मुजफ्फरपुर में गंदे पानी की झील बन गयी मोतीझील, सुरक्षा की नहीं है कोई व्यवस्था

मुजफ्फरपुर में कल्याणी-मोतीझील से धर्मशाला व हरिसभा चौक के इलाके को व्यावसायिक हब के साथ शहर का हृदयस्थली कहा जाता है लेकिन यहां की स्थिति ऐसी बनी हुई है की इसे हृदयस्थली कहना बेमानी होगा.
मुजफ्फरपुर में कल्याणी-मोतीझील से धर्मशाला व हरिसभा चौक के इलाके को व्यावसायिक हब के साथ शहर का हृदयस्थली कहा जाता है. यहां 1500 से ज्यादा हर तरह की शो-रूम व दुकानें हैं. इनमें कपड़ा, मोबाइल, जूता-चप्पल, शृंगार के साथ किताब-कॉपी की सबसे ज्यादा दुकानें हैं. 15-20 हजार लोग सीधे रोजगार से जुड़े हैं. व्यवसाय की बात करें तो रोजाना 15-20 करोड़ का कारोबार है. लेकिन, वर्तमान में जो स्थिति बनी हुई है, इससे इन इलाके को शहर की हृदय स्थली कहना बेमानी होगी. कारण कि मोतीझील की सड़कें जर्जर हैं.
बीबी कॉलेजिएट स्कूल के सामने बिना बारिश इस भीषण गर्मी में भी जलजमाव की समस्या बनी हुई है. लंबे समय से पानी सड़क पर जमा होने के कारण अब उसका रंग काला हो गया है. बदबू के कारण राहगीरों को गुजरना मुश्किल है. डीआरबी मॉल, बीबी कॉलेजिएट गली की सड़क कुछ दूर तक काफी जर्जर है. पार्किंग की व्यवस्था नहीं है.
नगर निगम की ओर से मोतीझील के दुकानदारों व ग्राहकों के लिए ब्रिज के नीचे व बम पुलिस गली में पार्किंग का निर्माण कराया गया. 10 लाख से अधिक रुपये भी खर्च हुए. लेकिन, अतिक्रमण करने वाले फुटपाथी दुकानदार इस कदर पार्किंग एरिया को कब्जा कर रखे हैं कि वहां एक भी बाइक खड़ा करना मुश्किल है. कोई अगर बाइक लगा भी देता है, तो सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है. निगम की तरफ से सुरक्षा को लेकर कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया है.
कल्याणी-मोतीझील का इलाका वार्ड नंबर 23 व 24 में पड़ता है. हरिसभा चौक के दूसरे तरफ वार्ड नंबर 35 का इलाका है. ऐसे में तीन-तीन वार्ड में पड़ने वाले शहर के इस व्यावसायिक हब की समस्याओं में सुधार नहीं होना अपने आप में सवाल खड़ा करता है. यही नहीं, इन तीनों वार्ड को मिला दें तो निगम को हर साल डेढ़ करोड़ से ज्यादा टैक्स सिर्फ होल्डिंग शुल्क से आता है. पार्किंग, विज्ञापन सहित अन्य मदों से जो आमदनी होती है, वह अलग. इसके अलावा सरकार को जीएसटी, सर्विस टैक्स आदि के नाम पर भी कई करोड़ रुपये की आमदनी इन इलाके से हर महीने होती है.
देश का पहला ओवरब्रिज मोतीझील का होगा, जहां गाड़ियों की पार्किंग होती है. चाय-नाश्ता, गोलगप्पा व फास्ट-फूड की दुकानें भी खूब सजती हैं. इससे हमेशा ब्रिज पर जाम की समस्या रहती है. इतना ही नहीं, बम पुलिस गली में खाली जमीन पर निगम ने बीते साल पार्किंग का निर्माण कराया था. लाखों रुपये खर्च कर घेराबंदी करायी गयी थी, लेकिन वह पार्किंग एरिया आसपास के दुकानदारों के सामान रखने एवं निगम के सफाई वाहनों को खड़ा करने का प्वाइंट बन कर रह गया है. इससे मोतीझील में पार्किंग समस्या का समाधान होना कभी संभव नहीं है.
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By Prabhat Khabar News Desk
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