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दिल्ली से बेंगलुरु तक बिकेगी नालंदा का सत्तू

6 Aug, 2016 7:35 am
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दिल्ली से बेंगलुरु तक बिकेगी नालंदा का सत्तू

नामी कंपनियों से भी चल रही बात बिहार के विरासतों में से एक सत्तू की अब मार्केटिंग पूरे देश में जल्द ही शुरू होने जा रही है. विरासतों की सोंधी खुशबू अब पूरे देश में धूम मचाने को तैयार है. नालंदा का जांता सत्तू की एक आकर्षक पैक में मार्केटिंग होने जा रही है. इसी […]

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नामी कंपनियों से भी चल रही बात
बिहार के विरासतों में से एक सत्तू की अब मार्केटिंग पूरे देश में जल्द ही शुरू होने जा रही है. विरासतों की सोंधी खुशबू अब पूरे देश में धूम मचाने को तैयार है. नालंदा का जांता सत्तू की एक आकर्षक पैक में मार्केटिंग होने जा रही है. इसी सिलसिले में नाबार्ड के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर सात दिवसीय दौरे पर बिहार आ रहे हैं. वे नालंदा को इसके उत्पाद व मार्केटिंग की व्यवस्था का जायजा लेंगे.
बिहारशरीफ. नालंदा की महिलाएं अब मिट्टी के चूल्हे पर चना भूंज कर उसे जांता से पिस कर पैकट बनायेगी और डिल्बे में पैकेजिंग कर मार्केटिंग करेंगी. बिहार की वर्षों पुरानी विरासत चना के सत्तू की सोंधी खुशबू अब जल्द ही पूरे अपनी पहचान बनायेगी. इसकी सारी तैयारी पूरी हो गई है.
चंडी के माधोपुर बाजार में चना के सत्तू का उत्पादन केंद्र बनाया गया है. क्षीतिज एग्रोटेक के सहयोग से खेत्र के 150 महिलाओं का समूह बना कर उन्हें पारंपरिक तरीके से सत्तू बनाने के कार्य जोड़ा गया है. क्षीतिज एग्रो टेक इस चने के सत्तू का मार्केटिंग करेगा. इसके लिए जीविका से जुड़ी हुई महिलाओं व अन्य महिलाओं के लिए सोर्स ऑफ इनकम बढ़ाने के उद्देश्य से एक क्षीतिज एग्रोटेक द्वारा एक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया गया है.
बृहत पैमाने पर होगी मार्केटिंग
नालंदा के सत्तू की बिक्री देश के बड़े बड़े शहरों में होगी. इनमें दिल्ली व बंगलुरू भी शामिल हैं. ऑन लाइन शॉपिंग साइट आमेजॉन के माध्यम से इसकी बिक्री होगी. बिग बाजार व बिग बॉस्केट में बिक्री किये जाने के लिए बात चल रही है. प्रक्रिया अंतिम चरण में है.
उत्पादन केंद्र बढ़ाये जायेंगे
क्षीतिज एग्रोटेक द्वारा पहले चरण में चंडी के माधोपुर बाजार में उत्पादन की व्यवस्था की गई है. यहां फिलहाल 150 महिलाएं मिल कर इसके निर्माण में लगी है. इसके बाद हरनौत, सिलाव व रहुई में महिलाओं का ग्रुप बना कर सत्तू उत्पउन केंद्र बनाया जायेगा. योजना जिले की एक हजार महिलाओं को इसमें जोड़ने की है. इसके लिए महिलाओं को प्रति किलो 25 रुपये मेहनताना दिया रहा है. चना सत्तू 250 ग्राम के पैकेट व एक किलो के डिब्बे में तैयार किया जा रहा है. इस सत्तू की कीमत 180 रुपये किलो निर्धारित की गई है. नाबार्ड द्वारा इसके लिए क्षीतिज एग्रो टेक को दो करोड़ रुपये लोन उपलब्ध कराया गया है.
सात को नालंदा आयेंगे डीएमडी
नाबार्ड के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर आर अमालोरपावानाथन सात अगस्त को हरनौत के स्थित क्षीतिज एग्रोटेक पहुंचेंगे. इसके बाद उसी दिन शाम को राजगीर ग्रामीण बैंक के तीनों जोन के चेयरमैन के साथ बैठक करेंगे. आठ अगस्त को डीएमडी चंडी के माधोपुर बाजार जा कर चना सत्तू के निर्माण प्रक्रिया का जायजा लेंगे तथा इससे जुड़ी हुई महिलाओं से विचार विमर्श करेंगे. नौ अगस्त को पटना में मुख्यमंत्री व राज्य के मंत्रियों के साथ बैठक में शामिल होंगे.
”बिहार के विरासत को नयी पहचान देने के लिए चंडी के माधोपुर में महिलाओं का समूह बना कर पारंपरिक रूप से चना का सत्तू तैयार कर उसकी मार्केटिंग की जायेगी. दिल्ली से लेकर बंगलुरू तक इसकी मार्केटिंग होगी. आमेजॉन, बिग बाजार, बिग बॉस्केट से भी बात चल रही है. इसको वृहत रूप दिया जायेगा. हरनौत, सिलाव व रहुई में भी इसी तरह का सत्तू उत्पादन केंद्र खोला जायेगा. महिलाओं का सोर्स ऑफ इनकम बढ़ाने के लिए क्षीतिज एग्रोटेक द्वारा एक प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया जा रहा है.”
एस कुमार, डायरेक्टर, क्षीतिज एग्रोटेक, नेहुआ, नालंदा
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