Muzaffarpur: चमकी बुखार ने बदला रूप, अब दिमाग के साथ लीवर-किडनी पर भी असर

Published by :Aniket Kumar
Published at :04 May 2026 11:47 AM (IST)
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Muzaffarpur News aes disease new pattern ammonia level skmch

पीड़ित बच्चों की जांच करती डॉक्टरों की टीम

Muzaffarpur News: एईएस ने बदला रूप, अब केवल दिमाग नहीं बल्कि लीवर-किडनी पर भी असर. SKMCH रिपोर्ट में अमोनिया स्तर बढ़ने का खुलासा. हाइपोग्लाइसीमिया ही वजह नहीं, डॉक्टरों ने इलाज और जांच की नई रणनीति अपनाई है. पढे़ं पूरी खबर…

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Muzaffarpur News: बिहार में हर साल बच्चों के लिए खतरा बनकर सामने आने वाली एईएस (चमकी बुखार) अब पहले से ज्यादा खतरनाक रूप लेती दिख रही है. इस बार डॉक्टरों ने इसके लक्षणों में बड़ा बदलाव देखा है, जिससे चिंता और बढ़ गई है. मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SKMCH) में बच्चों के इलाज के दौरान सामने आया है कि अब यह बीमारी सिर्फ दिमाग तक सीमित नहीं रह गई है. डॉक्टरों के मुताबिक, कई बच्चों में लीवर और किडनी पर भी असर देखा जा रहा है. साथ ही शरीर में अमोनिया और प्रोटीन का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ा हुआ मिल रहा है.

ये है मुख्य वजह

अब तक माना जाता था कि चमकी बुखार की मुख्य वजह खून में शुगर की कमी यानी हाइपोग्लाइसीमिया है, लेकिन इस बार कुछ बच्चों में शुगर सामान्य होने के बावजूद बेहोशी और झटके जैसे लक्षण दिखे. जांच में पता चला कि इन बच्चों के शरीर में अमोनिया का स्तर काफी ज्यादा था, जो सीधे दिमाग पर असर डाल रहा है. इससे सूजन और बेहोशी की स्थिति बन रही है.

संदिग्ध बच्चे का अमोनिया टेस्ट जरूरी

डॉक्टरों ने अब एहतियात के तौर पर पीआईसीयू में भर्ती हर संदिग्ध बच्चे के लिए अमोनिया टेस्ट जरूरी कर दिया है. विभागाध्यक्ष डॉ. गोपाल शंकर सहनी के अनुसार, जब लीवर शरीर के टॉक्सिन्स को साफ नहीं कर पाता, तब अमोनिया बढ़ता है. इसलिए इलाज अब सिर्फ दिमाग नहीं, बल्कि पूरे शरीर के मेटाबोलिक संतुलन को ध्यान में रखकर किया जा रहा है.

2012 में 400 बच्चे हुए थे पीड़ित

बता दें कि एईएस पहली बार 2010 में गंभीर रूप से सामने आया था. 2012 में करीब 400 बच्चे इसकी चपेट में आए थे, जिनमें 220 की मौत हो गई थी. देश-विदेश के वैज्ञानिकों ने इस पर रिसर्च की, जिसमें हाइपोग्लाइसीमिया और कुपोषण को मुख्य वजह माना गया. इसके बाद जागरूकता अभियान चलाए गए, जिससे मौत के मामलों में कमी आई. विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार बीमारी का बदला हुआ रूप नई चुनौती बन सकता है. ऐसे में बच्चों के खानपान, पोषण और समय पर इलाज को लेकर और सतर्क रहने की जरूरत है.

मुजफ्फरपुर से वरिय संवाददाता की रिपोर्ट

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Aniket Kumar

लेखक के बारे में

By Aniket Kumar

अनिकेत बीते 4 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. राजस्थान पत्रिका और न्यूजट्रैक जैसे मीडिया संस्थान के साथ काम करने का अनुभव. एंटरटेनमेंट, हाईपरलोकल और राजनीति की खबरों से अधिक जुड़ाव. वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ कार्यरत.

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