कलेक्ट्रेट के बाबू से अधिक हाईटेक हैं सफाईकर्मी

Updated at : 08 May 2018 4:47 AM (IST)
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कलेक्ट्रेट के बाबू से अधिक हाईटेक हैं सफाईकर्मी

बिहारशरीफ : कलेक्ट्रेट के बाबू से ज्यादा हाईटेक नगर निगम के सफाईकर्मी हैं. कलेक्ट्रेट के बाबू मैनुअल हाजिरी बनाते हैं, जबकि नगर निगम के सफाईकर्मी भी बायोमीटरिक मशीन से हाजिरी बनाते हैं. मशीनीकरण आज की जरूरत है. इस जरूरत में कलेक्ट्रेट की शाखा कौन से पायदान है. इसका अंदाज लगाया जा सकता है. वैसे मैनुअल […]

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बिहारशरीफ : कलेक्ट्रेट के बाबू से ज्यादा हाईटेक नगर निगम के सफाईकर्मी हैं. कलेक्ट्रेट के बाबू मैनुअल हाजिरी बनाते हैं, जबकि नगर निगम के सफाईकर्मी भी बायोमीटरिक मशीन से हाजिरी बनाते हैं. मशीनीकरण आज की जरूरत है. इस जरूरत में कलेक्ट्रेट की शाखा कौन से पायदान है. इसका अंदाज लगाया जा सकता है. वैसे मैनुअल हाजिरी बनाने के कई फायदे हैं. समय-तिथि का सबसे ज्यादा. जाने का समय पर तो कर्मी निर्धारित कर रखा है, लेकिन का आने का नहीं.
लेकिन बायोमीटरिक सिस्टम में आने का समय हमेशा दर्ज रहता है. जिला प्रशासन की कई शाखाओं का कार्य मैनुअल सिस्टम से चलता है. जिला मुख्यालय के किसी शाखा में बायोमीटरिक मशीन की सुविधा नहीं है. कलेक्ट्रेट में भू-अर्जन, निर्वाचन, राजस्व, पंचायत, ग्रामीण विकास, कल्याण, सामाजिक सुरक्षा, सामान्य, विधि, आपूर्ति, नजारत, स्थापना जैसे प्रमुख शाखाएं हैं. इनमें लगभग ढाई सौ कर्मी सेवारत है. लेकिन इनकी हाजिरी रजिस्टर पर बनायी जाती है.
बायोमीट्रिक मशीन लगने पर पकड़ी जायेगी चोरी
कर्मी भी यही चाहते हैं कि इसी तरह समय खप जाये. मशीन लगने से ड्यूटी के कितने पालन करनेवाले कर्मी हैं, जिसका पता चल जायेगा. कुछ साल पहले कलेक्ट्रेट में बायोमीटरिक मशीन लगायी गयी थी. लेकिन कुछ माह के बाद ही सब बेकार हो गया है. इसके बाद से कोई पहल नहीं की गयी.
पेपरलेस भी नहीं हुआ कार्यालय
पेपरलेस कार्यालय का सपना अब तक पूरा नहीं हुआ है. बहुत पहले घोषणा की गयी थी कि जिले के एक प्रखंड कार्यालय व कलेक्ट्रेट की एक शाखा को पेपरलेस कर दिया जायेगा. भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए इसकी पहल की गयी थी. सभी कार्य कंप्यूटर से माध्यम से ऑनलाइन करने की योजना बनायी गयी थी. हालांकि, इस पर कोई काम नहीं हुआ़ लोगों ने बताया कि कार्यालय को पेपरलेस करने के लिए तामझाम के साथ काम शुरू किया गया था. लेकिन, सारी कवायद धरी रह गयी. इसका नुकसान आम लोगों को उठाना पड़ रहा है. बाबुओं से इनकाे छुटकारा नहीं मिला है.
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