मुजफ्फरपुर : ऑटो टिपर खरीद में गड़बड़ी : मामले को लेकर प्राथमिकी दर्ज करने के बाद कार्रवाई शुरू
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Dec 2018 3:17 AM
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मुजफ्फरपुर : नगर निगम में करीब पौने चार करोड़ रुपये के ऑटो टिपर खरीद में हुए घोटाले की दर्ज प्राथमिकी के बाद विजिलेंस ने मामले की दोबारा जांच शुरू कर दी है. गुरुवार को प्रभारी एसपी सह डीएसपी कामोद प्रसाद के नेतृत्व में विजिलेंस टीम निगम पहुंची. करीब चार घंटे तक रुक नगर आयुक्त संजय […]
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मुजफ्फरपुर : नगर निगम में करीब पौने चार करोड़ रुपये के ऑटो टिपर खरीद में हुए घोटाले की दर्ज प्राथमिकी के बाद विजिलेंस ने मामले की दोबारा जांच शुरू कर दी है. गुरुवार को प्रभारी एसपी सह डीएसपी कामोद प्रसाद के नेतृत्व में विजिलेंस टीम निगम पहुंची. करीब चार घंटे तक रुक नगर आयुक्त संजय दूबे से जानकारी ली.
साथ ही घोटाले से संबंधित सभी मूल संचिका को टीम ने जब्त कर अपने साथ ले गयी. निगम के पास अब संचिका का फोटो कॉपी ही बच पाया है. इसके अलावा मामले में आरोपित बनाये गये दोनों पूर्व नगर आयुक्त रमेश प्रसाद रंजन, एडीएम डॉ रंगनाथ चौधरी, मेयर सुरेश कुमार के अलावा इंजीनियरों की पूरी कुंडली विजिलेंस ने खंगालना शुरू दिया है.
जांच टीम के मुताबिक, सभी आरोपित सरकारी कर्मी हैं. इसलिए कानूनी कार्रवाई शुरू करने से पूर्व सर्विस रिकॉर्ड से गांव व पिता के नाम लिया गया है. कई अधिकारी व इंजीनियरों का तबादला दूसरी जगह हो गया है.
फिलहाल वे किस पद पर और कहां तैनात हैं. इन सभी बिंदुओं पर जानकारी जुटायी गयी है. जानकारी हो कि प्राथमिकी के बाद केस के अनुसंधान की जिम्मेदारी डीएसपी मो खलील को मिली है.
लेनी होगी अग्रिम जमानत, नहीं तो हो सकती है गिरफ्तारी! : मामले में दर्ज प्राथमिकी में नामजद आरोपित बनाये गये तत्कालीन नगर आयुक्त सह वर्तमान में कल्याण विभाग पटना में तैनात रमेश प्रसाद रंजन, एडीएम डॉ रंगनाथ चौधरी, मेयर सुरेश कुमार समेत अन्य इंजीनियरों की मुश्किलें काफी बढ़ गयी हैं. अब इन सभी आरोपितों को जल्द-से-जल्द कोर्ट से अग्रिम जमानत लेना होगा.
अगर ऐसा नहीं करते हैं, तब विजिलेंस कभी भी इन आरोपितों की गिरफ्तारी कर सकती है. क्योंकि, सरकार से अनुमति मिलने के बाद ही विजिलेंस ने प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की है. विजिलेंस मामले की जानकारी रखने वाले अधिवक्ता प्रमोद कुमार शाही ने बताया कि आरोपितों की गिरफ्तारी अनुसंधानक के ऊपर डिपेंड करता है.
कोर्ट से भी वारंट लेकर गिरफ्तारी हो सकती है. ऐसे जांच के बाद तीन माह के अंदर अनुसंधानक को चार्ज शीट दायर कर देना चाहिए. इसके बाद कोर्ट की कार्रवाई होगी.
इन धाराओं में दर्ज है प्राथमिकी
निगरानी थाना पटना में कांड संख्या 56/18 दर्ज किया गया है. इसमें धारा 409, 467, 468, 471, 120(बी) भादवि की धारा- 13(2) सह पठित धारा- 13(1)(a) भ्रष्टाचार निरोध अधिनियम 1988 यथा संशोधित 2018 के तहत प्राथमिकी दर्ज है. जिसके अनुसंधानक डीएसपी मो खलील को बनाया गया है.
मिनी पंप व सुपर सकर मशीन खरीद घोटाले में भी हो कार्रवाई
ऑटो टिपर खरीद में हुए घोटाला में प्राथमिकी दर्ज होने पर निकटतम प्रत्याशी संघ के नेताओं ने हर्ष व्यक्त किया है. कहा कि नगर निगम में भ्रष्टाचार के खिलाफ पहली बार सरकार कोई बड़ी कार्रवाई की है.
ऑटो टिपर के साथ एलइडी स्ट्रीट लाइट, सड़क व नाला निर्माण, सुपर सकर मशीन की खरीद, मिनी पंप घोटाला समेत कई अन्य मामले में भी कार्रवाई होनी चाहिए. सरकार से संघ की तरफ से कार्रवाई करने की मांग की गयी है. प्रेस विज्ञप्ति जारी करने वाले में अध्यक्ष सुधीर ठाकुर के अलावा कन्हैया गुप्ता, महेश महतो, जफिर फरियादी, संजीव रजक, जनक सहनी आदि शामिल हैं.
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