ePaper

बचपन के हादसे पर तैयार की सफलता की मंजिल

2 Dec, 2015 10:17 pm
विज्ञापन
बचपन के हादसे पर तैयार की सफलता की मंजिल

बचपन के हादसे पर तैयार की सफलता की मंजिल- पेशे से अध्यापक ओमप्रकाश ने आंखों की रोशनी बिना भरा अपनी बेरंग जिंदगी में रंग- दवा रियेक्शन करने से जन्म के सात साल बाद पूर्णरूप से चली गयी आंखों की रोशनीसंवाददाता, मुजफ्फरपुर सफलता पाने का जुनून हो तो हर मंजिल छोटी लगती है. जिस नि:शक्तता को […]

विज्ञापन

बचपन के हादसे पर तैयार की सफलता की मंजिल- पेशे से अध्यापक ओमप्रकाश ने आंखों की रोशनी बिना भरा अपनी बेरंग जिंदगी में रंग- दवा रियेक्शन करने से जन्म के सात साल बाद पूर्णरूप से चली गयी आंखों की रोशनीसंवाददाता, मुजफ्फरपुर सफलता पाने का जुनून हो तो हर मंजिल छोटी लगती है. जिस नि:शक्तता को समाज के लोग अभिशाप मानते हैं, उसी को हथियार बनाकर ओमप्रकाश चौरसिया ने अपनी बेरंग जिंदगी में रंग भर दिया. उन्होंने बचपन में हुए हादसे से सबक लेकर सफलता का मुकाम हासिल किया़ ओमप्रकाश चौरसिया कांटी क्षेत्र के नरसंडा निवासी दिनेश प्रसाद चौरसिया के इकलौते पुत्र हैं. इनकी आखों की रोशनी महज सात साल की उम्र में ही चली गयी थी. इसके बावजूद वे जिंदगी से उदास नहीं हुए. ओमप्रकाश ने अपनी मंजिल की राह में नि:शक्तता को रोड़ा नहीं बनने दिया. प्राथमिक विद्यालय भगवानपुर यादव टोला में शिक्षक का दायित्व पूरी तरह से निभा रहे ओमप्रकाश ने स्नातक तक शिक्षा ली है. बुधवार को जब उनसे बात की गयी तो उन्होंने बड़ी बेबाकी से हर सवाल का जवाब दिया. नि:शक्तों के प्रति समाज में फैली धारणा पर उन्होंने कहा- नजर बदले तो नजारे बदल जायेंगे, सोच बदले तो सितारे बदल जायेंगे, किश्ती को क्या बदलना यारो, धारों को बदलो तो किनारे बदल जायेंगे़ ओमप्रकाश ने कहा कि बचपन में एक बार तबीयत खराब होने पर उन्हें कांटी में इलाज कराना महंगा पड़ गया. डॉक्टर के इलाज ने उनकी जिंदगी को बेरंग बना दिया. दवा का रियेक्शन हाेने के बाद दो साल तक आंखों की रोशनी बचाने के लिए बहुत इलाज कराया. लेकिन सात साल की उम्र पूरा होते-होते आखों की रोशनी समाप्त हो गयी. इसके बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी. उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और स्नातक की शिक्षा पूरी की. अब वे प्राथमिक स्कूल में शिक्षक के रूप में बच्चों में शिक्षा की ज्योति जला रहे हैं. अपने एक मित्र का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि गोबरसही के पास लगौरा निवासी श्यामलाल के पुत्र कैलाश की आखों में रोशनी जन्म से ही नहीं थी. इसके बावजूद उसने जिंदगी में हार नहीं मानी. दो साल तक दोनों साथ रहे, इसके बाद कैलाश पढ़ाई के लिए दिल्ली चला गया. वर्तमान में पटना के बोरिंग रोड स्थित पंजाब नेशनल बैंक में पीओ हैं.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
विज्ञापन

अपने पसंदीदा शहर चुनें

ऐप पर पढ़ें
Page not found - Prabhat Khabar