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तकनीक में अटका जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र

Updated at : 02 Jul 2024 8:31 PM (IST)
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तकनीक में अटका जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र

नये साफ्टवेयर का झंझट, मृत्यु के साथ जन्म लेने वालों बच्चों का नहीं बन रहा सर्टिफिकेट, 500 से अधिक आवेदन लंबित

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वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर शहरी क्षेत्र में मृत्यु होने वाले लोगों के साथ सरकारी व प्राइवेट अस्पताल में जिन बच्चों का जन्म हो रहा है, उनका सर्टिफिकेट बनना इन दिनों बंद हो गया है. 06 जून के बाद एक भी मृत्यु व जन्म लेने वाले बच्चों का 21 दिनों के भीतर सर्टिफिकेट नहीं बन पाया है. यही नहीं, जन्म के 21 दिनों के बाद पेरेंट्स के शपथ पत्र के आधार पर जो सर्टिफिकेट बनता है. इसकी भी गति काफी धीमी है. इससे लोगों को बड़ी परेशानी हो रही है. 500 से अधिक जन्म व 100 के आसपास मृत्यु सर्टिफिकेट लंबित हो गया है. बड़ी संख्या में लोग रोजाना नगर निगम के जन्म-मृत्यु शाखा पहुंचते हैं, लेकिन जिस ऑनलाइन सॉफ्टवेयर के माध्यम से सर्टिफिकेट बनता है, उसके काम नहीं करने के कारण लोगों को बैरंग लौट जाना पड़ता है. बॉक्स :: नये सॉफ्टवेयर से परेशानी, डीएम को लिखा गया है पत्र बताया जाता है कि जिस सॉफ्टवेयर के माध्यम से जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र बनता है, उसमें बदलाव किया गया है. जिस व्यक्ति के मृत्यु के सर्टिफिकेट के लिए आवेदन जमा होता है. नया सॉफ्टवेयर उसके माता-पिता व दो गवाह, पहचान का आधार कार्ड मांगता है. कम उम्र वालों का तो मिल जा रहा है, लेकिन बुजुर्ग की मौत के बाद उनके माता-पिता का आधार कार्ड देना मुश्किल है. इससे उनका सर्टिफिकेट लंबित पड़ जा रहा है. नगर निगम के अनुसार, सांख्यिकी विभाग पत्राचार कर जिलाधिकारी के माध्यम से इसे ठीक कराने में जुटा है. जल्द सुधार की उम्मीद है. बॉक्स :: पार्षदों को सबसे ज्यादा मिल रही शिकायत वार्ड स्तर पर जन्म व मृत्यु सर्टिफिकेट नहीं बनने की शिकायत सबसे ज्यादा पार्षदों को मिलती है. हालांकि, 06 जून को प्रस्तावित नगर निगम बोर्ड की मीटिंग में पार्षद इस मुद्दे को उठा सकते हैं. बता दें कि नगर निगम से अभी 30-50 के बीच जन्म व 05-07 मृत्यु सर्टिफिकेट के लिए रोजाना आवेदन होता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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