मुजफ्फरपुर: लागत पूंजी निकालना भी हुआ मुश्किल, बंदरा में सड़कों पर आलू फेंक रहे किसान

Published by : सुनील कुमार सिंह Updated At : 01 Jun 2026 8:10 AM

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खेत व सड़कों पर फेंके गये आलू

Muzaffarpur News: बंदरा में मंडी और कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था न होने से आलू उत्पादक किसान बेहाल हैं. खरीदार नहीं मिलने और भीषण गर्मी के कारण आधा से अधिक आलू सड़ रहा है, जिसे किसान फेंकने को मजबूर हैं. जानिए पूरी खबर…

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मुजफ्फरपुर के बंदरा से सूर्यमणि कुमार की रिपोर्ट

Muzaffarpur News: जिले के बंदरा प्रखंड के आलू उत्पादक किसानों को इस बार भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. कड़ी मेहनत और भारी लागत से उपजाई गई आलू की फसल खेतों और घरों में पड़े-पड़े सड़ रही है. हालत यह है कि किसानों को अपने सड़ रहे आलुओं को मजबूरन सड़कों और गड्ढों में फेंकना पड़ रहा है, जिससे इलाके के किसानों में मायूसी छा गई है.

महंगे खाद-बीज से की खेती, अब नहीं मिल रहे खरीदार

रामपुरदयाल के किसान रौशन कुशवाहा, तेपरी के मनीष ठाकुर और राजेश कुमार ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि इस कमरतोड़ महंगाई के दौर में खेती करना बेहद मुश्किल हो गया है. महंगे दाम पर खाद और बीज खरीदकर दिन-रात मेहनत करने के बाद आलू की पैदावार तो ठीक-ठाक हुई थी, लेकिन अब बाजार में इसका कोई खरीदार नहीं मिल रहा है. अगर कोई व्यापारी आ भी रहा है, तो वह औने-पौने दाम लगा रहा है, जिससे लागत पूंजी भी निकलना नामुमकिन लग रहा है.

मंडी और कोल्ड स्टोरेज न होने से 50 फीसदी फसल बर्बाद

आलू उत्पादकों ने बताया कि दाम बढ़ने की उम्मीद में उन्होंने कुछ आलू कोल्ड स्टोरेज में रखे थे और कुछ हिस्सा घरों में बचाकर रखा था. मगर अब भीषण गर्मी के कारण घरों में रखा करीब 50 फीसदी आलू सड़ने के कगार पर पहुंच गया है. रोज आलू को छांटकर फेंकना पड़ रहा है. किसानों का कहना है कि बंदरा क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर सरकारी मंडी या पर्याप्त भंडारण (कोल्ड स्टोरेज) की व्यवस्था नहीं होने से उन्हें हर साल इस दोहरी मार को झेलना पड़ता है. अगर यही स्थिति रही, तो आने वाले दिनों में किसानों के लिए खेती करना पूरी तरह असंभव हो जाएगा.

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सुनील कुमार सिंह

लेखक के बारे में

By सुनील कुमार सिंह

सुनील कुमार सिंह प्रभात खबर मल्टीमीडिया में डिप्टी चीफ रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। क्राइम और राजनीति से जुड़ी खबरों पर उनकी मजबूत पकड़ है। वे निष्पक्ष रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण के लिए जाने जाते हैं, जिससे पाठकों को सटीक और भरोसेमंद जानकारी मिलती है।

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