बिना विज्ञान शिक्षक के हो रही इंटर की पढ़ाई, हो रही परेशानी

Updated at : 02 Apr 2015 12:42 AM (IST)
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बिना विज्ञान शिक्षक के हो रही इंटर की पढ़ाई, हो रही परेशानी

बिहारशरीफ : रहुई प्रखंड के वीरचंद पटेल +2 उच्च विद्यालय पेशौर में कला संकाय के मात्र तीन शिक्षकों के भरोसे इंटरमीडिएट की पढ़ाई की जा रही है. विद्यालय में इतिहास, राजनीति शास्त्र तथा समजशास्त्र के अलावे किसी अन्य विषय के शिक्षक नहीं है. विज्ञान संकाय में लगभग एक सौ बच्चों के नामांकन रहने के बावजूद […]

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बिहारशरीफ : रहुई प्रखंड के वीरचंद पटेल +2 उच्च विद्यालय पेशौर में कला संकाय के मात्र तीन शिक्षकों के भरोसे इंटरमीडिएट की पढ़ाई की जा रही है. विद्यालय में इतिहास, राजनीति शास्त्र तथा समजशास्त्र के अलावे किसी अन्य विषय के शिक्षक नहीं है. विज्ञान संकाय में लगभग एक सौ बच्चों के नामांकन रहने के बावजूद यहां विज्ञान शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गयी है. भाषा विषयों में भी शिक्षक नहीं है.
विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने बताया कि शिक्षकों की भारी कमी के कारण यहां नामांकित विद्यार्थियों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है. विद्यालय के छात्र संजय कुमार तथा विजय कुमार ने बताया कि शिक्षकों की कमी के कारण यहां नामांकित विद्यार्थियों को बिहारशरीफ के ट्यूशन तथा कोचिंग संस्थानों में मोटी फीस देकर अपनी पढ़ाई पूरी करनी पड़ती है. ग्रामीण क्षेत्र का विद्यालय होने के कारण इस विद्यालय का क्षेत्र में काफी महत्व है, लेकिन उपयुक्त व्यवस्था नहीं रहने के कारण स्कूल के छात्र-छात्राओं में काफी मायूसी है.
खेल का मैदान बना मवेशियों का चरागाह
वीरचंद पटेल उच्च विद्यालय के पास बड़ा खेल का मैदान है, लेकिन चहारदीवारी नहीं रहने के कारण यह मवेशियों का चरागाह बना हुआ है. अक्सर ग्रामीणों के मवेशियों के मैदान में घूमते रहने के कारण जहां बच्चे मैदान में खेलने से डरते हैं. वहीं विद्यालय के संसाधन भी सुरक्षित नहीं है. विद्यालय के विद्यार्थियों ने बताया कि खेल शिक्षक तथा खेल के कई प्रकार के साधन विद्यालय में उपलब्ध रहने के बावजूद चहारदीवारी के अभाव में समस्या बनी हुई है.असुरक्षा के कारण ही कई खेल उपकरण मैदान में लगाये जाने के बजाय कमरों में बंद कर रखे गये हैं.
लिपिकीय कार्य भी संभाल रहे हैं शिक्षक
माध्यमिक कक्षाओं के लिए विद्यालय में 9 शिक्षक मौजूद है. इनमें संस्कृत विषय के शिक्षक की कमी पहले ही से है. विद्यालयों में वर्षो से किरानी का पद रिक्त रहने के कारण विद्यालय का लेखा-जोखा समेत अन्य लिपिकीय कार्य भी शिक्षकों को ही निष्पादित करने पड़ते हैं. इससे विद्यालय का पठन-पाठन भी प्रभावित होता है. हालांकि यहां बिजली की समस्या के साथ-साथ कंप्यूटर शिक्षा की भी कोई व्यवस्था नहीं की गयी है.
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