रजौली अनुमंडल अस्पताल में इलाज से कतरा रहे मरीज

Updated at : 12 Jul 2017 9:13 AM (IST)
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रजौली अनुमंडल अस्पताल में इलाज से कतरा रहे मरीज

रजौली : अनुमंडलीय अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं रहने से मरीज इलाज कराने से कतरा रहे है. अस्पताल में चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मियों, सरकारी दवा के नहीं रहने से यह स्थिति उत्पन हुई है. हालांकि सरकार के स्तर से नया अस्पताल भवन बनाया है. जहां मरीजों के लिए 75 बेड, आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध है. बावजूद […]

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रजौली : अनुमंडलीय अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं रहने से मरीज इलाज कराने से कतरा रहे है. अस्पताल में चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मियों, सरकारी दवा के नहीं रहने से यह स्थिति उत्पन हुई है. हालांकि सरकार के स्तर से नया अस्पताल भवन बनाया है. जहां मरीजों के लिए 75 बेड, आधुनिक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध है. बावजूद इसके यह हाल है कि मरीज इलाज कराने से कतराते है.
क्या है मुख्य कारण
अनुमंडलीय अस्पताल में एक चिकित्सक ही पदस्स्थापित हैं,जो सभी बिमारियों का इलाज करते हैं. मरीजों की संख्या ज्यादा होने से वह मरीज को समय नहीं दे पाते है. इससे मरीजों को लगता है कि डॉ उनका सही इलाज नहीं करते है. अस्पताल में एक्सरे मशीन व अल्ट्रासाउंड भी है लेकिन टेक्नीशियन नहीं होने से अनुपयोगी है. अस्पताल में 41 प्रकार के दवा के विरूद्ध 12 प्रकार की दवा ही उपलब्ध है. डॉ को बाहर की दवा लिखने की मनाही के कारण उपलब्बध दवा को ही लिखना पड़ता है. इसके सेवन से बीमारी ठीक नहीं होती है.
इन कारणों से मरीज बाहर ही इलाज कराना पसंद करते है.
क्या कहते है मरीज : महसई निवासी दामोदर कुमार ने बताया कि वह हाथ में चोट लगने पर इलाज कराने के लिये अनुमंडलीय अस्पताल गये. जहां इलाज तो कराया लेकिन केवल दर्द की दवा मिली. एंटीबायोटिक दवा उपलब्ध नहीं रहने से बाहर से दवा लेना पड़ा. उसने बताया कि अस्पताल में दवा नहीं रहने से मरीजों को उपलब्ब्ध दवा ही पर्ची पर लिखा जाता है. लेकिन,उस दवा से बीमारी तो ठीक नहीं हो सकती है.
क्या कहते है चिकित्सक : डा़ सतीश चन्द्र सिन्हा का कहना है कि अस्पताल में 41 दवा के बजाये 12 प्रकार की दवा ही उपलब्ब्ध है. विभाग द्वारा बाहरी दवा लिखने को मनाही है. वह चाहकर भी मरीज को बाहरी दवा नहीं लिख सकते हैं. इस कारण मरीजों व उनके परिजनों से रोज विवाद होता है. अस्पताल में सहायक,आदेशपााल व सुरक्षाकर्मी के नहीं रहने से तनाव की स्थिति में काम करना पड़ता है. एक चिकित्सक होने के नाते उनको अत्यधिक काम करना पड़ता है.
क्या कहते है अस्पताल उपाधीक्षक : अस्पताल उपाधीक्षक डा एऩके चौधरी का कहना है कि अस्पताल में चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मियों, सरकारी दवा के नहीं रहने की जानकारी सिविल सर्जन को दी गयी है. उनके स्तर से ही उक्त समस्या का समाधान हो सकता है.
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