सिविल सेवा परीक्षा में 'संस्कृत साहित्य' बना सफलता का शॉर्टकट, कम समय में दिलाता है रिकॉर्ड अंक

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डॉ.अर्चना तिवारी | Prabhat Khabar Network

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UPSC और BPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में संस्कृत साहित्य एक शक्तिशाली रणनीतिक माध्यम बन रहा है. जानिए कैसे यह विषय आपको गणितीय सटीकता, सीमित सिलेबस और कम कंपटीशन के साथ शीर्ष रैंक दिला सकता है.

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Sanskrit Literature Strategy: देश की सबसे प्रतिष्ठित संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षाओं में 'संस्कृत साहित्य' केवल एक भाषा नहीं, बल्कि सफलता का एक बेहद शक्तिशाली और रणनीतिक माध्यम साबित हो रहा है. इस संबंध में एमएमडीडीएम कॉलेज की सहायक प्राचार्य डॉ. अर्चना तिवारी कहती हैं कि पिछले कई सालों के परिणाम गवाह हैं कि इस विषय को चुनकर कई अभ्यर्थियों ने हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों से शीर्ष रैंक हासिल की है. सिविल सेवा में जहां वैकल्पिक विषय अंतिम मेरिट लिस्ट (500 अंक) बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है, वहीं बीपीएससी के बदलते पैटर्न (300 अंक) में भी संस्कृत जैसा विश्लेषणात्मक विषय बेहद कारगर साबित हो रहा है.

प्रशासनिक परीक्षाओं में संस्कृत चुनने के 5 बड़े रणनीतिक फायदे

  • गणितीय सटीकता और उच्चतम अंक: मानविकी के अन्य विषयों की तुलना में संस्कृत की प्रकृति पूरी तरह वैज्ञानिक है. परीक्षा में संधि, समास, कारक और शब्द-रूप/धातु-रूप से जुड़े सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं. यदि उत्तर सही है, तो गणित की तरह 100 फीसदी अंक मिलते हैं. छात्र आसानी से 500 में से 300 से अधिक अंक हासिल कर लेते हैं.
  • सबसे छोटा और निश्चित पाठ्यक्रम: संस्कृत साहित्य का सिलेबस बेहद सीमित और स्पष्ट है. इसमें कालिदास के 'अभिज्ञानशाकुंतलम्', भारवि के 'किरातार्जुनीयम्' और भगवद्गीता जैसे चुनिंदा ग्रंथों के विशिष्ट अंश ही पढ़ने होते हैं. इस पूरे पाठ्यक्रम को 3 से 4 महीनों में तैयार किया जा सकता है.
  • करंट अफेयर्स का कोई झंझट नहीं: अन्य विषयों की तरह इसमें परीक्षा के दिन तक नई रिपोर्ट या नीतियां अपडेट करने की जरूरत नहीं होती है. संस्कृत पूरी तरह से एक 'स्थिर विषय' है. एक बार अच्छे नोट्स बन जाने के बाद छात्रों को केवल रिवीजन और उत्तर लेखन का अभ्यास करना होता है.
  • कम कंपीटीशन और सीधा पैटर्न: इस विषय को चुनने वाले छात्रों की संख्या कम (100 से 150) होने से परीक्षकों के पास कॉपी को ध्यान से देखने की संभावना रहती है. पिछले 5 से 10 सालों के प्रश्नपत्रों के विश्लेषण से पता चलता है कि लगभग 70-80 फीसदी प्रश्न सीधे तौर पर दोहराए जाते हैं.
  • जीएस और निबंध में अप्रत्यक्ष लाभ: इसका ज्ञान जीएस पेपर-1 (कला एवं संस्कृति), जीएस पेपर-4 (नीतिशास्त्र) और निबंध लेखन में प्रासंगिक श्लोकों व सूक्तियों के प्रयोग के जरिए 10 से 15 अतिरिक्त अंक दिलाने में बहुत मददगार साबित होता है.

मिथक बनाम हकीकत: स्कूली संस्कृत जानने वाले भी हो सकते हैं सफल

कई छात्रों में यह भ्रम रहता है कि पूरा पेपर संस्कृत में ही लिखना होता है. जबकि हकीकत यह है कि यूपीएससी के नियमों के अनुसार, दोनों पेपरों में केवल कुछ अनिवार्य प्रश्नों (लगभग 20-30%) के उत्तर ही संस्कृत में देने होते हैं, बाकी के उत्तर उम्मीदवार अपनी चुनी हुई भाषा (हिंदी या अंग्रेजी) में लिख सकते हैं. इसलिए बेसिक स्कूली संस्कृत जानने वाले भी थोड़ी मेहनत से इसमें महारत हासिल कर सिविल सेवा क्रैक कर सकते हैं. 

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Vinay Kumar

लेखक के बारे में

By Vinay Kumar

I am working as a deputy chief reporter at Prabhat Khabar muzaffarpur. My writing focuses on political, social, and current topics.

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