Cyber Fraud: आपका पर्सनल डाटा हो रहा लीक, हो सकते हैं ठगी के शिकार, जानें बचाव के उपाय
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 28 Dec 2024 9:14 PM
साइबर क्राइम (प्रतीकात्मक फोटो)
Cyber Fraud: डिजिटल अरेस्ट के तरीकों से मुजफ्फरपुर से करोड़ों रुपयों की ठगी की गयी है. मिठनपुरा की एक महिला से तो 60 लाख ठग लिए गए. आइये जानते हैं साइबर एक्सपर्ट ने इससे बचने के क्या उपाय बताया.
Cyber Fraud: साइबर ठगी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए प्रभात खबर ने शनिवार को चैंबर ऑफ कॉमर्स में साइबर जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया. इसमें हर उम्र के विभिन्न क्षेत्रों के लोग शामिल हुए. साइबर एक्सपर्ट अनिकेत पीयूष ने लोगों को साइबर ठगी के कई तरीकों से अवगत कराया और उससे बचने के उपाय बताएं. उन्होंने पीपीटी प्रेजेंटेशन के माध्यम से देश के विभिन्न भागों के अलावा मुजफ्फरपुर में हो रहे साइबर फ्रॉड के कई उदाहरण बताया. अनिकेत पीयूष ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट के तरीकों से मुजफ्फरपुर से करोड़ों रुपयों की ठगी की गयी है. मिठनपुरा की एक महिला से तो 60 लाख ठग लिए गए.
डिजिटल अरेस्ट ठगी का नया तरीका, सतर्क रहे
एक्सपर्ट अनिकेत पीयूष ने कहा कि इन दिनों साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट एक नया तरीका निकाला है. इसमें किसी को फोन कर कहा जाता है कि आपका बेटा या रिश्तेदार रेप केस में फंस गया है या आपका मोबाइल नंबर या कागजात गैरकानूनी कार्य में शामिल है या आपका मोबाइल नंबर बंद होने वाला है. आप 9 नबर को दबाएं. जैसे ही आप नंबर को दबाते हैं तो फिर आपका मोबाइल किसी दूसरे फोन से कनेक्ट हो जाता है. फिर आपसे कहा जाता है कि आपको वीडियो कॉल जा रहा है, उसे उठाएं. वीडियो कॉल पर एक पुलिस अधिकारी के वेश में व्यक्ति रहता है. वह आपको कहता है कि आप पर केस हो चुका है और वारंट निकल चुका है. विभिन्न स्टेट के वारंट की कॉपी भी आपके व्हाट्सएप पर भेज दी जाती है और इसके समझौते के लिए रुपयों की मांग की जाती है. इसमें अधिकतर लोग डर के कारण फंसते हैं और अपनी जमा-पूंजी उसके बताए गए नंबर पर ट्रांसफर कर देते हैं. अब तक पूरी दुनिया में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानून नहीं है. जब भी इस तरह का फोन आए, डरे नहीं और फोन काट दें और इसकी शिकायत 1930 पर करें

कार्यशाला में शामिल 11 व्यक्ति का लीक मिला इमेल नंबर
एक्सपर्ट ने लोगों को बताया कि आप गूगल क्राेम से haveibeenpwned.com साइट खोलें और उसमें अपना ईमेल नंबर लिख कर प्रोसेस करें. एक्सपर्ट के सुझाव के अनुसार जब लोगों ने अपना ईमेल चेक किया तो उसमें 11 लोगों का इमेल लीक पाया गया. अनिकेत पीयूष ने बताया कि आपका ईमेल लीक होने के कारण आपने या आपके परिवार में किसी ने आपके मोबाइल से किसी तरह का सोशल साइट्स का इस्तेमाल किया होगा, उसमें आपका ईमेल नंबर डालना होगा. उस साइट से आपका डाटा चोरी हो गया है. ऐसी स्थिति में आप कभी भी साइबर ठग का शिकार हो सकते हैं. इससे बचने का एक ही उपाय है कि आप किसी तरह के फोन से घबराएं नहीं. फोन आने पर साइबर सेल में शिकायत करें.बैंक और सोशल साइट्स पर रखें अलग ईमेल रखें. जो ईमेल बैंक में आपने दिया है या जो मोबाइल नंबर आपके अकाउंट में दर्ज है. उसका इस्तेमाल सोशल साइट्स पर नहीं करें.
एक छोटा मोबाइल रखे, जिस पर ओटीपी आए
एक्सपर्ट ने लोगों को सलाह दी गयी कि घर में एक छोटा मोबाइल रखें, जिसमें बैंक में दिए गए मोबाइल नंबर का सिम लगा हो. इस फोन को घर में रखे. अगर आपका स्मार्ट फोन गुम भी हो गया तो कोई आपके अकाउंट से रुपया का ट्रांसफर नहीं कर पाएगा. यदि आपके स्मार्ट फोन में ही वह नंबर लगा होगा तो ओटीपी भी उसी पर आएगा. हैकर के हाथ में मोबाइल लगने पर आपका अकाउंट खाली हो जाएगा.
आपके आधार से कितना सिम निर्गत हुआ, इसकी जांच करें
एक्सपर्ट ने लोगों को बताया गया कि sancharsathi.com खोलें. फिर नीचे से चौथे नंबर पर know your mobile connection पर जाएं. इसे क्लिक करें. फिर अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें. अपना ईमेल दर्ज करें और कैप्चा लिखें. इसे क्लिक करें. आपके आधार से जितना भी सिम निर्गत हुआ है, उसका नंबर आपके सामने आ जाएगा. यदि वह सिम आप इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो नॉट माइ नंबर सेलेक्ट करें उसे क्लिक करें. कुछ ही दिनों बाद जो भी व्यक्ति उस सिम का इस्तेमाल कर रहा होगा, उसके पास केवाईसी कराने का मैसेज जाएगा और आपके आधार से सिम हट जाएगा.
लोगों को बताया गया स्क्रीन टाइम चेक का तरीका
कार्यशाला में लोगों को बताया गया कि वे रोज मोबाइल पर कितना समय देते हैं, इसे चेक करें और फिर यह निर्णय लें कि इतना समय मोबाइल पर देना जरूरी है क्या. एक्सपर्ट अनिकेत पीयूष ने कहा कि आप अपने मोबाइल के सेटिंग पर जाएं.वहां Digital wellbeing and parental controls को क्लिक करें. यहां आपको पता चल जाएगा कि आप फोन और सोशल साइट्स पर रोज कितना समय देते हैं.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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