जिले में मंथर गति से चल रहीं कृषि योजनाएं
Updated at : 16 Mar 2015 12:25 AM (IST)
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अब नहीं दिख रहा किसानों में उर्जा व उत्साह नालंदा के किसानों ने अपनी मेहनत की बदौलत कृषि उत्पादन के क्षेत्र में कई रिकार्ड बनाये. धान,गेहूं,आलू,प्याज आदि के उत्पादन विश्व रिकॉर्ड, राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खीचा. कृषि क्षेत्र में नालंदा के किसानों की मेहनत देख जिले के कतरीसराय के दरवेशपुरा […]
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अब नहीं दिख रहा किसानों में उर्जा व उत्साह
नालंदा के किसानों ने अपनी मेहनत की बदौलत कृषि उत्पादन के क्षेत्र में कई रिकार्ड बनाये. धान,गेहूं,आलू,प्याज आदि के उत्पादन विश्व रिकॉर्ड, राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर खीचा. कृषि क्षेत्र में नालंदा के किसानों की मेहनत देख जिले के कतरीसराय के दरवेशपुरा गांव में कृषि कैबिनेट की बैठक तक की गयी थी.
आज जिले के किसान अपनी उर्जा खो शांत पड़े हुए हैं. विभागीय सहयोग सही ढंग से नहीं मिलने के कारण वे हतोत्साहित हो गये हैं.
बिहारशरीफ : एक समय था जब नालंदा के किसानों ने अपनी मेहनत के बलवूते कृषि उत्पादन में धड़ाधड़ रिकॉर्ड स्थापित कर न केवल देश की बल्कि विदेशों का ध्यान अपनी ओर खीचा था.धान,गेहूं,आलू,प्याज के उत्पादन में विश्व रिकॉर्ड स्थापित कर दिखाया था. नालंदा के किसानों द्वारा कायम किये गये रिकॉर्ड का सत्यापन चावल अनुसंधान निदेशालय,हैदराबाद एवं केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान,कटक के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया था. कृषि के क्षेत्र में बनाये गये इन नये रिकॉर्डो की बदौलत नालंदा के किसान हरित क्रांति का अग्रदूत बन गये थे. हरित क्रांति के ये अग्रदूत अब मौन साध चुके हैं.
बिहार को दिलाया कृषि कर्मण अवार्ड :
जिले के मेहनतकश किसानों में वित्तीय वर्ष 2011 – 12 में धान की उत्पादकता में विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया. जिले के किसानों ने धान की खेती की पारंपरिक विधि में परिवर्तन लाकर श्री विधि से धान की खेती की. इस विधि से धान की उत्पादकता में डेढ़ से दोगुनी वृद्धि दर्ज कर जिले के किसानों ने आर्थिक उन्नति का सफल प्रयास किया. आज जिले में हजारों किसान इस विधि से धान की खेती कर रहे हैं. कतरीसराय के दरवेशपुरा गांव के पांच किसानों ने धान उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया.
दरवेशपुरा के ही सुमंत कुमार ने 224 क्विंटल प्रति हेक्टेयर धान का उत्पादन कर नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया. इन्हीं किसानों की मेहनत की बदौलत पहली बार राष्ट्रीय स्तर कृषि के सर्वोच्च पुरस्कार कृषि कर्मण अवार्ड से सम्मानित किया गया. नालंदा के किसानों के नक्शे कदम पर चलते हुए 2012 – 13 में पूरे बिहार में धान उत्पादन में नई क्रांति की शुरूआत की गयी.
गेहूं की श्री विधि से खेती इजाद :
श्री विधि से धान की खेती की सफलता देखते हुए नालंदा में कृषि विभाग ने वित्तीय वर्ष 2008 -09 में गेहूं की फसल के लिए एक ऐसे ही स्वी विधि का प्रयोग राजगीर प्रखंड के करीमपुर गांव निवासी महिला कृषक मालती देवी के खेत में की गयी. केंद्रीय चावल अनुसंधान के निदेशक व अन्य वरीय वैज्ञानिकों की उपस्थिति में इसकी जांच की गयी. यह प्रयोग भी सफल रहा. इस विधि से उत्पादन और उत्पादकता की न केवल बिहार बल्कि पूरे देश में चर्चा हुई थी. उत्पादन 70 से 85 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हुआ जो कि सामान्य से दोगुना अधिक है. सारिलचक के सुरेंद्र ने 126 क्विंटल प्रति हेक्टेयर गेहूं उत्पादन का रिकॉर्ड बनाया था.
धान उत्पादकता का रिकॉर्ड बनाने वाले किसान
नाम – गांव – प्रखंड – उत्पादन
सुमंत कुमार – दरवेशपुरा – कतरीसराय – 224 क्विं. / हेक्टेयर
कृष्ण कुमार मिशन – दरवेशपुरा – कतरीसराय – 202 क्विं. / हैक्टेयर
नीतीश कुमार -दरवेशपुरा – कतरीसराय – 196 क्विं. / हेक्टेयर
विजय कुमार -दरवेशपुरा – कतरीसराय -192 क्विं. / हेक्टेयर.
संजय कुमार – दरवेशपुरा – कतरीसराय – 190 क्विं. / हेक्टेयर
गेहूं के उत्पादन का रिकॉर्ड बनाने वाले किसान :
सुरेंद्र प्रसाद – सारिलचक – सिलाव – 126 क्विं / हे.
जर्नादन राम – कचरा – चंडी – 108 क्विं / हे.
जैविक विधि से उत्पादन का रिकॉर्ड बनाने वाले किसान :
राकेश कुमार – सोहडीह – बिहारशरीफ – 660 क्विं / हे. प्याज
नीतीश कुमार – दरवेशपुरा – कतरीसराय – 729 क्विं / हे. आलू .
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