शोध के मौजूदा अंतराल को पाटने में सहायक साबित हो सकता एआइ
Updated at : 14 Sep 2024 7:49 PM (IST)
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शोध के मौजूदा अंतराल को पाटने में सहायक साबित हो सकता एआइ
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मुजफ्फरपुर
. एमआइटी में आयोजित दो दिवसीय आइएसटीइ सेक्शन फैकल्टी कन्वेंशन और “तकनीकी शिक्षा में प्रत्यायन की भूमिका पर आधारित राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन शनिवार को हो गया. इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आये विशेषज्ञों ने तकनीकी शिक्षा में प्रत्यायन (एक्रेडिटेशन) की आवश्यकता व उसकी महत्ता पर चर्चा की. केंद्रीय विश्वविद्यालय, झारखंड के ऊर्जा इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर व प्रमुख डॉ संजय समदर्शी ने व्याख्यान दिया. सोलर फोटो एक्टिव मटेरियल व सोलर कुकिंग सिस्टम के विकास, उनके अनुप्रयोग व प्रदर्शन मूल्यांकन के विभिन्न पहलुओं पर गहन जानकारी दी. उन्होंने नवीनतम थर्मो फोटोएक्टिव मैकेनिज्म व फोटो इलेक्ट्रोकेमिकल वॉटर स्प्लिटिंग के सिद्धांतों पर भी चर्चा की. कहा कि यह सौर ऊर्जा क्षेत्र में अहम तकनीकी बदलाव ला सकते हैं. एनआइटी जमशेदपुर की सहायक प्रोफेसर डॉ नम्रता ने “सौर विकिरण का अनुमान व हरित ऊर्जा में इसका योगदान ” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किये. सौर विकिरण के अनुमान की आधुनिक तकनीकों, डेटा संग्रहण व इन प्रक्रियाओं में मशीन लर्निंग (एमएल) व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) के उपयोग पर विशेष जोर दिया. कहा कि मशीन लर्निंग शोध के मौजूदा अंतराल को पाटने में सहायक साबित हो सकती है. समापन सत्र में एमआइटी के प्राचार्य डॉ एमके झा ने मुख्य अतिथि डॉ एमके पासवान का आभार व्यक्त किया. अध्यक्ष डॉ अमरेश राय, डॉ आशीष श्रीवास्तव समेत ने भूूमिका निभायी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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By Prabhat Khabar News Desk
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