फंगेशियस मछली का स्वाद चखेगा नालंदा

Updated at : 09 Aug 2013 3:10 AM (IST)
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फंगेशियस मछली का स्वाद चखेगा नालंदा

– विवकानंद – बिहारशरीफ (नालंदा) : अब नालंदा के लोग फंगेशियस मछली के स्वाद चखेंगे. इस मछली का स्वाद चखने के बाद लोग दूसरे मछलियों को भूल जायेंगे. साथ ही साथ इस मछली उत्पादन करनेवाले मत्स्य पालक भी मालामाल हो जायेंगे. मत्स्य विभाग फंगेशियस मछली के उत्पादन के लिए पूरी तैयारी कर रखी है. इसके […]

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– विवकानंद

बिहारशरीफ (नालंदा) : अब नालंदा के लोग फंगेशियस मछली के स्वाद चखेंगे. इस मछली का स्वाद चखने के बाद लोग दूसरे मछलियों को भूल जायेंगे. साथ ही साथ इस मछली उत्पादन करनेवाले मत्स्य पालक भी मालामाल हो जायेंगे. मत्स्य विभाग फंगेशियस मछली के उत्पादन के लिए पूरी तैयारी कर रखी है.

इसके लिए मत्स्य पालकों को भी चयनित कर लिया गया है. इस नयी किस्म के मछली के उत्पादन करने के लिए मत्स्य पालक भी काफी इच्छुक है. नालंदा के किसान इतने मेहनती है कि वे यहां के उर्वरा मिट्टी से सोना तो उगा ही रहे हैं और अब मछली उत्पादन के क्षेत्र में भी नालंदा को आत्मनिर्भर बनाने में जुट गये है. मत्स्य विभाग ने भी ऐसे मेहनती किसानों को प्रोत्साहित कर मछली पालन के लिए हर संभव सहयोग कर रहा है.

मत्स्य विभाग ने यहां के किसानों में मछली पालन के प्रति दिख रहे उत्साह को देखते हुए ऐसे 24 किसानों को मछली उत्पादन करने के लिए उनका आवेदन मत्स्य संसाधन विभाग को भेजा है. यहां के किसान जब मछली उत्पादन करने लगेंगे, तो यह जिला मछली उत्पादन में आत्मनिर्भर बन जायेगा और आंध्र प्रदेश पर जिले को निर्भर रहना नहीं पड़ेगा.

मत्स्य विभाग ने यहां मछली उत्पादन को एक लघु उद्योग का दर्जा देते हुए मत्स्य पालकों को फंगेशियस मछली के उत्पादन करने के लिए चयनित किया है. फंगेशियस मछली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कम समय में अधिक वजन की मछली उत्पादित होती है.

इससे मत्स्य पालकों को लाभ के साथ ग्राहकों को भी ताजी और कम कीमत पर मछली उपलब्ध होगी. जिला मत्स्य पदाधिकारी प्रेम कुमार सिन्हा ने बताया कि मछली उद्योग के लिए एनएफडीवी हैदराबाद 40 प्रतिशत राज्य सरकार ने 20 प्रतिशत मछली उत्पादकों को अनुदान दी जायेगी. जिला का लक्ष्य 7.91 हेक्टेयर तालाब में उत्पादन कमा लक्ष्य 7.91 हेक्टेयर तालाब में उत्पादन का लक्ष्य है.

मत्स्य पदाधिकारी ने बताया कि जिले के चार प्रखंड राजगीर, इस्लामपुर, एकंगरसराय एवं नूरसराय को इस योजना के लिए चयनित किया गया है. मछली कृषकों को अनुदान के रूप में नगर नहीं देकर आहार एवं बीज उपलब्ध कराया जायेगा. सूत्रों के अनुसार कम समय में यह मछली बहुत कम समय में तेजी से बढ़ती है.

महीने में करीब सवा किलो वजन की हो जाती है. स्वाद में उत्कृष्टता के कारण अन्य मछलियों की तुलना में व्यवसायियों की तुलना में व्यवसायिययों को अधिक लाभ प्राप्त होता है.

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