श्रद्धालुओं ने किया दान-पुण्य
Updated at : 16 Jan 2016 12:40 AM (IST)
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बिहारशरीफ : मकर संक्रांति का त्योहार शुक्रवार को जिले में पूरे उत्साह एवं भक्तिमय से मनाया गया. इस मौके पर अहले सुबह से ही नदियों, तालाबों व सरोवरों में डूबकी लगाने वालों की भीड़ लगी रही. जिले से बड़ी संख्या में श्रद्धालु फतुहा, बाढ़ व बख्तियारपुर में जा कर गंगा की पावन धारा में स्नान […]
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बिहारशरीफ : मकर संक्रांति का त्योहार शुक्रवार को जिले में पूरे उत्साह एवं भक्तिमय से मनाया गया. इस मौके पर अहले सुबह से ही नदियों, तालाबों व सरोवरों में डूबकी लगाने वालों की भीड़ लगी रही.
जिले से बड़ी संख्या में श्रद्धालु फतुहा, बाढ़ व बख्तियारपुर में जा कर गंगा की पावन धारा में स्नान कर उत्तरायण सूर्य को नमन किये एवं तिल दान कर दैहिक व दैविक परेशानी से मुक्ति को भगवान भाष्कर से मन्नतें मांगी. इस पर्व के मौके पर मिल के धार्मिक महत्व के मद्देनजर लोगों द्वारा तिल से बने मिष्ठानों का दान एवं भोजन किया गया. दही चुड़ा व तिल के बने मिष्ठानों का भोजन राजनैतिक गलियारे में भी चर्चा का विषय बना रहा. पटना में सियासी दही चुड़ा का आयोजन कर अपने मित्रों के साथ दही चुड़ा के साथ जायकेदार सब्जी व तिल से बने मिष्ठानों का लुत्फ उठाया गया. इस दौरान हिंंदु भाइयों के घर में आयोजित भोज में शामिल होकर मुसलिम भाइयों ने भी साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश की.
हिरण्य पर्वत पर रहा मेला सा नजारा:
मकर संक्रांति पर्व के अवसर पर हिरण्य पर्वत पर भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गयी़ इस दौरान वहां मेला सा दृश्य नजर आया. शहर के लोगों से हिरण्य पर्वत पर स्थित मंदिर में पूजा अर्चना करने के साथ ही वहां भ्रमण कर रमणीक व मनोरम नजारे का लुत्फ उठाया. महिला एवं बच्चों ने भी बड़ी संख्या में हिरण्य पर्वत एवं सुभाष पार्क में पिकनिक का आनंद उठाये.
धार्मिक मान्यता के अनुसार पर्व का महत्व:धार्मिक मान्यता के अनुसार राजा भगीरथ के कठिनतप से धरती पर उतरी गंगा ने उनके पूर्वजों का उद्धार करते हुए आज ही के दिन सागर से मिली थी. गंगा व सागर का यह मिलन भगवान सूर्य के मकर राशि के संक्रमण से निकल कर उतरायण में प्रवेश करने के साथ हुई थी. ऐसी मान्यता है कि इस दिन गंगा में स्नान कर तिल दान कर सूर्य की उपासना करने से पुण्य की प्राप्ति एवं समस्याओं से मुक्ति मिलती है.
शेखपुरा. जिले में आस्था और प्राचीन मान्यताओं का महापर्व मकर संक्रांति काफी धूमधाम से मनाया गया. इस मौके पर अहले सुबह घर की साफ-सफाई के बाद महिलाओं ने देवी-देवताओं पर तिल और गुड़ चढ़ा कर पूजा-अर्चना की. इसके बाद दही-चूड़ा और तिलवा खाकर धूमधाम से त्योहार मनाया.
वहीं इस पावन अवसर पर अपने दोस्तों और नाते-रिश्तेदारों के साथ खांड पर स्थित पहाड़ी चोटी पर मकर संक्रांति मनाया. इस दौरान पहाड़ी चोटी पर खिचड़ी बना कर न सिर्फ खाया बल्कि गरीबों के बीच वितरण भी किया. मौके पर प्रदूषण केंद्र के संचालक कृष्ण कुमार उर्फ मुन्ना, युवा समाजसेवी रविंद्र कुमार,ललन पांडेय,धर्मेंद्र साव,राजेंद्र महतो,रमेश कुमार, पंकज वर्णवाल, राजीव कुमार समेत अन्य लोग जश्न में शामिल हुए. इस मौके पर युवाओं ने कहा कि पहाड़ी भूखंड शहर की रौनक और प्राकृतिक सौंदर्य का साधन है. युवाओं ने जिलाधिकारी चंद्रशेखर सिंह से कार्रवाई की मांग की है.
शेखपुरा. मकर संक्रांति के अवसर पर मकर मिलन का आयोजन किया गया. अरियरी प्रखंड के गेलछी गांव स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के अलावा चेवाड़ा प्रखंड के बसंत गांव में भी सामाजिक कार्यकर्ता अजय कुमार ने मकर मिलन का आयोजन किया.
इस अवसर पर चूड़ा दही के अलावे तिलकुट का जम कर सेवन किया गया. कस्तूरबा विद्यालय में वार्डेन पिंकी सिन्हा की देखरेख में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया. सभी छात्राओं को इस अवसर पर दही-चूड़ा तथा तिलकुट परोसा गया. इसके साथ विद्यालय की शिक्षिका वाजदा तबस्सुम, रूबी कुमारी, रागिनी कुमारी के साथ-साथ शिक्षकेत्तर कर्मी नवीन कुमार और गोरेलाल ठाकुर ने भी इस आयोजन में भाग लिया. वहीं चेवाड़ा प्रखंड के बसंत गांव में भी मकर मिलन समारोह की धूम रही. बसंत गांव में प्रखंड भर के गणमान्य लोग उपस्थित हुए. इस अवसर पर परंपरागत रूप में चूड़ा-दही का सेवन किया.
तथा इस अवसर पर एक-दूसरे को बधाई दी. इस आयोजन को लेकर अजय कुमार ने बहुत पहले से तैयारी कर रखी थी तथा क्षेत्र में शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए यह आयोजन किया. उधर मकर संक्रांति को लेकर जिले में काफी उत्साह देखा जा रहा था. सवेरे से ही लोग स्नान आदि से निवृत्त होकर दही-चूड़ा तथा तिल का सेवन किया तथा इसका दान भी किया.
जिले में कई जगह गुरुवार को भी मकर संक्रांति मनायी गयी तथा लोगों ने उत्साह के साथ परंपरागत रूप से मकर संक्रांति मनाया. इस अवसर पर दही की बढ़ी मांग को देखते हुए सुधा द्वारा भी विशेष आपूर्ति की जा रही थी. परंपरागत रूप से इस आयोजन में दही के साथ-साथ तिल का विशेष महत्व माना जाता है. बाजारों में तिलकुट की खरीदारी भी जोरों पर रही. बाजार में 200 रुपये से 300 रुपये प्रति किलो की दर से लोग जम कर खरीदारी कर रहे थे. इस अवसर पर बच्चे भी काफी उत्साहित दिख रहे थे.
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