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जिले में हैं कालाजार के 28 रोगी

26 Dec, 2016 5:08 am
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जिले में हैं कालाजार के 28 रोगी

अनदेखी. नगरनौसा के तकियापर व हिलसा के मई में नये मरीजों की पहचान दोनों नये मरीजों का एमबीसोम दवा से किया गया इलाज बिहारशरीफ : जिले में कालाजार के दो नये मरीज प्रतिवेदित हुए हैं. चिह्नित नये मरीजों में एक दस साल की बच्ची है जबकि दूसरी वृद्ध महिला है. जिले के नगरनौसा व हिलसा […]

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अनदेखी. नगरनौसा के तकियापर व हिलसा के मई में नये मरीजों की पहचान

दोनों नये मरीजों का एमबीसोम दवा से किया गया इलाज
बिहारशरीफ : जिले में कालाजार के दो नये मरीज प्रतिवेदित हुए हैं. चिह्नित नये मरीजों में एक दस साल की बच्ची है जबकि दूसरी वृद्ध महिला है. जिले के नगरनौसा व हिलसा प्रखंड क्षेत्रों में नये मरीज मिले हैं. जिले में दो नये मरीजों की पहचान होने के बाद विभाग पूरी तरह से अलर्ट हो गया है.हालांकि चिह्नित इन मरीजों की चिकित्सा सेवा जिला कालाजार विभाग की ओर से की गयी है.इस तरह जिले में कमोबेश अभी भी कालाजार के रोगी प्रतिवेदित हो रहे हैं. जिले में दो नये मरीज मिलने के बाद इसकी संख्या अब तक 28 तक पहुंच चुकी है. जिसमें से सबसे अधिक नगरनौसा प्रखंड में कालाजार के मरीज प्रतिवेदित हुए हैं.
नगरनौसा में अब तक 17 मरीज हो चुके प्रतिवेदित
जिले में अब तक कालाजार के कुल 28 मरीज मिले हैं. जिसमें से सर्वाधिक नगरनौसा प्रखंड क्षेत्र में 17 रोगी शामिल हैं. जिनमें से 14 मरीज नगरनौसा प्रखंड मुख्यालय स्थित तकियापर टोले के हैं जबकि तीन रोगी अहियातपुर गांव के हैं. इस तरह ग्राफ देखा जाय तो इस बार कालाजार की जीवाणु नगरनौसा प्रखंड क्षेत्र में अपना पैर पसारे हुए है. हालांकि नगरनौसा में अब तक जितने भी मरीज इस साल प्रतिवेदित हुए हैं उसमें से अधिकतर बाहर से पीड़ित होकर घर आये हैं. नगरनौसा के तकियापर निवासी वृद्ध महिला सत्या देवी व हिलासा के मई निवासी बच्ची मोनी कुमारी की चिकित्सा एमबीसोम इंजेक्शन से की गयी है.
नये मरीजों का किया गया इलाज
कालाजार के दो नये मरीजों का इलाज जिला कालाजार सह मलेरिया विभाग की ओर से कर दिया गया है.इन रोगियों का एमबीसोम नामक इंजेक्शन से इलाज किया गया. एकमात्र इंजेक्शन लगाने से ही मरीज रोग से मुक्त हो जाते हैं. पहले कालाजार के रोगियों को 28 दिनों तक दवा खानी पड़ती थी. इस तरह एमबीसोम इंजेक्शन की इजाद होने के बाद मरीजों को इलाज कराने में काफी सहूलियत हो रही है. यह इंजेक्शन विभाग की ओर से मरीजों को मुफ्त में दी जाती है.
प्रभावित गांवों में किया गया दवा का छिड़काव
हाल के दिनों में जिले के जिस प्रखंड क्षेत्रों में कालाजार के नये रोगी मिले हैं.वहां पर लगातार चार दिनों तक दवा छिड़काव कार्यक्रम चलाया गया. प्रखंड क्षेत्रों के गांवों में कालाजार के जनित बालूमक्खी की जीवाणुओं को मारने के लिए माइक्रोप्लान बनाकर छिड़काव कार्य किया गया.दवा छिड़काव कार्य में अलग-अलग गांवों में अलग-अलग छिड़काव दल लगाये गये थे.कार्य योजना के मुताबिक छिड़काव दल के सदस्यों ने आवंटित गांवों में जाकर तिथिवार छिड़काव कार्य किया.जिले के चिंहित प्रखंडों के गांवों के हर घर में जाकर छिड़काव दल के सदस्यों ने गहन रूप से छिड़काव किया.यह कार्य तेरह से लेकर सोलह दिसंबर तक किया गया.
मरीजों को हो रही परेशानी
बेन. एक तरफ सूबे की सरकार राज्य में आम लोगों को बेहतर व सुलभ चिकित्सा सुविधा मुहैया करवाने की बात करती है. परन्तु पीएचसी बेन में जमीनी हकीकत यह है कि यहां के लोगों को बुनियादी चिकित्सा सुविधा भी नहीं मिल रही है. प्रखंड क्षेत्र स्थित सभी उपस्वास्थ्य के न्द्रो की स्थिति भी बदहाल है.
जहां संसाधन एवं चिकित्सा कर्मियों के अभाव में लोगों को चिकित्सा सुविधा के नाम पर ठगी का शिकार होना पड़ता है. जिस वजह से आम लोगों को समुचित चिकित्सा सेवा के लिए निजी अस्पतालों का रूख करना पड़ता है.
इसी कारण से इन अस्पतालों की चांदी कट रही है. नतीजतन विभिन्न रोगों से ग्रस्त लाचार व बेवश मरीज बेवसी में अपना आर्थिक दोहन करवाने को विवश हैं. ज्ञात जानकारी के अनुसार मुख्यालय का इकलौता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बेन इन दिनों चिकित्सकों व स्वास्थ्यकर्मियों के अभाव में बदहाल है. प्रतिनियुक्त प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सतीश कुमार सिन्हा अस्पताल में संसाधनों का रोना रोते हुए उपलब्ध संसाधनों से ही किसी तरह काम् ाचलाने व बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की बात करते हैं. ऐसे में सहज अन्दाजा लगाया जा सकता है कि अस्पताल में मरीजों की इलाज व्यवस्था काफी दैयनिये है. इस अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग प्रतिमाह लाखों रुपये खर्च करती है. चुंकि प्रखंड के चौरासी हजार से अधिक की आबादी के लिए चिकित्सा सेवा उपलब्ध करवाने का प्रमुख केन्द्र है. प्रत्येक दिन यहां पर्ची कटवाने आये मरीजों की लम्बी-लम्बी कतारें देखी जाती है.
ऐसे में जब अस्पताल में चिकित्सक की संख्या ही कम हो तो भला इलाज कैसे संभव है ? लिहाजा मरीजों का नब्ज देखे बगैर उनका नाम व चेहरा देखकर ही इलाज करने में यहां के चिकित्सकों को महारथ हासिल हो चुकी हैं. अस्पताल में समुचित इलाज की सुविधा नहीं होने से आम मरीजों की निजी अस्पतालों पर निर्भरता काफी बढ़ गई है. इस अस्पताल में चिकित्सकों की कमी को ले कई बार प्रबंधन का ध्यान भी आकृष्ट कराया जा चुका है परन्तु पीएचसी प्रबंधन की अनदेखी कायम होने के कारण यहां के मरीजों को समुचित लाभ नही मिल पाता है.
पीएचसी की वर्तमान स्थिति:-
सृजित पद- कार्यरत- रिक्त
चिकित्सक:-11 01 10
क‌र्ल्क:- 01 01 00
महिला चिकित्सक:- 01- 00 01
एएनएम:- 45 43 02
एलएचभी:-01 01 00
स्वास्थ्य प्रबंधक:-01 01 00
हेल्थपुरूष कार्यकर्ता:-01 00 01
कम्पाउन्डर:-01 00 01
ड्रेसर:- 01 00 01
आशा:-85 81 04
ममता:-03 03 00
( उपरोक्त रिपोर्ट पीएचसी अनुसार ).
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