 Jul 2017 10:01 AM (IST)
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नवादा : बरसात के मौसम में कीड़े-मकोड़ों का प्रकोप बढ़ गया है, लेकिन जिला अस्पताल स्थित सीएस स्टोर में मात्र 16 एंटी स्नैक वैक्सीन ही है. इससे जरूरतमंदों दिक्कत होती है. महंगे वैक्सीन रहने के कारण गरीबों को इसी खरीदने में दिक्कत होती है. डॉक्टरों के अनुसार एक मरीज के शरीर से पूरी तरह विष […]
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नवादा : बरसात के मौसम में कीड़े-मकोड़ों का प्रकोप बढ़ गया है, लेकिन जिला अस्पताल स्थित सीएस स्टोर में मात्र 16 एंटी स्नैक वैक्सीन ही है. इससे जरूरतमंदों दिक्कत होती है. महंगे वैक्सीन रहने के कारण गरीबों को इसी खरीदने में दिक्कत होती है. डॉक्टरों के अनुसार एक मरीज के शरीर से पूरी तरह विष उतारने व उसे स्वस्थ करने में करीब 16 से 18 वैक्सीन दिये जाते हैं.
ऐसी स्थिति में इन दिनों बरसात के मौसम में सांप के काटने का मामला आने पर मरीज को बचाना मुश्किल हो सकता है. विषैले सांप काटने के बाद सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ही यह व्यवस्था उपलब्ध है. दो दिनों में दो मरीजों को जिस तरह से सांप काटने के बाद वैक्सिन दिया गया है उससे यह साफ हो गया कि दो-चार दिनों तक मरीजों का इसी तरह आना जारी रहा, तो भयावह स्थिति उत्पन्न हो सकती है.
10 जुलाई को सदर प्रखंड के महुली गांव निवासी विजय चौधरी की छह वर्षीय पुत्री संगीता कुमारी को विषैले सांप के काटने पर उसे सदर अस्पताल में छह एंटी स्नैक वैक्सीन दिये गये. बावजूद उसको रेफर करना पड़ा. इसके ठीक अगले दिन 11 जुलाई को सांप काटने से पीड़ित मुफस्सिल थाना क्षेत्र के घुमरा गांव निवासी सीताराम सिंह की पत्नी 58 वर्षीय मुकुल कुमारी शर्मा को पांच वैक्सीन दिये गये. इस प्रकार यदि बरसात के दिनों में जिस तरह से सांप काटनेवालों की तादाद बढ़ती जा रही है, उस हिसाब से सदर अस्पताल में एंटी स्नैक वैक्सीन की उपलब्धता पर प्रश्न चिह्न लगने लगा है.
नये वित्तीय वर्ष में अब तक एंटी स्नैक वैक्सिन उपलब्ध नहीं कराये गये हैं. पिछले वर्ष के बचे हुए 50 वैक्सीन से काम चल रहा है. 15 जून 2017 को सीएस स्टाॅक से सदर अस्पताल को 40 वॉयल और दो पीएचसी को दो-दो वॉयल दिये गये. इस हिसाब से सीएस स्टॉक में मात्र 16 वॉयल ही दवा बची है. इधर ,इमरजेंसी की बात करें, तो बुधवार की रिपोर्ट के अनुसार मात्र 24 वॉयल ही एंटी स्नैक है. जिस तरह सांप काटने की घटनाएं हो रही हैं, उसके लिए करीब 200 वैक्सीन होना जरूरी है.
इमरजेंसी में नहीं होता वैक्सीन का रिकॉर्ड
इमरजेंसी में एंटी स्नैक वैक्सीन का कोई रिकाॅर्ड नहीं रहने से इस महंगे वैक्सीन की बंदरबांट होने की संभावना बनी रहती है. जेनरल रजिस्टरों में खोजना काफी मुश्किल हो जाता है. किस मरीज को कितना वैक्सीन दिया गया, यह खोज पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है. ऐसे में वैक्सीन देने में अवैध वसूली या फिर बंदरबांट की पूरी संभावना बनी हुई है.
क्या कहते हैं अिधकारी
वर्ष 2016-17 में नवंबर माह के दौरान 200 एंटी स्नैक वैक्सीन था. इसमें 31 मार्च तक 140 वॉयल खत्म हो गया. शेष 60 वॉयल में नये वित्तीय वर्ष 2017-18 में 44 वॉयल वितरण कर दिया गया है. एंटी स्नैक वैक्सिन के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति के बीएमएसआइसीएल को 26 जून को 200 वैक्सीन देने की मांग की गयी है. अब तक आपूर्ति नहीं हो सकी है.
कृष्णा प्रसाद, सीएस स्टोर इंचार्ज
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