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Coronavirus School: कोरोना संकट काल में इस शहर के कई छोटे स्कूल बिक गये, तो कुछ पर लग गया ताला, शिक्षकों ने बदला पेश

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
स्कूल बंद होने से अभिभावक बच्चों की फीस जमा नहीं कर रहे थे.
स्कूल बंद होने से अभिभावक बच्चों की फीस जमा नहीं कर रहे थे.
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मृत्युंजय: कोरोना के कारण बीते पांच माह से स्कूल बंद हैं. इसका बड़ा असर निजी स्कूल के संचालकों पर पड़ा है. बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के शेरपुर इलाके में एक निजी स्कूल के संचालक ने अपना स्कूल शहर के बड़े स्कूल संचालक को बेच दिया. कोरोना महामारी की वजह से लगाये गये लॉकडाउन की वजह से स्कूल बंद था. स्कूल बंद होने से अभिभावक बच्चों की फीस जमा नहीं कर रहे थे. फीस न आने से शिक्षकों को वेतन देना भी मुश्किल था. मकान मालिक भाड़ा का दबाव बना रहे थे सो अलग. संचालक के पास यही एक रास्ता बचा था, क्योंकि स्कूल चलाना मुमकिन नहीं रह गया था. स्कूल में 300 छात्र थे.

स्कूल बेचने के समय यह शर्त रखी गयी कि छात्र और स्कूल भी नये स्कूल रखेंगे. कोरोना काल में छोटे और मध्यम निजी स्कूलों की दयनीय हालत का एक उदाहरण नहीं है. मुजफ्फरपुर शहर में बड़ी संख्या में स्कूल या तो बंद हो गये या फिर उन्हें बड़ी पूंजी वाले स्कूलों ने खरीद लिया. जो स्कूल बंद कर दिये गये, उनके शिक्षक व कर्मचारी बेरोजगार हो चुके हैं. चूंकि शहर में किराये के मकान में रहना भी उनके लिए मुश्किल हो रहा तो अधिकतर ने अपने गांव का रुख कर लिया.

कुछ ने पेशा बदल लिया है.केदारनाथ रोड में भी छोटे स्कूल संचालकों ने बड़े स्कूलों के हाथों में स्कूल बेच दिया. स्कूल संचालकों का कहना है कि लॉकडाउन लंबा खिंच रहा था, ऐसे में हमारी माली हालत खराब हो गयी थी. स्कूल को बेचने के सिवाय दूसरा और कोई चारा नहीं था. इसलिए बड़े स्कूलों ने जब संपर्क किया तो हमने स्कूल को बेचना ही मुनासिब समझा.

पूजा पाठ करा घर चला रहे संस्कृत के एक शिक्षक ने बताया कि जब स्कूल की नौकरी नहीं रही तो संस्कृत ज्ञान काम आया. घरों में जाकर पूजा-पाठ कराकर अपना परिवार चला रहे हैं. शहर के बड़े स्कूलों के संचालकों ने बताया कि उनके पास रोज नौकरी के आवेदन आ रहे हैं. यह वो शिक्षक हैं जिनके स्कूल बंद हो गये हैं. शिक्षक कम पैसे में भी काम करने को तैयार हैं.

फीस आनी बंद हो गयी तो स्कूल कर दिया बंद

बालू घाट में छोटे बच्चों का एक स्कूल होली की छुट्टी के बाद नहीं खुल सका. होली की छुट्टी के बाद स्कूल खोला जाना था, तभी लॉकडाउन लग गया. स्कूल की संचालक ने बताया कि हमारे यहां 200 छात्र थे. इनमें ज्यादातर छात्र गरीब परिवारों के थे. पहली से छठी तक की पढ़ाई होती थी. स्कूल में 12 शिक्षक थे. इनकी तनख्वाह पांच से छह हजार रुपये तक थी. लाॅकडाउन लगने के बाद फीस आनी बंद हो गयी. इससे शिक्षकों को वेतन भी नहीं दिया जा सका. तंग आकर हमलोगों ने स्कूल को बंद कर दिया.

पहले पढ़ाते थे, अब गांव में बैठे हैं

बंद हुए स्कूलों के शिक्षकों ने कहा कि स्कूल बंद हो जाने से वे अभी खाली हैं. पैसे नहीं थे, तो अपने गांव चले आये. शहर में किराये के मकान में रहते थे. किराया कहां से देते. इसलिए पूरे परिवार के साथ गांव चले आये.

देश भर में 1000 बड़े स्कूल बिक्री के कगार पर

सेरेस्ट्री वेंचर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश भर में नर्सरी से लेकर 12वीं तक के करीब 1000 स्कूल बिक्री के कगार पर खड़े हैं. ये ऐसे स्कूल हैं, जिनकी सालाना फीस करीब 50 हजार रुपये है. स्कूल संचालक अपने भवन बेचने की तैयारी कर रहे हैं.

Posted By: Utpal kant

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