छठ पर्व पर तंबुओं का नगर बना बड़गांव

Updated at : 26 Oct 2017 6:37 AM (IST)
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छठ पर्व पर तंबुओं का नगर बना बड़गांव

आयोजन. जापानी टूरिस्टों ने भी इस मेले का भ्रमण कर आनंद लिया, चिकित्सा शिविर लगा छठव्रतियों की लगी भारी भीड़ नालंदा : बड़गांव पौराणिक सूर्यपीठ है. यहां आयोजित चार दिवसीय कार्तिक छठ मेला में बिहार के अलावे कई राज्यों से छठव्रती बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं. बुधवार को दर्जनों जापानी टूरिस्टों ने भी इस […]

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आयोजन. जापानी टूरिस्टों ने भी इस मेले का भ्रमण कर आनंद लिया, चिकित्सा शिविर लगा

छठव्रतियों की लगी भारी भीड़
नालंदा : बड़गांव पौराणिक सूर्यपीठ है. यहां आयोजित चार दिवसीय कार्तिक छठ मेला में बिहार के अलावे कई राज्यों से छठव्रती बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं. बुधवार को दर्जनों जापानी टूरिस्टों ने भी इस मेले का भ्रमण कर आनंद लिया. मेला क्षेत्र में आम वाहनों का प्रवेश वर्जित गिया गया है, लेकिन प्रशासनिक वाहनों के आवागमन को इस रोक से मुक्त रखा गया. फलस्वरूप छठव्रतियों और सूर्य उपासकों को थोड़ी ही राहत मिली. सूर्य तालाब के पास अस्थायी महिला थाना, कंट्रोल रूम, चिकित्सा शिविर बुधवार से काम करना आरंभ कर दिया. पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार पोरिका ने बड़गांव मेले का बुधवार को मुआयना किया.
इस अवसर पर राजगीर के डीएसपी संजय कुमार और थानाध्यक्ष प्रभा कुमारी को और बेहतर विधि व्यवस्था संधारण के निर्देश दिए. एसपी ने कहा कि मेला में सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं. इसके लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस पदाधिकारी पुलिस सशस्त्र और लाठी बल तथा महिला बल को मेला में ड्यूटी पर तैनात किया गया. बड़गांव छठ मेले में लोहंडा के दिन हजारों नर-नारियों और बच्चों ने कष्टी दिया. पवित्र सूर्य तालाब में स्नान करने के बाद पुरुष और महिलाएं जमीन पर लेटते हुए सूर्य मंदिर तक गये. कष्टी देने वालों ने भगवान सूर्य को नमन करते हुए अपने कष्टों को दूर करने और मनोकामना सिद्धि की विनती की.
शोभा की वस्तु बनी स्ट्रीट लाइट:
नालंदा प्रवेश द्वार से लेकर बड़गांव तक सड़क के किनारे सोडियम वेपर लाइट लगाये गये हैं. यह सोडियम वेपरलाइट वर्षों से डेड है. फलस्वरूप यह रोशनी फैलाने की जगह अंधेरा फैला रहे हैं. छठ मेले को लेकर आयोजित बैठक जिला पदाधिकारी द्वारा डेड सोडियम वेपर लाइट को जलाने का निर्देश दिया गया था, लेकिन मेला शुरू होने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो सकी है .
तंबुओं का नगर बना बड़गांव :
सुप्रसिद्ध सूर्य तीर्थ बड़गांव में बिहार, बंगाल, उत्तर प्रदेश, झारखंड आदि राज्यों के छठव्रती हजारों की संख्या में आते हैं, यहां चार दिनों तक रहकर भी सूर्य की उपासना आराधना पूजन प्रदान करते हैं, लेकिन इन छठव्रतियों को ठहरने के लिए बड़गांव में कोई धर्मशाला नहीं है. फलस्वरुप दूरदराज, दूसरे जिलों और प्रदेशों से आये हुए छठव्रती खुले आसमान के नीचे तंबू बनाकर रहने के लिए विवश है. जिससे बड़गांव तंबू के नगर में तब्दील हो गया है.
सभी घाटों पर चेजिंग रूम की व्यवस्था : बिहारशरीफ. आस्था का महापर्व छठ की तैयारी को फाइनल टच दे दिया गया है. सुरक्षा के लिये प्रमुख घाटों पर गोताखोर व नाव की व्यवस्था की गयी है. आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट कर दिया गया है. खतरनाक घाटों पर बेरिकेटिंग की गयी है.
खतरनाक घाटों पर अफसरों को चौकस रहने को कहा गया है. गहरे पानी में लोगों को नहीं उतरने की अपील प्रशासन ने की है. किसी तरह की परेशानी होने पर जिला कंट्रोल रूम के फोन नंबर 06112 -235288 सूचना दे सकते हैं. इसके साथ ही जिले के वरीय अधिकारियों को सूचना दे सकते हैं. जिले व शहर के सभी प्रमुख घाटों पर सफाई से लेकर बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था कर दी गयी है. शहरी क्षेत्र में नगर निगम की व्यवस्था है. जिले में बड़गांव व औंगारीधाम प्रसिद्ध स्थल है,
जबकि शहर में दस प्रमुख घाट है. जिस पर लोग पर्व में अर्घ देते हैं. घाटों पर प्रकाश की व्यवस्था के लिये मरकरी, हेलोजन, जेनेरेटर की व्यवस्था की गयी है. आवागमन मार्ग से लेकर घाट के आसपास प्रकाश की व्यवस्था करने के लिये हर घाट पर पास दो-दो जेनेरेटर की व्यवस्था भी की गयी है. व्रतियों की सुविधा के लिये हर घाट पर अस्थायी चेजिंग रूम बनाय गये हैं.
नगर निगम के प्रयास से बैंकों के सहयोग से हर घाट पर चेजिंग रूम बनाया गया है. जिस घाट पर ज्यादा पानी है वहां बैरेकेटिंग की गयी है. शहर के सूर्य मंदिर घाट सोहसराय 06,बसारबिगहा घाट 05, बाबा मणिराम अखाड़ा घाट 12, रामचंद्रपुर शिवपुरी घाट 06, धनेश्वर घाट के 03, आशानगर धोबी टोला घाट 02, इमादपुर 06 घाट, लोहगानी घाट 02, बिहार क्लब घाट 06 चेजिंग रूम बनाये गये हैं.
खरना प्रसाद के साथ उपवास शुरू: राजगीर. सूर्य उपासना के चार दिवसीय महापर्व के दूसरे दिन छठ व्रती माताओं ने भगवान भाष्कर को भोग लगाने के बाद खरना का प्रसाद ग्रहण किया. इसके साथ ही दो दिनों तक चलने वाला निर्जला उपवास शुरू हो गया. अब छठव्रती शुक्रवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर प्रसादी व अन्य जल ग्रहण करेंगे.
गुरुवार की शाम डूबते हुए सूर्य को व शुक्रवार की सुबह उदयमान होते हुए भगवान भष्कार को अर्घ्य दिया जायेगा. खरना के दिन छठव्रती माताओं ने चना दाल चावल, दूध, पिठा आदि का प्रसाद बनाकर भगवान भाष्कर का भोग लगाया. उसके बाद स्वयं प्रसादी ग्रहण कर घर परिवार, टोला, मोहल्ला संगे संबंधियों और पास पड़ोस और मित्रों को छठ का प्रसादी ग्रहण कराया. शुद्धता के रूप में प्रसिद्ध हिंदू धर्म का यह सबसे महान पर्व माना जाता है. राजगीर में छठ पूजा को लेकर सूर्य कुंड में छठव्रती माताओं और उनके परिजनों का भारी भीड़ उमड़ता है. इस भीड़ को नियंत्रित करने, व्रतियों को हर परेशानी से बचाने और उनकी सुविधा का ख्याल रखने के उद्देश्य से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और एनएसयूआई के द्वारा यहां प्रत्येक वर्ष की तरह सेवा शिविर,
चिकित्सा शिविर और खोया पाया कैंप लगाया गया है.वहीं प्रशासन की ओर से यहां चेजिंग रूम और सुरक्षा का पुख्ता इंतेजाम छठ घाटों पर किया गया है. सूर्य कुंड के अलावा यहां के पौराणिक वैतरणी घाट, झुनकी बाबा के तालाब, हसनपुर तालाब में हसनपुर गांव के लोगों द्वारा साफ-साफाई घाटों की मरम्मत व बिजली, पानी की व्यवस्था की गयी है.
तालाब के पानी से नहीं बना लोहंडा का प्रसाद
पौराणिक सूर्य तालाब के पानी से पहले लोहंडा समेत छठ के सभी प्रसाद बड़गांव में बनाये जाते थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ. इसके बारे में बताया जाता है कि तालाब का पानी बहुत गंदा है. वह न तो पीने लायक है और ना ही भोजन बनाने लायक. गंदे जल के कारण प्रसाद बनाने के काम में इस पानी का उपयोग नहीं किया जा सका है.
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