तीन को उम्रकैद की सजा

Updated at : 26 Oct 2013 10:19 PM (IST)
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तीन को उम्रकैद की सजा

संवाददाता,शेखपुरा खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू करने के लिए बनाये गये जिला समन्वयक कांग्रेस के दिग्गज सुरेश प्रसाद सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी. बरबीघा के बबनबीघा गांव निवासी पुराने हाट मालिक के नाम से प्रसिद्ध कांग्रेस नेता के भाई महेश प्रसाद सिंह और उमेश प्रसाद सिंह को भी आजीवन कारावास की सजा और […]

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संवाददाता,शेखपुरा

खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू करने के लिए बनाये गये जिला समन्वयक कांग्रेस के दिग्गज सुरेश प्रसाद सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी. बरबीघा के बबनबीघा गांव निवासी पुराने हाट मालिक के नाम से प्रसिद्ध कांग्रेस नेता के भाई महेश प्रसाद सिंह और उमेश प्रसाद सिंह को भी आजीवन कारावास की सजा और 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया गया. कांग्रेस नेता पर अपने ही गांव के सचित सिंह की हत्या का आरोप लगा था. इस मामले में उन्हें 24 अक्तूबर को दोषी पाया गया था. शेखपुरा के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सतीश चंद्र श्रीवास्तव ने शनिवार को उन्हें खुले न्यायालय में सजा सुनायी. अपर लोक अभियोजक बनारसी प्रसाद यादव ने इस संबंध में बताया कि 2 सितंबर, 2005 को सचित सिंह की हत्या के बाद बरबीघा थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. बरबीघा थाना कांड संख्या 178105 के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने इस मामले में आरोप पत्र दाखिल किया था. न्यायालय में कार्रवाई के दौरान अभियोजन की ओर से कुल 11 गवाह प्रस्तुत किये गये थे, जबकि बचाव पक्ष ने भी अपने पक्ष में 08 गवाह न्यायालय में पेश किया था. मृतक के भाई छुट्टर सिंह इस मामले के सूचक थे. सजा सुनाने की कार्रवाई पूरी होने के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया है. मामले की सुनवाई के बाद कांग्रेस नेता सुरेश सिंह ने अपने बीमारी का वास्ता देते हुए न्यायालय में एक आवेदन दिया और जेल से अस्पताल भेजने की गुहार लगायी. इस संबंध में न्यायालय सूत्रों ने बताया कि उनके द्वारा दिये गये आवेदन को जेल प्रशासन के सुपुर्द कर दिया गया है. उधर जेल सूत्रों ने बताया कि उनके द्वारा दिये गये आवेदन को जेल प्रशासन के सुपुर्द कर दिया गया है. उधर जेल सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस नेता सुरेश प्रसाद सिंह को सजा सुनाये जाने के बाद सजा भुगतने के लिए भागलपुर भेजा जायेगा. शेखपुरा मंडल कारा में केवल विचाराधीन कैदियों के रखने की व्यवस्था है. न्यायालय द्वारा सजा सुनाये जाने के बाद अब भागलपुर भेजना जेल प्रशासन की अनिवार्यता है.
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