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इस्टीमेट बदल ठेकेदार को पहुंचा दिया 73.94 लाख का फायदा

19 Oct, 2015 2:01 am
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इस्टीमेट बदल ठेकेदार को पहुंचा दिया 73.94 लाख का फायदा

मुजफ्फरपुर: इंजीनियरों ने सड़क के इस्टीमेट में फेरबदल का ठेकेदारों को 73.94 लाख रुपये का फायदा पहुंचा दिया. कुढ़नी प्रखंड के गोदनी से बलरा गांव तक सड़क बनाने की जिम्मेवारी वैशाली के छोटी महई स्थित सूरज कंस्ट्रक्शन को दी गई थी. लेकिन, कार्य में ठेकेदारों की उदासीनता और शिथिलता के कारण योजना के इस्टीमेट में […]

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मुजफ्फरपुर: इंजीनियरों ने सड़क के इस्टीमेट में फेरबदल का ठेकेदारों को 73.94 लाख रुपये का फायदा पहुंचा दिया. कुढ़नी प्रखंड के गोदनी से बलरा गांव तक सड़क बनाने की जिम्मेवारी वैशाली के छोटी महई स्थित सूरज कंस्ट्रक्शन को दी गई थी. लेकिन, कार्य में ठेकेदारों की उदासीनता और शिथिलता के कारण योजना के इस्टीमेट में ही फेदबदल करना पड़ा. इस कारण सरकारी कोष को 81.25 लाख रुपये का अनावश्यक बोझ डाल खर्च करा दिया गया.

इंजीनियरों ने काम नहीं कराने वाले ठेकेदारों को प्रोत्साहित करते हुए सरकारी कोष को ही चूना लगा दिया. इंजीनियरों ने यह कारनामा मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत गोदनी से बलरा गांव तक सड़क के उन्नयन कार्य के दौरान किया गया है. इसका खुलासा महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट 2014-15 से हुआ है.

ऑडिट टीम ने अक्तूबर 2012 से सितंबर 2014 तक के कागजात को खंगालने के बाद इस मामले को पकड़ा है. ऑडिट रिपोर्ट में आयी आपत्तियों की लीपापोती में ग्रामीण कार्य विभाग, कार्य प्रमंडल-1 जुट गया है. सरकारी कोष को पहुंचायी 81.25 लाख की क्षति ऑडिट में पाया गया कि सूरज कंस्ट्रक्शन के साथ विभाग ने 15 जून 2007 को 1.09 करोड़ रुपये का एग्रीमेंट किया था. कार्य को प्रारंभ करके बीच में ही काम करने छोड़ दिया गया. निर्माण कंपनी की उदासीनता को देखते हुए दो वर्ष बाद 8 अगस्त 2009 को इस्टीमेट में फेरबदल करना पड़ा. कार्य की महत्ता को देखते हुए बाकी कार्य को पूर्ण करने के लिए संशोधित प्राक्कलन का निर्माण कर उसकी स्वीकृति दी गई. 9 अक्तूबर 2014 को दूसरे संवेदक के साथ इसी कार्य के लिए 1.59 करोड़ रुपये का एग्रीमेंट किया गया. पूर्व के शेष कार्य 78.27 लाख के विरुद्ध 1.59 करोड़ का एग्रीमेंट संशोधित इस्टीमेट बनाकर करना पड़ा. इस कारण सरकारी कोष पर 81.25 लाख रुपये का अनावश्यक बोझ डाल दिया गया. विभागीय नियमानुसार इसकी वसूली पूर्व के संवेदक सूरज कंस्ट्रक्शन से की जानी चाहिए थी. अतिरिक्त व्यय राशि 81.25 लाख रुपये सूरज कंस्ट्रक्शन से वसूल करनी थी. लेकिन वसूली नहीं हुई.2009 से ठेकेदार के पास छोड़ दिया 73.94 लाख विभाग के अधिकारियों ने सूरज कंस्ट्रक्शन की सुरक्षित जमा राशि 7,31, 628 रुपये जब्त कर लिया. शेष राशि 73.94 लाख रुपये संवेदक के पास वर्ष 2009 से पड़ा हुआ है. इसे वसूलने की कोई जहमत नहीं उठायी गई. ऑडिट जांच के दौरान इस एग्रीमेंट से जुड़ा कई कागजात भी विभाग से गायब था. विभाग ने अपनी सफाई दी कि राशि वसूली के लिए कानूनी प्रक्रिया अपनायी जायेगी.

हद तो यह है कि सूरज कंस्ट्रक्शन से ग्रामीण कार्य विभाग ने 7.32 लाख रुपये वसूल लिया. यह पैसा सरकारी खाते में डालने के बजाय अधिकारी अपने पास रखे हुए हैं. कार्य से अधिक का कर दिया भुगतान ग्रामीण कार्य विभाग ठेकेदारों पर मेहरबान है. अधिकारी ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए हर गलत-सही कार्य करने की हिम्मत रखता है. इस कार्य की मापी पुस्तिका में गया कि सातवीं मापी तक 30.74 लाख रुपये का कार्य हुआ था. लेकिन नियम को ताक पर रखकर ठेकेदार को 32.72 लाख रुपये भुगतान कर दिया गया. यानी इंजीनियरों ने ठेकेदार को दो लाख रुपये अवैध तरीके से बांट दिया. ऑडिट ने सुझाव दिया कि संवेदक को किया गया अधिक भुगतान तत्कालीन कार्यपालक अभियंता और प्रमंडलीय लेखाकार से वसूली कर सरकारी खजाने में जमा किया जाये.

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